विश्व हैंड वाश डे पर बालमंच के बच्चो ने हाथो को धुलकर दिया कोरोना भगाने का संदेश
लखनऊ। राजधानी में बच्चो को कल्चरल मंच प्रदान करने वाली सीटीसीएस फैमिली में विश्व हाथ धुलाई दिवस पर बच्चो को हाथ धुलने को प्रेरित किया गया ताकि वे भी सजग हो सकें कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से लड़ने को।अजंली फ़िल्म प्रोडक्शन से अजंली पांडेय के आवाहन पर सीटीसीएस फैमिली के निर्देशन में चल रहे, बाल मंच के सदस्यों द्वारा अपने बच्चो को हाथ धुलना बताया गया। अंजली पांडेय ने स्वयं भी हाथ धुलकर एवम मास्क पहनकर कोरोना संक्रमण से बचने की सलाह दी ।बाल मंच के निर्देशन में मुख्य रूप से अविका श्रीवास्तव, शाम्भबी शुक्ला,तृषा मिश्रा,कुमारी वैष्णवी,अदिरा श्रीवास्तव,श्रेया बिंदल,राध्या श्रीवास्तव एवं काव्या चतुर्वेदी सहित बच्चो के पेरेंट्स ने भाग लिया। 15 अक्टूबर को देश सहित विदेशों तक मे हाथो को समुचित तरह से धुलकर किसी भी तरह के संक्रमण से बचाव के लिए प्रयास एवं संदेश दिया जाता है।
Read More »
Jansaamna
पीलीभीत ।
ये बात आज से इक्कीस वर्ष पहले की है। मैं अपने ससुराल में रहती थी मेरी बिटिया डेढ़ साल की थी।अक्सर जब उसे सर्दी खांसी या बुखार होने पर मैं अपने गांव से कभी अपने पति के साथ और कभी सासू मां के साथ हस्पताल लेके जाती तो हमारे गांव से दो गांव के बाद एक बस स्टाॅप पर बस का इंतजार करना पड़ता।उस जगह मुझे एक अधेड़ उम्र का अजीब सा आदमी बहुत गौर से देखा करता था जो शक्ल से बहुत शराबी और डरावना सा लगता था। कभी कभी हम जिस बस से शहर जाते उसमें भी वो मुझे दिख जाता वो मुझे अपने किसी परिचित की तरह देखता रहता मैं भी एक दो बार उसकी तरफ देखने के बाद मन ही मन कहती बड़ा अजीब आदमी है जहां देखो वहां मौजूद रहता है और मुझे क्यूं ये देखते रहता है। एक दिन मुझे अपनी सासू मां के साथ शहर से गांव को वापस आने में बहुत शाम हो गयी। हम किसी तरह एक भीड़ भरी बस से वापस उसी स्टाॅपेज तक तो आ गये पर वहां से अपने घर तक जाने के लिए हमें किसी दूसरे साधन की जरूरत थी । देखते ही देखते रात के आठ बज गए पर हम दूसरी बस नहीं पकड़ सके। जाड़े की रात थी और गांवों के सड़कों पर तो वैसे भी बहुत जल्दी ही सन्नाटा हो जाता है। धीरे धीरे जो भी आठ दस लोगों की भीड़ थी वो भी शायद अपने आशियाने को चल पड़ी हमने कुछ लोगों को ये कहते भी सुना कि अब कोई साधन नहीं मिलने वाला आखिरी बस जा चुकी थी पर हमसे किसी ने यह ना पूछा कि हमें कहां जाना था।
लखनऊ, जन सामना।
फिरोजाबाद, एस.के. चितौड़ी।
फिरोजाबाद, एस.के. चितौड़ी।
शिकोहाबाद/ फिरोजाबाद, जन सामना।
शिकोहाबाद/ फिरोजाबाद, जन सामना।