कहीं सजी सितारों की तरह मस्जिदें,तो कहीं सजी आमदे रसूल की महफिल
रायबरेली, पवन कुमार गुप्ता। पैगम्बर के जन्मदिन के मौके पर यूं तो जिले भर में जुलूस ए मोहम्मदी के जश्न में भारी भीड़ उमड़ी।रसूल की पैदाइश का जश्न तो प्रातः चार बजे उस समय शुरू हुआ जब पैगम्बर के बाल की नुमाइश की गई।यौमे पैदाईश का यह जश्न पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया गया।इस खास मौके पर शहर की मस्जिदों को भी रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया।जिसे देख कर ऐसा लगता रहा है कि मानो तारों से मस्जिदों को रौशन किया गया हो।पूरी रात मस्जिदों व घरों में जश्न का माहौल रहा। ऊंचाहार क्षेत्र में भी इस जश्न का अच्छा खासा असर दिखा।
Jansaamna
रायबरेली,पवन कुमार गुप्ता ।
पर्यावरण के लिए प्लास्टिक पूरी दुनिया में बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। इसीलिए इसका उपयोग सीमित करने और कई प्रकार के प्लास्टिक पर प्रतिबंध की मांग उठती रही है। भारत में भी ऐसी ही मांग निरन्तर होती रही हैं और समय-समय पर इसके लिए अदालतों द्वारा सख्त निर्देश भी जारी किए जाते रहे हैं किन्तु इन निर्देशों की पालना कराने में सख्ती का अभाव सदैव स्पष्ट परिलक्षित होता रहा है। यही कारण है कि लाख प्रयासों के बावजूद प्लास्टिक के उपयोग को कम करने में सफलता नहीं मिल पा रही है।
गौरी बालकनी में बैठे-बैठे अपने अतीत की यादों में खोई हुई थी। कैसे बाल्यकाल से ही सबसे बड़ी होने का दायित्व निभाया। कभी छोटी बहन अस्वस्थ हूई, असमय पिता एक्सीडेंट का शिकार हुए, उसके बाद माँ की ज़िम्मेदारी और भाई की मानसिक स्थिति। इन सबके बीच गौरी केवल और केवल परिस्थितियों से जूझती रहीं। गौरी की बाल्यावस्था तो मात्र संघर्ष की अनवरत यात्रा थी। बाल्यकाल में तो उसे कभी सुख की परिभाषा समझ ही नहीं आई। कुछ समय पश्चात शुरुआत हुई किशोरावस्था की। गौरी को चन्द्रशेखर का साथ मिला। पर यह क्या था चन्द्रशेखर की नजर में तो गौरी की कोई कीमत ही नहीं थी। वह तो सिर्फ उसके लिए खाना बनाने वाली थी। ससुराल वालों की जिद के चलते लड़का होने की लालसा में उसने चार-चार पुत्रियों को जन्म दिया। प्रसव पीड़ा से लेकर बच्चियों के लालन-पालन में परिवार का न मानसिक और न शारीरिक सहयोग मिला। पर गौरी ने अपनी पुत्रियों की शिक्षा-दीक्षा में स्वस्तर पर भी भरसक प्रयत्न किए।
चंदौली।
भारत में असंगठित क्षेत्र विशाल स्तर पर है। साथियों हम आगे चर्चा करें इसके पहले हमें संगठित और असंगठित श्रमिकों के बारे में समझना होगा। संगठित क्षेत्र वह है जो उचित प्राधिकारी या सरकार के साथ शामिल हो और उसके नियमों और विनियमों का पालन करे। इसके विपरीत, असंगठित क्षेत्र को सेक्टर के रूप में समझा जा सकता है, जो सरकार के साथ शामिल नहीं है और इस प्रकार, किसी भी नियम का पालन करने की आवश्यकता नहीं है।…
सलोन/रायबरेली, पवन कुमार गुप्ता।
फिरोजाबाद।