♦ गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने किया पुरस्कृत
♦ राजभाषा का प्रचार-प्रसार हमारी कार्य-संस्कृति में समाहित है: मनदीप सिंह छाबड़ा
पवन कुमार गुप्ता: रायबरेली । गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जोधपुर, राजस्थान में आयोजित राजभाषा सम्मेलन में राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र तथा गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा व निदेशक आईआईटी जोधपुर सांतनु चौधरी द्वारा राजभाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु गृह मंत्रालय भारत सरकार का उत्तर क्षेत्रीय राजभाषा उत्कृष्ट प्रदर्शन का द्वितीय पुरस्कार एनटीपीसी ऊंचाहार को प्रदान किया गया। यह पुरस्कार एनटीपीसी ऊंचाहार के महाप्रबंधक (ईंधन प्रबंधन) के. डी. यादव व वरिष्ठ प्रबंधक (राजभाषा) श्रीनिवास शर्मा ने राजभाषा सम्मेलन में प्राप्त किया।
राजभाषा सम्मेलन में प्रतिभाग करने के पश्चात वापस ऊंचाहार परियोजना पहुंचने पर मानव संसाधन प्रमुख रूमा दे शर्मा ने परियोजना प्रमुख को राजभाषा पुरस्कार सौंपा और उनके मार्गदर्शन हेतु उनका आभार प्रकट किया। इस अवसर पर परियोजना प्रमुख मनदीप सिंह छाबड़ा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि एनटीपीसी ऊंचाहार विद्युत उत्पादन में अग्रणी रहने के साथ-साथ राजभाषा के उत्थान के प्रति भी पूर्ण रूप से समर्पित है। राजभाषा का प्रचार-प्रसार हमारी कार्य-संस्कृति में समाहित है। हिंदी हम भारतीयों के दिलों में वास करती है।
Jansaamna
भारत राष्ट्र का नाम आते ही भारत के अनेक उपनाम जुड़ते चले जाते हैं यथा, विश्व गुरु भारत, सांस्कृतिक भारत, आध्यात्मिक भारत, गौरवशाली भारत, संस्कारित भारत, सनातनी भारत, कलात्मक भारत, प्राचीन भारत, अनादि भारत, अनंत भारत, विज्ञानमय भारत और मृत्युंजय भारत। जब इतनी उपमाओं से भारत विभूषित है तो समझ आता है, कि कितना सबकुछ दुनिया को भारत ने दिया हैं। दूसरी ओर यह पीड़ा भी होती है कि इतना कुछ देने वाला मेरा भारत आज कहां खो गया ? इसके साथ ही प्रश्नों की एक श्रंखला बनती है कि क्या भारत कभी फिर वैसा बन पाएगा ? क्या फिर कोई राजा हरिश्चंद्र आएगा जो सत्य का पाठ पढ़ाएगा ? क्या फिर से कोई राजा राम आयेंगे और राम राज्य का स्वप्न साकार करेंगे ? क्या कोई चन्द्रगुप्त आएगा जो फिर भारत की सीमाओं को सुरक्षित करेगा ? क्या कोई समुद्रगुप्त पुनरू भारत में स्वर्णयुग लाएगा ? क्या कोई शिवाजी फिर से जन-जन में स्वराज्य का भाव पैदा करेगा ? ऐसे कई प्रश्न बरसों से तलाश किए जाते रहे हैं जिनका उत्तर एक ही हो सकता है कि पुनः भारत अपनी खोई प्रतिष्ठा प्राप्त करे। भारत के संपूर्ण समाज में फिर से भारत को रामराज्य बनाने की इच्छा हिलोरे लें, तभी भारत का भाग्योदय संभव हैं ।
हाल ही में कांग्रेस के एक पूर्व सांसद ने ट्विटर पर बयान दिया था कि 500 साल बाद मनुवाद की वापसी हो रही है। इसे कांग्रेसी नेता की ओछी बयानबाजी तथा वितण्डावाद के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं कहा जा सकता। मनुस्मृतिः भारतीय वांग्मय का वेदों के बाद सबसे पुराना ग्रन्थ है, जिसे प्राचीन संविधान कहा जाता है। इसी मनुस्मृतिः के आधार पर न केवल भारत बल्कि विश्व के बहुत बड़े भूभाग की सामाजिक एवं राजनीतिक व्यवस्था हजारों वर्षों तक निर्बाध एवं निर्विवादित रूप से संचालित होती रही है। मनुस्मृतिः में जहाँ सृष्टि की उत्त्पति का वृतान्त है वहीँ चारो वर्णों, चारो आश्रमों, सोलह संस्कारों, राज्य की व्यवस्था, राजा के कर्तव्य, सेना प्रबन्धन तथा दण्ड विधान की सकारण नियमावली भी वर्णित है। इसमें अधिकारों की अपेक्षा कर्तव्य या दायित्व को अधिक महत्त्व दिया गया है। भारतीय संस्कृति की अवधारणा के मूल ग्रन्थ मनुस्मृतिः में वर्णित दिनचर्या का अनुपालन करके कोई भी व्यक्ति अनुशासित एवं निरोगी जीवन जी सकता है। किसी भी बालक को संस्कारी तथा कर्तव्यपरायण बनाने की सम्पूर्ण प्रक्रिया इस ग्रन्थ में चरणबद्ध तरीके से दी गयी है। परन्तु दुर्भाग्यवश भारतीय संस्कृति का प्रणेता यह महान ग्रन्थ भारत की ही धरती पर दिन प्रतिदिन अस्पृश्य बनता जा रहा है। 20वीं शताब्दी के प्रारम्भ में डॉ.भीमराव आम्बेडकर इस ग्रन्थ के सबसे बड़े आलोचक बनकर उभरे थे। जाति व्यवस्था के लिए मनुस्मृतिः को सर्वाधिक दोषी मानते हुए उन्होंने 25 दिसम्बर 1927 को इसकी प्रति अलाव में जला दी थी। तब महात्मा गाँधी ने मनुस्मृतिः को जलाने का विरोध करते हुए कहा था कि ‘यह ग्रन्थ किसी के अधिकारों को नहीं अपितु कर्तव्यों को परिभाषित करता है।
लखनऊ: जन सामना डेस्क। उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योजना भवन में आहूत एक उच्चस्तरीय बैठक में उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की अद्यतन प्रगति की समीक्षा की।
सिकंदराराऊ, हाथरस। सिकंदराराव प्रेस क्लब की एक बैठक सोमवार को कासगंज रोड स्थित ममता फार्म हाउस में सम्पन्न हुई । जिसमें 10 जनवरी बुधवार को दोपहर 12 बजे से कासगंज रोड स्थित ममता फार्म हाउस में आयोजित होने वाले तहसील स्तरीय पत्रकार सम्मेलन के विषय पर चर्चा की गई।
रायबरेली। जिले के मुंशीगंज स्थित सई नदी तट को दूसरा मिनी जलियांवाला बाग कांड को घटना के नाम से जाना जाता है। 7 जनवरी 1921 को निहत्थे किसानों पर गोलियों की बौछार की गई, जिसमें हजारों किसानों की मौत हुई थी व सैकड़ो घायल हुए उन्हीं किसानों की बलिदान की याद में आज किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने आए हैं। यह उदगार उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष जीसी सिंह चौहान ने शहीदों के लिए आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। प्रदेश मीडिया प्रभारी एस.के. सोनी ने जानकारी देते हुए बताया कि जहां संगठन लगातार गरीब असहायों की मदद सहित निःशुल्क शव दाह संस्कार करता है, वहीं शहादत की कुर्बानी में अपनी जान गवानें वालों को सम्मान सहित उनके परिवार को सम्मानित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ता है। चौहान गुट प्रदेश अध्यक्ष जीसी सिंह चौहान व उनकी टीम ने कार्यक्रम मे शहीद किसान परिवारों को अंग वस्त्र सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया। साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों को भी सम्मानित किया ।
फिरोजाबादः जन सामना संवाददाता। स्वामी विवेकानंद मानव सेवा समिति द्वारा एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम का आयोजन नगर के पालीवाल हॉल में किया गया। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों द्वारा दी गई रंगारंग और शहीदों से जुड़ी भावपूर्ण प्रस्तुतियां देख दर्शकों की आंखे नम हो गई। कर्यक्रम में शिक्षाविद एवं अन्य क्षेत्रों में कार्य करने वाले समाज सेवियों को सम्मानित किया गया।
फिरोजाबादः जन सामना संवाददाता। अयोध्या से आए पूजित अक्षत एवं राम मंदिर के चित्रों का वितरण स्वयंसवेकों द्वारा घर-घर जाकर किया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को रामभक्तों ने घर-घर जाकर पूजित अक्षत एवं राम मंदिर के चित्रों का वितरण किया। साथ ही 22 जनवरी को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन प्रत्येक घरों में दीपक जलाकर दीपावली बनाने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान वरुण, सुनील राठौर, पूर्व पार्षद विनाका राठौर, पार्षद ऊषा राठौर, डीपी सिंह, गेंदालाल राठौर, सुरेंद्र ओझा, संतोष बघेल, घनश्याम दास, ब्रजेश, पवन, जगजीत आदि मौजूद रहे।