Monday, December 17, 2018
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दिनों दिन बढ़ता प्रदूषणः चिन्ता का विषय

पर्यावरण में दिनों दिन बढ़ता प्रदूषण अब हर एक के लिए चिन्ता का विषय बनता जा रहा है। पर्यावरण में असन्तुलन का ही नतीजा कहा जा सकता है कि असमय बारिस, सूखा पड़ना, हिम स्खलन, भू-कम्पन आदि जनजीवन को प्रभावित कर रहे हैं। तमाम तरह की बीमारियां भी अपने पैर पसार रहीं हैं और तन व धन दोनों को क्षतिग्रस्त कर रहीं हैं। नतीजन पिछले दो दशको में पर्यावरण ने नीति निर्माताओं वैज्ञानिकों और विश्व के अनेक देशों में आम आदमी का ध्यान आकर्षित किया है। सूखा, ईंधन की कमी, जलाने की लकड़ी और चारा, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, रासायनिकों के प्रयोग से मृदा प्रदूषण और विकिरणों की भयावह समस्या, प्राकृतिक संसाधनों, वन्य जीवन का लुप्त होना एवं वनस्पति तथा जीव-जंतुओं को खतरे जैसे मुद्दों के प्रति अधिक सतर्क होते जा रहे हैं। लोग अब वायु, जल, मृदा और पौधों जैसे प्राकृतिक ससाधनों की रक्षा करने की आवश्यकता के प्रति सजग दिखाई देने लगे हैं ।
वास्तव में पर्यावरणीय मुद्दे बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके समाधान के बिना स्थिति बहुत भयावह हो सकती है। यदि समय रहते पर्यावरणीय समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया गया और उनको हल नहीं किया गया तो यह पृथ्वी भावी पीढ़ी के रहने योग्य नहीं रहेगी। इस सच्चाई से इन्कार नहीं किया जा सकता कि भविष्य को संभव बनाने के लिए पर्यावरण की रक्षा एवं बचाव करना अनिवार्य है और इस कार्य में जन जन की भागेदारी की जरूरत है। हां वास्तव में मनुष्य की आवश्यकताएं बढ़ गई है और उनके अनुरूप पर्यावरण में परिवर्तन किए जा रहे है। फिर भी पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति अनदेखी उचित नहीं कही जा सकती है। विशेष रूप से जब बढ़ती जनसंख्या और प्रौद्योगिकी का दबाव निरंतर बढ़ रहा है। आज अक्षय विकास तथा परिवर्तनशील पर्यावरण के सुधार एवं संरक्षण की आवश्यकता है। लेकिन खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों वजाय शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण के प्रति सजग रहना बेहद जरूरी है क्योंकि शहरी आबादी पर्यावरण को ज्यादा प्रदूषित कर रही है। हालांकि तमाम स्वयं सेवी संगठन इस ओर जागरूकता लाने पर जोर दिए हैं लेकिन वो नाकाफी साबित हो रहे हैं। इस लिए जन जन को अपनी सहभागिता निभाने की जरूरत है जिससे कि पर्यावरण को हो रहे नुकसान से बचाया जा सके और भावी पीढ़ियों को सुरक्षित व स्वच्छ पर्यावरण में जीने का अवसर मिले।