Wednesday, October 17, 2018
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मत्स्य पालक अपनी मर्जी से तालाबों में बीज, खाद आदि डालने से लाभ के स्थान पर हो रही हानियां

कानपुर देहात, जन सामना ब्यूरो। जनपद के मत्स्य तालाबों में मत्स्य पालक अपनी मर्जी के अनुसार तालाबों में मत्स्य बीज, खाद एवं पूरक आहार आदि मनमानी तरीके से डाल रहे है। जिससे लाभ के स्थान पर हानि हो रही है। ताबालों में उसकी क्षमता से कई गुना अधिक मत्स्य बजी संचय किया जा रहा है जिससे तापमान बढने व पहली बरसात में मछलियों की मृत्यु अधिक हो रही है। यह जानकारी देते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य पालक विकास अभिकरण डा0 रणजीत सिंह ने देते हुए बताया कि जनपद के असलना, फैजाबाद, हिमापुरवा, कुॅवरपुर, तुर्कीमऊ, चांदापुर, मुर्रा, मोहम्मदपुर, अकबरपुर, अमरौधा, दुर्गापुरवा आदि गांव के तालाबों में अत्यधिक मत्स्य बीज संचय व गोदाम का सडा हुआ आलू, सडा हुआ मत्स्य पूरक आहार व फसलों के अवशेष आदि डालने से मछलियों की मृत्यु हुई है। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि मत्स्य पालक अपनी तालाब क्षमता का यथा-मत्स्य बीज संचय की मात्रा एवं अनुपात, खाद एवं मत्स्य पूरक आहार की मात्रा आदि का मूल्यांकन तालाब पट्टा एवं निजी भूमि की खतौनी तथा उसमें उपलब्ध पानी की मात्रा के अनुसार मूल्यांकन मत्स्य विभाग कानपुर देहात अथवा किसी मत्स्य विशेषज्ञ से अवश्य करा ले अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि हो सकती है। मर रही मछलियों को बचाने के लिए तत्काल राहत के तौर पर बुझा हुआ चूना, लाल दवा, 02-मैक्स, आॅक्सी फ्लो एवं सीफेक्स आदि का प्रयोग विशेषज्ञ की परामर्शानुसार किया जा सकता है।