Saturday, March 7, 2026
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लेख/विचार

बाइडेन, हैरिस की शपथ के साथ भारतीय मूल के अमेरिकियों का रहेगा दबदबा

नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की ह्यूस्टन में हुई रैली मैं 50000 हिंदुस्तानियों का सैलाब मौजूद था उसे देख कर लग रहा था मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती इस बार चुनाव में रंग लाएगी और ऐसा लगने लगा था की भारतीय मूल के अमेरिका निवासी हिंदुस्तानियों का झुकाव डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से हटकर रिपब्लिकन पार्टी की तरफ हो गया पर कमला हैरिस की जीत के साथ ही भारतीय मूल के 20 अमेरिकी सदस्यों घोषणा कर या तो उन्हें नियुक्त किया गया यह उनकी उन को चयनित किया गया पर यह बात तो तय है कि अमेरिका में रह रहे प्रवासी हिंदुस्तानियों ने मूल रूप से डेमोक्रेटिक दल को अपना स्पष्ट अभिमत तथा बहुमत देकर नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो वार्डन को अपना समर्थन दिया और कमला हैरिस के उपराष्ट्रपति बनते ही अमेरिकी भारत नीतियों में ज्यादा बदलाव होने के संकेत स्पष्ट रूप से दिए गए इस बार चुनाव में भारतीय मूल के अमेरिकी निवासी तथा वोटरों ने डेमोक्रेटिक पार्टी का साथ पूरी तरह निभा कर अपनी प्रतिबद्धता उनकी तरफ समर्पित की है, इसका बड़ा कारण कमला हैरिस का उप राष्ट्रपति बनना भी है कमला हैरिस मूलतः हिंदुस्तान में तमिलनाडु की माता तथा जमैका के निवासी पिता की संतान है|

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व्हाट्सएप की नई शर्ते—-

इस नए साल में व्हाट्सएप ने अपना एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है। जिसमें उपयोगकर्ताओं से व्हाट्सएप की न्यू टर्म्स एंड प्राइवेसी पॉलिसी में बदलावों को स्वीकार करने के लिए कहा गया है। 8 फरवरी 2021 तक ऐसा न करने पर उपयोगकर्ता के व्हाट्सएप अकाउंट को हटा दिया जाएगा। इस नोटिफिकेशन के मुताबिक अब व्हाट्सएप लोगों के डेटा को फेसबुक के साथ शेयर करेगा। व्हाट्सएप और फेसबुक एक ही कंपनी के हैं और यहां डेटा का मतलब है। लोगों के फोन नंबर, लोगों के कांटेक्ट और व्हाट्सएप स्टेटस जैसी तमाम जानकारियां। ये डेटा व्हाट्सएप अब फेसबुक के साथ शेयर करेगा और यदि किसी को ये शर्त स्वीकार ना हो तो वह अपने व्हाट्सएप अकाउंट को डिलीट कर सकता है। वर्ष 2021 की शुरुआत में ही व्हाट्सएप ने ये नई शर्तें लागू कर दी हैं किंतु 2009 में जब व्हाट्सएप लांच हुआ था तो उसने अपनी सारी सेवाएं फ्री में देने का लालच दिया था और लोगों के मैसेजेज और डेटा को प्राइवेट रखने का वादा किया था। अब दुनिया का हर तीसरा व्यक्ति व्हाट्सएप का इस्तेमाल कर रहा है और व्हाट्सएप पर करोड़ों लोगों के इस डेटा भंडार से फेसबुक का बिजनेस और बढ़ेगा तथा फेसबुक का और अधिक विस्तार होगा।
भारत में करीब 40 करोड़ लोग अपने पर्सनल और प्रोफेशनल जीवन में व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं। अब तो अदालतों और पुलिस के नोटिस तक व्हाट्सएप में भेजे जा रहे हैं और कानून ने इसे स्वीकार भी कर लिया है।

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कंटेनमेंट जोन के बाहर आंगनवाड़ी केंद्रों को फिर से खोलने का SC ने दिया आदेश

महामारी के प्रभाव को रोकने कार्यपालिका, न्यायपालिका व कोरोना वॉरियर्स का महत्वपूर्ण योगदान:भावनानी

गोंदिया, महाराष्ट्र| वैश्विक महामारी कोविड.19 को नियंत्रण में लाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास जारी हैं। भारत में दो वैक्सीन आ गई है। 16 जनवरी 2021 से पूरे देश में प्रथम चरण में 3 लाख कोरोना वॉरियर्स को वैक्सीन लगाने का लगाने काम शुरू हो चुका है। पहले दिन ही करीब 2 लाख के क़रीब लोगों को वैक्सीन सफलतापूर्वक लगाया गया है। जो कि पहले चरण का कार्य अभी जारी है। परंतु फिर भी अत्यंत सावधानी बरतने व सुरक्षात्मक प्रक्रिया को जारी रखना जरूरी है। खास करके छोटे बच्चों के लिए क्योंकि उनको वैक्सीन लगाने की फिलहाल कोई जानकारी या प्रक्रिया की घोषणा नहीं हुई है। अतः केंद्र, राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों को इस संबंध में कार्यनीति बनाना, तथा बच्चों को सुरक्षा, खाद्यपान इत्यादि उपलब्ध कराना उनतक पहुंचाना अनिवार्य है। जिनका उल्लेख राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षाअधिनियम 2013 में भी किया गया है। खासकर वर्तमान स्थिति में तो बहुत ही जरूरी हो गया है। इसी विषय से संबंधित माननीय सुप्रीम कोर्ट में बुधवार दिनांक 13 जनवरी 2021 को माननीय 3 सदस्यों की एक बेंच जिसमें माननीय न्यायमूर्ति अशोक भूषण, माननीय न्यायमूर्ति सुभाष रेड्डी व माननीय न्यायमूर्ति एम आर शाह की बेंच के सम्मुख रिट पिटिशन क्रमांक सिविल 1039/ 2020 याचिकाकर्ता बनाम भारत सरकार व अन्य के रूप में आया। माननीय बेंच ने अपने 31 पृष्ठोंऔर 35 पॉइंटों में अपने आदेश में कहा भारत सरकार के मंत्रालय महिला व बाल कल्याण विभाग द्वारा बुधवार दिनांक 11 नवंबर 2020 को जारी गाइड्स नोट के अनुसार सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों में जहां पर अभी आंगनवाड़ी शुरू नहीं की है।

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चुनाव और रैलियां हो रही है तो सरकारी भर्तियां क्यों नहीं.?

जारी आंकड़ों में देश भर में हरियाणा बेरोज़गारी में नम्बर एक पर है. यहाँ कि सरकार ने सभी भर्तियों को पंचवर्षीय योजना बनाकर रख दिया है. हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग कोर्ट की आड़ लेकर कोई भी भर्ती पूरी नहीं करना चाहता. नई भर्तियां तो दूर जिन नौकरियों के परीक्षा परिणाम आ चुके, उनके डॉक्युमेंट्स वेरिफिकेशन भी बहाना बनाकर लटकाये हुए है. आई.टी.आई. अनुदेशकों की लगभग ३००० पदों के लिए भर्ती पिछले दस सालों से लटकी हुई है. आखिर सरकार क्यों इन बेरोजगार आवेदकों के साथ भद्दा मजाक कर रही है. जे.बी.टी. की भर्ती किये आठ साल होने को आये. शिक्षा विभाग में लगभग ४०००० पद खाली पड़े है फिर भी सरकार कह रही कि हमने नौकरियां दी.
हरियाणा सरकार ने पिछले एक साल से नई भर्तियों पर रोक लगा रखी है, बहाना है कोरोना. जबकि इस दौरान चुनाव, रैलियां और आंदोलन खुलेआम जारी है. यही नहीं बेरोजगार युवाओं को लूटने के लिए प्रदेश की सबसे महंगी परीक्षा एचटेट सरकार ने मात्र पंद्रह दिनों में करवाकर अरबों रूपये एकत्रित कर लिए. जब बात इन एचटेट पास युवाओं के लिए शिक्षक भर्ती परीक्षा की आती है तो सरकार का सीधा-सा जवाब होता है कि हमारे पास शिक्षक पहले से ही सरप्लस है. अगर ऐसा है तो सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना में हरियाणा शिक्षा विभाग में चालीस हज़ार अलग-अलग शिक्षकों के पद खाली क्यों है?

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पहले कोरोना अब बर्ड फ्लू, करेला ऊपर से नीम चढ़ा

वर्ष 2020, 21 में भारत जैसे विकाशसील देश की अर्थ व्यवस्था को पहले कोरोना ने अरबो रुपयों नुकसान में धकेला है| अब बर्ड फ्लू जैसी संक्रामक बीमारी पोल्ट्री फॉर्म के व्यवसायियों को करोडो के नुकसान की चोट देने वाली है| इससे पूर्व भी बर्ड फ्लू ने भारत में कहर बरपा था, मुर्गियों को जमीं में दफनाना पड़ा था, और इसके व्यापारी करोड़ों का नुकसान झेल कर सड़क पर आ गये थे| इसी तरह कोरोना ने देश की अर्थ व्यवस्था को तहस नहस कर दिया था| अर्थ व्यवस्था को दुबले पर दो आषाड जसी स्थिति बन गयी है, बर्ड फ्लू स्वास्थ विभाग के हिसाब से कोरोना 2 से ज्यादा संक्रामक और खतरनाक भि है और तेजी से फ़ैलाने वाली भी, इससे देश को दुगुना सतर्क रहने की आवश्यकता होगी|

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त्यौहार एक लेकिन रूप नाम अनेक

ऐसे कई त्यौहार है जिसे पूरा देश एक साथ मनाता है इन्हीं पर्वों में से एक पर्व का नाम मकर संक्रांति है। विभिन्न राज्यों में भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाना जाता है। खुशी, उल्लास और उमंग से भरा यह त्यौहार उत्तर प्रदेश में खिचड़ी, पंजाब में लोहड़ी, गुजरात उत्तरायण और तमिलनाडु में पोंगल के रूप में अपनी सभ्यता और संस्कृति के आधार पर मनाया जाता है। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तब मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाता है। धीरे-धीरे सूर्य का प्रभाव बढ़ने लगता है और ग्रीष्म ऋतु का आगमन होने लगता है संक्रांति के दिन स्नान और दान का बहुत महत्व है
पंजाब में मकर संक्रांति
पंजाब में मकर संक्रांति को लोहड़ी के नाम से जाना जाता है। इस दिन मकर संक्रांति की पूर्वसंध्या पर लोग खुले स्थान में आग जलाते हैं और परिवार व आस−पड़ोस के लोग अग्नि की परिक्रमा करते हुए रेवड़ी व मक्की के भुने दानों को उसमें भेंट करते हैं और साथ ही आग के चारों ओर भांगड़ा करते हैं।

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व्हाट्सएप और प्राइवेसी का उल्लंघन

नई नीति के तहत, व्हाट्सएप पर चैट को प्रबंधित करने के साथ-साथ व्यवसायों को स्टोर करने के लिए फेसबुक द्वारा होस्ट की गई सेवाओं का उपयोग करने का तरीका बदल जाएगा। चिंताएं इस तथ्य से निकलती हैं कि अब तक फेसबुक, आदि जैसी संस्थाओं ने इस रुख को बनाए रखा कि वे किसी के साथ उपयोगकर्ता डेटा साझा नहीं करते हैं।
सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप में से एक व्हाट्सएप ने अपनी गोपनीयता नीति को अपडेट कर दिया है और उपयोगकर्ताओं को नए नियम और शर्तों को स्वीकार करने के लिए 8 फरवरी तक का समय दिया है। नई नीति इस मुद्दे पर चर्चा में है कि उपयोगकर्ता डेटा को किसी अन्य सोशल मीडिया प्रमुख फेसबुक के साथ अपने एकीकरण को कैसे प्रभावित किया जाता है, जो कि व्हाट्सएप की मूल कंपनी भी है। इस मुद्दे पर स्पष्ट करते हुए, व्हाट्सएप ने कहा कि गोपनीयता नीति व्हाट्सएप के व्यक्तिगत चैट के व्यवहार को नहीं बदलती है।
एक बयान में, व्हाट्सएप ने कहा: “अपडेट फेसबुक के साथ व्हाट्सएप के डेटा साझाकरण प्रथाओं को नहीं बदलता है और यह प्रभावित नहीं करता है कि लोग निजी तौर पर दोस्तों या परिवार के साथ कैसे संवाद करते हैं व्हाट्सएप लोगों की गोपनीयता की रक्षा के लिए गहराई से प्रतिबद्ध है।” लेकिन, गोपनीयता के दृष्टिकोण पर बहुत सी आशंकाएं हैं और यह हमारे डेटा को कैसे प्रभावित करता है ये सबसे बड़ा प्रश्न है ?

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सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लगाम ही आएगी काम

सोशल मीडिया की वजह से गलत खबर, फेक न्यूज, अफ़वाह, अभद्र भाषा आदि समाज में फैल गए है जो हर सेकंड व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से वायरल होते रहते है. सोशल मीडिया एक व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली संस्था है और एक ही समय में एक वरदान और शाप है. सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक स्वस्थ, संपन्न लोकतंत्र का अभिन्न अंग है. मगर उपर्युक्त समस्याएं सोशल मीडिया को कायम रखने में सक्षम बनाने और उस पर विश्वास करने में बाधक हैं. सही तरीके से, सही दृष्टिकोण, सही उद्देश्य और सही तरीके से सोशल मीडिया का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए हमें नए नियम बनाने होंगे
सोशल मीडिया संचार, सहयोग, शिक्षा जैसे विषयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और परिणामस्वरूप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को सार्वजनिक और सरकारी अधिकारियों की भागीदारी की तरह इसे महत्वपूर्ण मानते हैं. आज हमें सोशल मीडिया को सुरक्षित और संरक्षित रखने की जिम्मेदारी को समझने की जरूरत है ताकि यह समाज के लिए एक प्रगतिशील उपकरण के रूप में काम करे. इन प्लेटफार्मों पर बढ़ते उपयोगकर्ताओं के साथ, बढ़ती प्रौद्योगिकी और बढ़ते दुरुपयोग और दुरुपयोग के लिए प्रवृत्ति बढ़ गई है. सोशल मीडिया का वातावरण कई खतरे पैदा कर रहा है जो एक तत्काल समाधान की मांग करते हैं.

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नया वर्ष कैसा होगा?

पिछला वर्ष 2020 पूरे विश्व के लिए एक ऐसी महामारी लेकर आया जिसे हम कोविड.19 के नाम से जानते हैं। इस महामारी ने पूरे विश्व को हिला कर रख दिया। ऐसा लगा मानो इस महामारी की चपेट में आकर मानव जाति का सफाया ही हो जाएगा‌। किंतु ईश्वर की कृपा और हमारे समाज के जिम्मेदार व्यक्तियों के अथक प्रयासों से इस महामारी पर बहुत हद तक काबू पाया जा सका। सभी लोगों को इस महामारी से बचने के लिए मास्क लगाने, हाथों को बार.बार साबुन से धोनेए सैनिटाइजर का प्रयोग करने, आपस में दूरी बनाए रखने जैसी जरूरी हिदायतें देना और उन्हें इसके लिए जागरूक बनाना भी एक बड़ी चुनौती था, पर हमारी सरकार और मीडिया कर्मियों ने यह जिम्मेदारी बखूबी निभाई और इस महामारी को तेजी से फैलने से बचाया। फिर भी कुछ लोगों की लापरवाही, अज्ञानता और दुष्प्रयासों ने कइयों की जान ले ली।
खैर अब वर्ष 2020 विदाई ले कर जा रहा है और वर्ष 2021 का हमें स्वागत करना है। अभी कोरोना जैसी महामारी का अंत तो नहीं हुआ पर 2021 की शुरुआत में ही इसकी वैक्सीन हमें मिल गई है। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ा तोहफा है सन 2021 का। किंतु अब ब्रिटेन से कोरोना के एक शक्तिशाली स्ट्रेन के आने की खबर ने फिर से सब को डरा दिया है और अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या जिस वैक्सीन का आविष्कार हुआ है वह कोरोना के इस नए स्ट्रेन पर कारगर सिद्ध होगी। कई लोगों का मानना है कि हां यह कारगर सिद्ध होगी पर पूरी तरह से निश्चित न होने के कारण आशंका तो बनी ही हुई है।

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हताश डोनाल्ड ट्रम्प का आखिरी करतब

हार की हताशा और सत्ता की चाहत व्यक्ति को किस हद तक गिरा सकती है। इसका साक्षी 6 जनवरी 2021 दिन बुधवार बना। जब विश्व के सबसे पुराने लोकतन्त्र के मन्दिर अमेरिकी कांग्रेस में लोकतन्त्र की गरिमा तार.तार हुई, विश्व की एकमात्र महाशक्ति का मुखिया अपनी कुर्सी बचाने के लिए इस हद तक गिर जायेगा, ऐसा शायद ही किसी ने सोचा हो। एक व्यक्ति की उन्मादी महत्वाकांक्षा की कीमत अन्ततोगत्वा एक महिला सहित चार लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। यह आश्चर्यजनक और हतप्रत कर देने वाला है कि अपनी हार को जीत में बदलने की नाकाम कोशिश करते हुए अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति ने अपने ही देश की संसद पर हिंसक हमला करवा दिया। उनके इस कृत्य की निन्दा चहुँ ओर हो रही है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जहाँ इसे राजद्रोह की संज्ञा दी वहीँ पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसे बेहद अपमान एव शर्मिन्दगी का पल बताया। ट्रम्प समर्थकों की हरकत से नाराज उप राष्ट्रपति माइक पेंस ने इस अप्रत्याशित घटना को अमेरिकी इतिहास के सबसे काले दिन की संज्ञा दी है। उपराष्ट्रपति के अलावा ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के अनेक सीनेटर भी इस घटना से बेहद खफा हैं। अमेरिकी मीडिया ने तो डोनाल्ड ट्रम्प को खतरा करार देते हुए कहा कि वह कार्यालय में रहने के योग्य नहीं हैं। इसलिए उन्हें तत्काल पद से हटाया जाये। मीडिया द्वारा राष्ट्रपति ट्रम्प को महाभियोग प्रक्रिया या आपराधिक मुक़दमे के तहत जिम्मेदार ठहराने की भी मांग की गयी है। जर्मन की अन्तर्राष्ट्रीय रेडियो सेवा डॉयच वेले की अमेरिकी ब्यूरो प्रमुख इनेस पोल ने इस घटना के बाद लिखा कि हम एक ऐसे राष्ट्रपति का आखिरी करतब देख रहे हैं, जिसने बार.बार उन लोगों में हिंसा भड़कायीए जो उसे अपना नेता मानते हैं। ऐसा लगता है कि ट्रम्प अपनी पार्टी और उसके साथ ही लोकतन्त्र की बुनियाद को भी जलाकर तबाह करना चाहते हैं। भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने भी ट्वीटर के माध्यम से इस घटना पर दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि वाशिंगटन डीसी में दंगा और हिंसा की खबरें देखकर मैं व्यथित हूँ।शान्तिपूर्ण तरीके से सत्ता का क्रमबद्ध हस्तान्तरण जारी रहना चाहिए। लोकतान्त्रिक प्रक्रिया को गैरकानूनी विरोध के माध्यम से दबाव में आने नहीं दिया जा सकता।

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