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कलाकारों का अब नहीं होगा शोषण- नुपुर अलंकार

देश के दूर-दराज के गांवों, कस्बों व शहरों से लड़के-लड़कियां फिल्मी दुनिया में भविष्य के सुनहरे सपने लेकर आते हैं, लेकिन यहां आकर वो सब एक ऐसे भंवर में फंस जाते हैं जिससे उनका जीवन धीरे-धीरे दर्द भरा हो जाता है। काम के नाम पर निर्माता उनका इतना अधिक शोषण करते हैं कि कम पैसों पर अधिक से अधिक काम लिया जाता है। जिस कारण एक्टर्स भिन्न-भिन्न बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। मनोरंज की दुनिया में जनता उनके एक सुखमय जीवन की सोच रखती है, लेकिन क्या हम जानते हैं कि पर्दे के पीछे रियल लाइफ में उनका जीवन किन परेशानियों से भरा पड़ा है।
इंडस्ट्री में एक्टर्स के हित में काम करने वाली संस्था ‘’सिने एण्ड टीवी आर्टिस्टएसोसिएशन’’ (सिंटा) ने इनकी समस्याओं को लेकर अब बहुत ही गंभीर हो गयी है। जिसके के परिणाम स्वरूप मायानगरी में रह रहे कलाकरों को तनाव व जटिलताओं से मुक्त जीवन जीने में मदद करने के लिए संस्था विभिन्न प्रकार की वर्कशॉप का आयोजन कर रही है। सिंटा की ऐसी कुछ योजनाओं के बारे हमको जानकारी दे रही हैं इस संगठन की एक्टिव मेम्बर नुपुर अलंकार। जोकि टीवी और फिल्म की दुनिया में काम करने वाले और यहां आने वाले लोगों के लिए बहुत ही लाभकारी साबित होगी। तो आगे पढ़ते हैं उनके द्वारा दी गयी उपयोगी बातों को-
किसी भी शूटिंग के सेट पर जाने के लिए लगभग 2.30 से 3 घंटे का समय कलाकारों को लगता है। चूंकि यहां जो कलाकार काम करने के लिए आते हैं उनके अंदर जोश और जुनून कूट-कूट कर भरा होता है। इनकी आयु भी 20 से 25 वर्ष की होती है। जिसका गलत फायदा उठाते हुए निर्माता उनसे इतना अधिक काम लेते हैं कि धीरे-धीरे उनकी तबियत खराब होने लगती है, बीमार होने पर उनको हटा कर दूसरे कलाकार को ले लिया जाता है। जो एक्टर्स बहुत दिनों से इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं उन सब की सेहत में गलत प्रभाव पड़ रहा है। हमसे पहले जो भी लोग सिंटा कि कमेटी में रहे है उन्होंने एक्टर्स की ऐसी समस्याओं के लिए कोई भी सशक्त कदम नहीं उठाए। जिस कारण ऐसी समस्याएं दिन पर दिन विकराल होती चली गयीं। इसी का एक ज्वलंत उदाहरण है टीवी सीरियल ऐसी दिवानगी देखी नहीं कहीं के सेट पर अभिनेत्री ज्योति शर्मा चार बार मुर्छित हुयी, तो मुझे सेट पर जा कर उसकी मदद करनी पड़ी। वहीं अभिनेता प्रनव मिश्रा को टांग में सूजन व दर्द होने के बावजूद 4 माह तक छुट्टी नहीं दी गयी। जिस कारण काम के भीषण दबाव व तनवा के चलते दोनों ने खुद को इस सीरियल से अलग कर लिया। इसन दोनों से 18 से 20 घंटे का काम लिया जा रहा था। ऐसा सिर्फ इन दोनों एक्टर्स के साथ ही नहीं हो रहा है इस पंक्ति में ऐसे बहुत से एक्टर्स शामिल हैं। लेकिन अब सिने एण्ड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन (सिंटा) की केअर कमेटी ऐसे मामलों में एक्टर्स की मदद करने का बीड़ा है। सिंटा अब एक्टर्स का शोषण नहीं होने देगा। जिसके लिए ऐसे एक्टर्स की काउंसलिंग की जाएगी, उनको यह बताया जाएगा कि ओवर वर्क करने से उनको आगे क्या बीमारियां होने वाली है जिसके चलते उनको काम भी नहीं मिलेगा। इसके लिए तीन दिन का 20, 21 और 22 फरवरी को सेशन रखा गया। जोकि तीन घंटे प्रति दिन का रहा। जिसमें सिंटा एक्टर्स को बताया गया कि जब वो लोग बहुत बिजी शेड्यूल में होते हैं तो उनको कब और क्या खाना चाहिए, जिससे तबियत में कोई ज्यादा बुरा प्रभाव न पड़ें। जब नींद पूरी न हो तो कैसे अपने शूटिंग टाइम में भी योग के द्वारा खुद को ठीक रखना है। इस वर्कशॉप में एक खास बात यह रही कि एक्टर्स को मेडिटेशन की जानकारी देने के साथ ही उससे होने वाले अनेकों फायदों के बारे में बताया गया। ऐसी सभी महात्वपूर्ण विष्यों की जानकारियां देने व काउंसलिंग के लिए सिंटा द्वारा बहुत सारे योगा इंस्ट्रेक्टर्स, फीजियोथेरेपिस्ट, एक्यूप्रेसर-एक्यूपंचर स्पेशलिस्ट, साईक्रेटिस्ट और आयुर्वेद के डॉक्टर्स को बुलाया गया था। जिनका प्रतिदिन 40-40 मिनट के अलग-अलग सेशन रखे गए थे। इसमें विशेष जानकारी यह भी दी गयी कि देश के दूर-दराज के भागों से सुनहरे भविष्य के सपने लिए अभिनय की दुनिया का हिस्सा बनने जो भी युवक-युवतियां मुम्बई एक्टर बनने आते हैं उनको सर्व प्रथम सिंटा से सम्पर्क करना चाहिए। उन सभी को सिंटा का मेम्बर बनने से पहले यह जान लेना चाहिए कि इंडस्ट्री के हालात कैसे हैं और वो किस दलदल में घुसने जा रहे हैं, क्या वो इसके लिए तैयार है और अगर नहीं है तो सिंटा मेम्बर बनने के बाद उनको तैयार करने की गारंटी सिंटा कि तरफ से मैने खुद ली है। जो भी युवा मुम्बई की फिल्मी दुनिया में काम करने के लिए आते हैं, उनको यहां पर गलत हाथों द्वारा मिस गाइड किया जाता है कि यहां तो समझौता करना पड़ता है, काम हासिल करने के लिए काम के घंटे नहीं देखे जाते तो मैं यह कहूंगी कि आने वाले युवाओं को ऐसे लोगों से बचना जरूरी है। जिसके लिए उनकी हर प्रकार की मदद सिंटा के द्वारा की जाएगी।
मेरा प्रयास है कि सिंटा की आवाज देश के हर गांव, कस्बे और शहर तक पहुंचे। जिससे वहां से आने वाले युवाओं को मायानगरी की सभी अच्छी व बुरी बातों की जानकारी हो सके और वह सब यहां आने के बाद हर परेशानी का डट कर मुकाबला कर सकें।