लखनऊ, जन सामना ब्यूरो। एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर ने कहा कि आज वे और उनके पति आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ग्राम बिकरू, थाना चौबेपुर में घटी घटना सहित अन्य तमाम संबंधित घटनास्थलों पर जानकारी प्राप्त करने जा रहे थे। अमिताभ ने इसके लिए अपने वरिष्ठ अफसर से एक दिन का अवकाश लिया था और वे अपनी निजी कार से कानपुर के रास्ते में थे।
जब अमिताभ और नूतन लखनऊ बॉर्डर पर पहुंचे तो अमिताभ को अचानक फोन मिला कि डीजीपी, यूपी ने ऊपर का आदेश बताते हुए उन्हें कानपुर जाने से मना कर दिया है। अमिताभ को कहा गया कि उन्हें इसके लिए अनुमति नहीं दी जाएगी।
नूतन ने कहा कि चूँकि वे एक ही कार से जा रहे थे, अतः उनके पास वापस लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का यह कृत्य अत्यंत निंदनीय व अनुचित है। उन्होंने कहा कि आखिर ऐसे कौन से तथ्य हैं, जिन्हें सरकार छिपाना चाहती है और उन्हें डर है कि अमिताभ और नूतन के मौके पर जाने से वे तथ्य सामने आ जायेंगे।
नूतन ने कहा कि वे सच्चाई सामने लाने के लिए शीघ्र ही अकेले ही मौके पर जाएँगी।
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Jansaamna
कोरोना काल में साइकिल का क्रेज आये दिन बढ़ रहा है। अब लॉकडाउन के कारण बदली जीवन शैली और पर्यावरण के प्रति लोग अधिक जागरूक हो रहे हैं।तभी तो साइकिल की खरीदारी भी बढ़ रही है। आज युवाओं के अलावा इंजीनियर, प्रोफेसर, डॉक्टर, रिटायर कर्मचारी और प्रोफेशनल लोग भी सेहत बढ़ाने के लिए साइकिल की खरीदारी करने लगे हैं।
कानपुर नगर, अर्पण कश्यप।
(सिवानी मंडी)
अलवर, राजस्थान।
प्रयागराज, जन सामना ब्यूरो।
कल जब आठ पुलिस कर्मियों की बड़ी ही क्रूरता व निर्दयता से हत्यारे ने हत्या की, तब विपक्ष ने उसे हत्यारा कह-कहकर सरकार के नाक में दम कर दिया था। सोशल मीडिया से लेकर समाचारों के हर पन्नों पर विपक्ष की खोखली बयान बाजियां प्रमुखता से छाई हुई थीं, कि एक ऐसा खूंखार हत्यारा जो हमारे आठ पुलिस कर्मियों को मार कर खुलेआम घूम रहा है। आखिर उसके खिलाफ कार्रवाई कब होगी ? कल पुलिस कर्मियों के साथ दया भाव व घड़ियाली आसूं बहाने वाला यही विपक्ष जो सरकार पर सवालों के अंबार लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा था, अब वही विपक्ष जिसने उसे खूंखार हत्यारे से संबोधित किया, आज उस हत्यारे के एनकाउंटर किए जाने के बाद विपक्ष ने ऐसा रंग बदला कि उसके आगे गिरगिट भी रंग बदलने में मात खा गया। आठ पुलिस कर्मियों के घर वाले कल महज विपक्ष की बयान बाजियां सुनते रहे और आज वही विपक्ष पलटी मार हत्यारे के साथ जा खड़ा हो गया। अब कांग्रेस को ही ले लें , वह खूंखार हत्यारे की हत्या के बाद हत्यारे का पक्षधर बन मानवाधिकार आयोग में जा पहुंचा। कल शहीद हुए पुलिस कर्मियों के पक्ष में महज खोखले राग अलाप रहे इस विपक्ष ने उन आठ पुलिस कर्मियों के पक्ष में मानवाधिकार आयोग का दरवाजा नहीं खटखटाया और न ही उन पुलिस कर्मियों के परिजनों से मिल उन्हें कोई सांत्वना ही दी, बस दूर से राजनैतिक रोटियाँ सेंकने में ही व्यस्त दिखे।
मैंने कब मांगा है अपने प्रियतम के जीवन भर का साथ,
कानपुर नगर, जन सामना ब्यूरो।