Thursday, September 24, 2026
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विविधा

तनाव रहित जीवन जीने का नुस्खा- एम. अफसर खान ‘सागर’

पुस्तक – जीवन के अनसुलझे रहस्य की खोज
लेखक – मनीष
प्रकाशक – नोशन प्रेस, चेन्नई
कीमत – 199 रुपए
जिन्दगी की भाग दौड़ में इंसान भौतिक संसाधन जरूर हासिल कर रहा है मगर उसके जीवन से सकून गायब सा होने लगा है। तनाव रहित जीवन जीने के लिए लोग न जाने कितने तदबीर कर रहे हैं। ‘जीवन के अनसुलझे रहस्य की खोज’ पुस्तक के माध्यम से मनीष ने मेडिटेशन और योग को अपना कर तनाव रहित जीवन जीने की कला को बहुत फलसफाने अंदाज में बयान किया है। लेखक ने बतलाया है कि योग सही तरह से जीवन जीने का विज्ञान है। यह व्यक्ति के सभी पहलुओं पर काम करता है – भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक। पुस्तक के माध्यम से लेखक ने लोगों को योग के गूढ़ रहस्यांे से परिचय कराया है। भारतीय रेल सेवा के अधिकारी मनीष ने अति दुरूह ध्यान प्रयोगों के माध्यम से उस रहस्य को जानने का कामयाब कोशिश किया है। लेखक ने तकरीबन पन्द्रह सालों तक विश्व के तमाम धर्मों के विभिन्न शाखओं का अध्ययन एवं समकालीन विचारकों के ग्रंथों का गहन अध्ययन एवं विशलेषण करने के पश्चात यह पुस्तक लिखा है। लेखक ने बतलाया है कि भारतीय दर्शन की नींव सत्य, प्रेम, अहिंसा एंव सर्व कल्याण को ध्यान में रखते हुए रखी गयी है। इस संस्कृति में सत्य को प्रतिपादित करते हुए मानव कल्याण की खातिर मनसा, वाचा, कर्मणा की अवधारणा को महत्व दिया गया है। लेखक बतलाता है कि हमारा सबका सुख सामूहिक सुख है, और दुःख है। भारतीय दर्शन में अध्यात्म मनुष्य के वास्तविक स्वरूप को जानने के साथ-साथ भौतिक जगत के सम्बंध को भी पहचाना है।

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वसुधा ऑर्गेनिक किसानों के लिए अधिक कमाई और कम खर्च सुनिश्चित करता है

वर्तमान और भविष्य में लोगों, और धरती की शांति और समृद्धि के लिए साझा ब्लूप्रिंट प्रदान करने के उद्देश्य से 2015 में सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों द्वारा सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) को अपनाया गया था। सतत विकास लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय विकास संबंधित लक्ष्यों का समूह हैं, जिनको 2015 से 2030 तक हासिल करने की परिकल्पना की गई है। लेकिन यथार्थ की जमीन पर देखें तो 2030 तक सभी लक्ष्यों का पूरा होना संभव नहीं दिखता, इसलिए सरकारों और संस्थाओं ने प्राथमिकता के आधार पर लक्ष्यों को पूरा करने का संकल्प लिया है। वसुधा ऑर्गेनिक भी सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) का समर्थन करता है। वसुधा ऑर्गेनिक निम्नलिखित लक्ष्यों को प्राप्त करने की अपनी सोच पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति अपनाता हैरू गरीबी निषेध, भूख की समाप्ति, अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, जलीय जीवन, भूमि पर जीवन, शांति, न्याय, मजबूत संस्थाएं और लक्ष्यों के लिए साझेदारी। इन लक्ष्यों को गरीबी खत्म करने वाले, धरती की रक्षा करने वाले और सबके लिए शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने वाले वैश्विक लक्ष्यों के रूप में भी जाना जाता है। वसुधा आर्गेनिक, निरंतर विकास हेतु वैश्विक साझेदारी को पुनर्जीवित करने के लिए, अपने विभिन्न पहलों में फेयर ट्रेड, पीस इंडिया, टेक्सटाइल एक्सचेंज, एसएसी, कॉटन कनेक्ट, सीएंडए फाउंडेशन, बीसीआई, आदि सस्टेनेबल आर्गेनाइजेशन के साथ सहयोग करते हुए काम करता है।

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इंसान हो जाये

हर एक मुश्किल बहुत आसान हो जाये,
अगर इंसान अंदर से भी बस इंसान हो जाये ।
कहीं झगड़े न हो सब आपसी सद्भाव से रह लें,
अगर नीयत में हर इंसान के ईमान हो जाये।
किसी मजबूर की करने हिफाजत हाथ उठ जाये,
वो ही इंसान बस उसके लिये भगवान हो जाये ।
अगर होता नही तुमको ये लालच नेक नामी का ,
तुम्हारी खुद ब खुद अपने ही से पहचान हो जाये ।
गजल ऐसी लिखो ऐसी लिखो ऐसी लिखो ‘नीलम’,
कि वो सबके लिए इक इश्क का दीवाना हो जाये ।

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संघर्ष

जब टूटे हर सपना
जब रूठे हर अपना ।
जब परिस्थिति हो विकट
जीवन परीक्षा हो निकट
जी जान लगा दे तू
तन मन अर्पण कर दे तू ।
बस ध्यान रहे
मंजिल पर
उठे हर पद तेरा
लक्ष्य पथ पर !
बाधाएं चाहे कितनी आये
परिस्थिति चाहे कितनी भटकाये

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’एक टुकड़ा आज’ से

शक से देखी गयी भूमिका हर कदम।
ढूँढते जो रहे फायदा हर कदम।
बावफा से रखो राबिता हर कदम।
बेवफा को करो अनसुना हर कदम।
साथ उसके रहो साथ उसके चलो,
जो रहे हम कदम आपका हर कदम।
जिन्दगी के लिये जिन्दगी भर करो,
खूब हालात का सामना हर कदम।
हर कदम पर मिली कामयाबी उसे,
जो बना कर चला योजना हर कदम।
पा सका वो नहीं अपनी मंजिल कभी,
ठिठकता जो रहा काफिला हर कदम।
इस कदर डर गया आज हालात से,
ढूंढता फिर रहा आसरा हर कदम।
दिग्विजय हम उसे किस तरह से कहें,
है जिसे संघ का फोबिया हर कदम।
हमीद कानपुरी

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मेरे कृष्ण कन्हाई

काली अंधियारी रात को जन्म है जिसने पाया,
भादो कृष्ण अष्टमी को उस दिन रोहिणी नक्षत्र आया।
मोर मुकुट सिर धारण किया है कटि पे सुंदर लंगोट लिया है,
कानों में कुंडल विराजे है हाथ में मुरली साजे है।
माखन मिश्री चुराके जो खा जाता है,
ब्रज की हर बाला को फिर दीवाना कर जाता है।
गोपियों के संग जिसने मधुर किया है रास,
गोकुल में हुआ था अद्भूत जिसका निवास।
देवकी यशोदा जैसी पाई है जिसने दो-दो मैया,
नंदकिशोर नटवर नागर ऐसे हैं मेरे कन्हैया।
सबके दुख को हरने वाला ग्वालो संग धूम मचाने वाला,
बंसी की धुन पर नचाने वाला मुरली मनोहर है नंदलाला।
आओ मिलकर मनाएं जन्माष्टमी का त्योहार,
सजकर सुंदर दही हांडीयाँ भी है तैयार।
राधा की भक्ति और कृष्णा की शक्ति से आए खुशियों की बहार,
मुरली मनोहर की कृपा से मिले सफलता अपार।
।। जय श्री कृष्णा ।।

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आपसी झगड़ा खत्म करने के लिए हार मान लेना अच्छा है …

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा ‘‘अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति दूत से सम्मानित दादी डाॅ0 प्रकाशमणि जी का 11वाँ स्मृति दिवस 25 अगस्त को
विश्व सद्भावना दिवस के रूप में मनाया जायेगा
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईष्वरीय विष्व विद्यालय की पूर्व मुख्य प्रशासिका एवं संयुक्त राश्ट्र संघ द्वारा ‘‘अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति दूत से सम्मानित दादी डाॅ0 प्रकाशमणि जी का 11वाँ स्मृति दिवस 25 अगस्त को संगठन के अलीगढ रोड स्थित, आनन्दपुरी कालोनी के सहज राजयोग प्रशिक्षण केन्द्र पर मनाया जायेगा। यह जानकारी केन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी शांता बहिन ने दी।
दादी डाॅ0 प्रकाषमणी जी के व्यक्तित्व की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि स्वभाव से सरल दादीजी ने निमित्त भाव , निर्मल वाणी और निर्मानभाव से ही संसार को परमपिता परमात्मा षिव का संदेष दिया। वे कहती थीं कि संसार के आपसी झगडों का कारण ही अहंकार है। परिवार में रहते हुए यदि एक व्यक्ति अपनी हार मान ले तो झगडा खत्म हो सकता है। जीवन मूल्य एवं अध्यात्म की उनकी सेवाओं को मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय ने डाॅक्ट्रेट की उपाधि से सम्मानित किया। संगठन को 5 देषों से संसार के 136 देषों तक पहुँचाने वाली दादी डाॅ0 प्रकाशमणि जी का स्मृति दिवस 25 अगस्त को ब्रह्माकुमारीज संगठन द्वारा सारे संसार में ‘‘विश्व सदभावना दिवस’’ के रूप में मनाया जायेगा। आनन्दपुरी केन्द्र पर प्रातःकाल उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला जायेगा तथा शृद्धासुमन अर्पित किये जायेंगे।

 

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लघुकथा – रक्षाबंधन पर भाई-बहन दोनों विवश

राहुल आज बहुत खुश था आखिर उसे रक्षाबंधन के त्यौहार का हमेशा से इंतजार रहता है। क्योंकि आज उसकी बहन साक्षी घर आने वाली है, दोनों भाई बहन बचपन से साथ पले-बढ़े। लेकिन परिस्थिति कुछ ऐसी बनी कि राहुल आज एक करोड़पति और बहुत पैसे वाला व्यक्ति है, किंतु साक्षी जो शादी के बाद काफी दुखी रही और किसी कारणवश पति इतने पैसे नहीं कमाता कि उनका लालन-पालन अच्छी तरह कर सके। साक्षी गरीब होने के बावजूद भी एक स्वाभिमानी लड़की है और वह कभी भी नहीं चाहती कि उसका भाई उसकी कोई ज्यादा पैसों से मदद करें हमेशा की तरह साक्षी रक्षाबंधन वाले दिन राहुल के घर पहुंचती है और बड़ी खुशियों से राखी बांधने की तैयारी करती है। राहुल भी बहुत खुश है राहुल जानता है कि उसकी बहन उससे कभी कुछ भी फालतू पैसे नहीं लेगी तो इसीलिए उसे इस त्यौहार की हमेशा प्रतीक्षा रहती है। राखी बांधने के बाद राहुल ने एक लिफाफे में एक अच्छी रकम अपनी बहन साक्षी को दी। दोनों भाई और बहनों की आँखो में आँशु थे, बहन की आँखो में इसलिए आँशु थे कि उसका भाई उसकी गरीबी को बिना कहे समझ गया और भाई की आँखो में इसलिए आँशु थे कि पूरी तरह सक्षम होने के बावजूद भी वह अपनी बहन साक्षी की पूरी तरीके से मदद नहीं कर पा रहा था। बस इसी तरह हर साल का यह त्यौहार ऐसे ही चलता रहता है और दोनों भाई बहन की आँखों में नमी ऐसे ही विवशता से बनी रहती है।

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आत्ममंथन

यूँहि बेवक्त कभी बारिश में भीग कर देखो
वक्त की जेब से खुशियां चुरा कर देखो!
कब तक सिकुड़ के जीते रहोगे
कभी तो बाहों को फैला कर देखो!
हमेशा शिकायत रहती है लोगों से
कभी खुद की गलती सुधार कर देखो!
यूँहि जिये जा रहे हो खुद के लिये
थोड़ा वक्त जरूरतमंदों को देकर देखो!
सभी को जाना है यहां कोई अमर नही
जानते तो हो पर मानकर भी देखो!!
हर तरफ भ्रष्टाचार व्यभिचार दिख रहा
एक बार चुप्पी को तोड़ कर देखो!!
हमेशा लिखते हो दुनियादारी पर
कभी आत्ममंथन को लिख कर देखो!!

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नटखट तू गोपाल जैसा

नटखट तू गोपाल जैसा
प्रिय तू मुझको न कोई वैसा।
है हवाओं सी तुझमें चंचलता
चांद सी तुझमें है शीतलता।।
प्रखर सूरज सा ओज है मुख में
बादलों सा पानी है।
गंगा की निर्मलता तुझमें
तू प्यार की रवानी है।।
निश्छल तेरी यह मुस्कान
जग में है सबसे छविमान।
अटक अटक कर तेरा बोलना
सात सुरों की अद्भुत तान।।

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