Wednesday, December 19, 2018
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रेवाड़ी भी दहला-रेप पर सख्त कानून की दरकार

भारत के संस्कृति में महिलाओं को जहाँ पूज्य माना जाता है वही लड़कियों को देवियों का स्थान प्राप्त है। हम प्रतिवर्ष दुर्गा पूजा करते है ,यह हमारे धर्म में ही नही अपितु हमारी संस्कृति से भी जुड़ा है। विकृत मानसिकता धार्मिक उन्माद और असामान्य जनजीवन ने आज के इंसान को अभिशप्त कर दिया है। इंसानी खाल में दरिंदे घूम रहे। आये दिन कही ना कही रेप और सेक्सुअल दुर्व्यवहार जैसी घटनायें मानव जीवन को हिला कर रख दे रही है।
अभी इसी हफ्ते हरियाणा के रेवाड़ी में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सीबीएसई टॉपर एक बेटी के साथ गैंगरेप रेप हो गया है। दरीदंगी का आलम ये है कि, लिखते हुए भी और इस खबर को साझा करते हुए भी ऐसा लग रहा है जैसे आत्मा द्रवित हो चली हो और दिमाग में भारी बोझ महसूस हो रहा है।
प्रतिदिन कही ना कही किसी मॉ बेटी बहन बहु के साथ ऐसी अमानवीय घटनाए होती रहती है जो ना सिर्फ निंदनीय है बल्कि घृणित भी है। अब इन घटनाओं मे आरोपियों के शिनाख्त बाद उन्हे चैराहे पर जनता के सामने दंडित करने का समय आ गया है। कोई सख्त कानून समय रहते नही आया तो, ऐसे दरिंदे खुले आम जनमानस की नीदें उड़ाते रहेंगे, उनकी आत्मा को कुचलते रहेंगे।
रेवाड़ी कांड मे कल ही आरोपी पहचान लिए गए हैं, कानून अपना काम कर रहा है लेकिन क्या होगा ? रेप के आरोप में फांसी आखरी बार 15 साल पहले हुई थी, आरोपी था धनन्जय चटर्जी । तब से अब तक क्या रेप के वारदात नहीं हुए ? या रेप की घटनाओं मे कमी आयी ? निर्भया तक से रेनु और अन्य कितनी बेटियो को मसलने वाले दरिंदे जिंदा हैं।रेवाड़ी मे एक और आत्मा की हत्या कर दी गई और इस जघन्य अपराध के दोषी सिर्फ वो दरिंदे ही नहीं मेरे हिसाब से इस देश की जनता और हमारा ढूलमूल न्याय व्यवस्था भी है, जहां रेप के गुनाह पर शायद ही तत्काल किसी भी आरोपी को सजा हुआ हो। आज तक शायद ही किसी बहन को न्याय मिल सका हो। रेप के आरोपी के शिनाख्त बाद भी पहले खूब राजनीति होती है, उस आरोपी के जाति धर्म मजहब को देखा जाता है ,उसे बचाने के लिए हमारे ही देश समाज और बीच के राजनेता आगे आते है। यदि आरोपी पैसा वाला हुआ तो पुलिस भी सहयोग करती है। कुछ दिन मामला गर्म होता है फिर आरोपी को लचीले न्याय प्रणाली से राहत मिल जाती है।
सख्त कानून रेप के 15 दिन के भीतर बीच चैराहे पर प्रशासन आरोपियों को टॉग दें तब शायद ऐसी वारदात करने वालों के मन में दहशत पैदा हो या वो ऐसा जुर्म करने से घबराये। ये कानून ही काफी है दरिंदों को सबक देने के लिए। जिनको लगता है हम आजाद हैं तो उनको सच दिखाने के लिए ये घटना काफी है कि हम कानून के गुलाम हैं जहां रेप के आरोपी का बाल भी बांका नहीं होता, इसकी सजा आजन्म पीड़िता को ही भुगतना है। उस पिड़ीता को समाज से भी पिड़ा ही मिलती है। बहुत से लोग कहेंगे कि पीएम ने कुछ नहीं बोला, सीएम ने भी नहीं बोला तो अच्छा ही है चुप हैं इनके बोलने से भी कुछ बदलने वाला नहीं है। भयानक दुख और त्रासदी के दौर में है भारत। पतन की राह पर अग्रसर है भारत की तानाशाही राजनीति। वो बेटी क्या सोच रही होगी इस वक्त? कल्पना करने तक की भी हिम्मत नहीं हो रही है ना! क्या चल रहा होगा दिमाग में उसके ? और जब ये ही कानून कभी सवाल दागेगा, कभी उनको जमानत देगा सबूत न मिले तो बरी भी कर देगा तब क्या सोचेगी वो बेटी? इस सवाल का जवाब है किसी के पास? नहीं है इसलिए सब चुप हैं सब भारत में कानून की मूर्छा और इंसानियत की मौत का शोक मना रहे हैं।
हमे सुरक्षा की गारंटी चाहिए ना हमे किसी प्रकार का ढॉढस, हमे बस एक स्वतंत्र भारत और उसमे स्वच्छंद जीने वाली बेटियों का कल चाहिए। बनाईए कड़ा कानून, लाईए बिल, हम सब आपके साथ खड़े है। आरोपियों मे डर पैदा कीजिए, महिलाओं और बेटियों को त्वरित न्याय दीजिए। भारत को साम्यवादी सोच की ओर ढकेलने ले अच्छा है भारत को जनवादी बनाईए। हम सब ऐसी पिड़ीता बेटियों के साथ खड़े है।