Home » मुख्य समाचार » कभी चंद रूपयों की नौकरी करने वाला युवक बना राजनीति का धुरंधर, पत्नी हैं मोदी सरकार में कद्दावर मंत्री अब खुद बनेगा विधायक

कभी चंद रूपयों की नौकरी करने वाला युवक बना राजनीति का धुरंधर, पत्नी हैं मोदी सरकार में कद्दावर मंत्री अब खुद बनेगा विधायक

मीरजापुर, संदीप कुमार श्रीवास्तव। मीरजापुर इंजीनियर की नौकरी छोड़ राजनीति में आए अपना दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल आज अपनी सक्रिय राजनीति पारी का आगाज करने जा रहे हैं। सोमवार को भाजपा गठबंधन की तरफ से उम्मीदवार के तौर पर विधान परिषद के ग्यारहवीं सीट के लिए उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल किया। विधान परिषद के 13 सीटों पर हो रहे चुनाव में भाजपा गठबंधन 11 सीटे जीत हासिल कर सकती है। मूल रूप से चित्रकूट के रहने वाले आशीष पटेल जल निगम में इंजीनियर थे। कानपुर में तैनाती के दौरान 2014 में उनकी शादी अपना दल अध्यक्ष सोने लाल पटेल कि दूसरी बेटी अनुप्रिया पटेल के साथ हुई।
अनुप्रिया पटेल राजनीतिक परिवार से जुड़े होने के कारण शुरू से ही पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाती रही। प्रखर वक्ता और पार्टी में सक्रिय भूमिका के कारण उन्हें कार्यकर्ता सोनेलाल पटेल के उत्तराधिकारी के रूप में देखते थे। हालांकि पेशे से इंजीनियर आशीष पटेल के साथ 2009 मे शादी के बाद अनुप्रिया पटेल के राजनीतिक कैरियर पर विराम लगने कि संभावना जताई जाने लगी थी। मगर यह आशंका गलत साबित हुई और आशीष पटेल ने सरकारी कामकाज की तमाम व्यस्तताओं के बाद भी समय निकाल कर अनुप्रिया पटेल को पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए उत्साहित किया। इस दौरान वह अपरोक्ष रूप से अनुप्रिया को राजनीति में मदद भी करते रहे।
2012 में अनुप्रिया पटेल वाराणसी जिले के रोहनिया सीट से चुनाव मैदान में थीं। पति आशीष पटेल के कुशल रणनीति का परिणाम रहा कि सपा की लहर के बावजूद भी अनुप्रिया ने बड़े अंतर से इस सीट पर जीत दर्ज किया। 2014 में यूपीए सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए भाजपा मोदी की अगुवाई में रणनीति बना रही थी। अपना दल का भाजपा से गठबंधन हो गया। इस गठबंधन में अपना दल को दो सीटें मिलीं। ये दो सीटें थी मिर्जापुर संसदीय सीट और प्रतापगढ़ संसदीय सीट।
मिर्जापुर सीट पर खुद अनुप्रिया पटेल ने चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीत हासिल कर मोदी सरकार में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री बनी। हालांकि इस दौरान अपना दल में पारिवारिक कलह भी सामने आया। जिसमे माँ कृष्णा पटेल और बेटी अनुप्रिया पटेल के बीच तकरार इतनी बढ़ी कि पार्टी का बंटवारा हो गया। आशीष पटेल ने अनुप्रिया पटेल कि मदद से अपनादल (सोनेलाल) के नाम से नए दल कि स्थापना किया। 2017 में अपना दल (एस) के आशीष पटेल अध्यक्ष बन गये। पार्टी को खड़ा करने और उसको सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जहाँ पार्टी का चेहरा अनुप्रिया पटेल थी तो पार्टी में पर्दे के पीछे रणनीति बनाने और लागू करने में महारथ हासिल आशीष पटेल ने हर वक्त पार्टी में अपने पैंतरे से जोश भरे रखा। राष्टीय अध्यक्ष बनने के सिर्फ 6 महीने के अंदर पहली बार 2017 के विधान सभा चुनाव मे पार्टी उतरी इस नई पार्टी को भाजपा के साथ गठबंधन में मिली 12 सीटों में से 9 सीटों पर सफलता प्राप्त हुई। विधान सभा मे पार्टी के विधायकों कि संख्या 0 से 9 विधायको तक पहुंच गयी। इतना ही नहीं छह महीने पहले ही बनी इस पार्टी और इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल ने यूपी में कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल को पीछे छोड़ दिया।
आशीष पटेल के नेतृत्व में आज अपना दल (सोनेलाल) 9 विधायक और 1 सांसद सहित यूपी कि प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी बन गयी है। जिसका जनाधार पटेल और कुर्मी मतदाता हैं। अब पर्दे के पीछे कि भूमिका छोड़ आशीष पटेल पहली बार राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय भूमिका में होंगे। पत्रिका से बात करते हुए आशीष पटेल ने स्वीकार भी किया कि पहली बार उनके सक्रिय राजनीति कि शुरुआत हो रही है। फिलहाल उम्मीद जताई जा रही है कि विधायक बनने के बाद आशीष पटेल अगले मंत्रीमंडल विस्तार में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल हो सकते है।