( देश के अधिकांश स्वास्थ्य केंद्र अकुशल या अर्ध-कुशल पैरामेडिक्स द्वारा चलाए जाते हैं और ग्रामीण सेटअप में डॉक्टर शायद ही कभी उपलब्ध होते हैं। आपात स्थिति में मरीजों को अपने जान पहचान के देखभाल अस्पताल भेजा जाता है जहां वे अधिक भ्रमित हो जाते हैं और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और बिचौलियों के एक समूह द्वारा आसानी से धोखा खा जाते हैं। )
2020 में पहली लहर की तुलना में, 2021 की दूसरी लहर में ग्रामीण हिस्सों में संक्रमण और मौतों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी गई है, जो देश की 1.3 बिलियन आबादी का 65% है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की अनिश्चित स्थिति को देखते हुए, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) ने सरकार से इन क्षेत्रों में परीक्षण और टीकाकरण को प्राथमिकता देने के लिए कहा है। भारतीय ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे को तीन स्तरीय प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है।
लेख/विचार
भारत ने बासमती चावल के पीजीआई टैग के लिए यूरोपीय यूनियन में आवेदन किया
– 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ में पड़ोसी मुल्क द्वारा आवेदन का विरोध
भारत के बासमती चावल का वैश्विक निर्यात – यूरोपीय यूनियन पीजीआई टैग से खास उत्पाद के साथ क्वालिटी खुद ही जुड़ जाती है – एड किशन भावनानी
भारत एक गांव प्रधान व किसान प्रधान देश है भारत की मिट्टी ऐसी ओजस्वी है कि हीरे मोती रूपी खूबसूरत, सामर्थ, स्वास्थ्य और अपनी महक को विदेशों तक पहुंचाने वाले खाद्य पदार्थों वस्तुओं का जनन इस भारत माता की मिट्टी से होता है। न केवल इस मिट्टी से भारत में जन्मे व्यक्तित्व में निखार, संस्कार ओजस्वी तेज, आता है बल्कि इस मिट्टी के खेत खलियानों से उत्पन्न खाद्य वस्तुओं में भी गजब की महक व मिठास होती है।…बात अगर हम भारत की मिट्टी में उगे बासमती चावल की करें तो वाह!!! क्या बात है!!! भारतीय बासमती चावल का नाम सुनने से ही दूर दूर तक महक महसूस होने लगती है। भारत और पड़ोसी मुल्क के दायरे में हिमायल के कुछ खास भौगोलिक निचले क्षेत्रों में ही बासमती पैदा होती है।
कुछ बेटियों से उनकी यातना के बारे में भी पूछो
एक अजन्मी अंतिमा की पीड़ा सुनों,
मत उम्मीद रखो मुझसे की मेरी ज़िंदगी का अनुवाद तुम्हारी भावनाओं से जुड़ा हो “मैं अजन्मी अंतिमा हूँ एक छोटा सा अदम्य आक्रोशित किरदार” और तुम मुझे कभी नहीं समझ सकते। तुम्हें मुझे पढ़ने के लिए उस क्षितिज तक जाना होगा जहाँ से मेरी लिखी हर संज्ञा को महसूस कर सको। मेरे दर्द की कथोपकथन की सघनता को थामना किसी के बस में नहीं।
दर्द की आज्ञा का पालन करते मैंने शब्दों को थोड़ा सहलाया है, रेशमी एहसास के पन्नों पर मोतीयों की तरह पिरो कर लहू की स्याही से लिखी है एक दास्ताँ कहती हूँ।
स्वदेशी की परिभाषा
स्वदेशी के नाम पर आजकल बहुत हो-हल्ला हो रहा है। जिसे देखो, वही स्वदेशी की बात कर रहा है। नेताजी के भाषणों में स्वदेशी शहद की तरह टपकता है। बाबा रामदेव जी महाराज ने तो स्वदेशी के नाम पर ही अपना सारा कारोबार खड़ा किया है। वैसे भारत में और भी बाबा हैं जो स्वदेशी की दुकान लगाए बैठे हैं, परंतु उन बेचारों का सामान रामदेव की तुलना में बेहद कम ही बिच पाता है। अधिकांशतः उनके चेले-चपाटे ही खरीदते हैं। आजकल स्वदेशी वह दुधारू गाय है, जिसका दूध हर ऐरा-गैरा निकालना चाहता है और स्वदेशी की आड़ में अपनी तिजोरियां भरना चाहता है।
स्व. राजीव दीक्षित जी ने स्वदेशी की परिभाषा कुछ इस तरह से दी थी –
5जी पर प्रतिबंध की मांग कितनी उचित?
4 जून को दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री जूही चावला की भारत में 5जी नेटवर्क लगाने के खिलाफ दायर की गई जनहित याचिका को खारिज करते हुए उन पर यह कहते हुए 20 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया कि याचिकाकर्ताओं ने कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल किया है। उल्लेखनीय है कि जूही चावला सहित दो अन्य याचिकाकर्ताओं वीरेश मलिक और टीना वाच्छानी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 5जी तकनीक की टेस्टिंग को लेकर सवाल खड़े किए थे। याचिका में 5जी से संभावित खतरों का जिक्र करते हुए 2019 में बेल्जियम की पर्यावरण मंत्री सेलीन फ्रेमां के उस बयान का उल्लेख किया गया था,
एलोपैथी बनाम आयुर्वेद व्यर्थ का विवाद
चिकित्सा विज्ञान की दो पद्धतियों का खुद को बेहतर बताने की होड़ में एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए आरोप प्रत्यारोप का यह घटनाक्रम वाकई में दुर्भाग्यपूर्ण है
एलोपैथी और आयुर्वेद को लेकर पिछले कुछ दिनों से देश में जंग छिड़ी हुई है। आईएमए और बाबा रामदेव की आपसी बयानबाजी से कोविड की वर्तमान परिस्थितियों में आम आदमी पर क्या प्रभाव पड़ रहा होगा इस विषय में सोचे बिना दोनों में विवाद जारी है। हालांकि बाबा रामदेव द्वारा अपना बयान वापस ले लिया गया है लेकिन फिर भी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बाबा पर एक हजार करोड़ रुपए की मानहानि के दावे के साथ न्यायालय पहुंच गया है।
प्रणय का तीसरा कोण
मौली आज पाँच साल बाद मुस्कुराई थी अपने पाँच साल पुराने प्यार को देखकर, माँ-पापा की इज्जत की ख़ातिर अक्षत से शादी तो कर ली, पर पति की जो छवि मौली के मन मैं थी उस फ्रेम में अक्षत का किरदार फिट नहीं बैठता था। मौली को अपना साथी चंचल, खुशमिजाज, हंसमुख खुलकर प्यार जताने वाला और मजाकिया स्वभाव का पसंद था। उसके विपरीत अक्षत कम बोलने वाला, अकड़ू बात बात पर गुस्सा करने वाला और प्यार जताने में नीरस स्वभाव का था। पर मौली जानती थी अक्षत अंदर ही अंदर मौली पर जान छिड़कता था। पर जो अपेक्षा मौली को पति के किरदार से थी उसमें अक्षत खरा नहीं उतर पा रहा था। मौली ने जो शादीशुदा जीवन की कल्पना की थी वैसा इस ज़िंदगी में कुछ नहीं था। ज़िंदगी जी नहीं रही थी बस काट रही थी।
सेहत के प्रति जागरूकता उम्र में बीस साल बढ़ोतरी
आजकल इंसान कई बीमारियों का शिकार होते मौत से पहले ही मर रहे है। कैंसर, किडनी खराब होना और हार्ट अटेक अब मलेरिया और शर्दी खांसी की तरह आम बीमारीयां हो गई है। अच्छी सेहत के लिए अच्छा, पौष्टिक और साफ़ सुथरे तरीके से बनाया गया खाना ही ताउम्र तनमन को स्वस्थ रखता है।
आजकल दूषित खाना खाने की वजह से बहुत ज्यादा लोग बीमारियों के शिकार हो रहे है। सबसे ज्यादा जो बीमारिया दूषित भोजन की वजह से होती है। नोरोवायरस संक्रमण, डायरिया, फूड प्वाइजनिंग सहित अन्य बीमारियों का खतरा दूषित खाने से बढ़ता जाता है।
स्त्री शक्ति की प्रतिमूर्ति
सौंदर्य की प्रतिमूर्ति है मातृ रूप! एक दर्द ये भी जो किसी को नहीं दिखता वो स्त्री है सृजन करके हमें जीवन दिया अपने रूप का त्याग स्वीकार किया अपने यौवन को तुम्हें समर्पित किया आपकी आपके कुल की प्रतिष्ठा की रक्षा हेतु स्वयं को प्रताड़ित किया अपनी इच्छाओं का दमन किया आपने उसे क्या दिया घृणा अपने अंतर्मन से पूछो तुम्हारी आत्मा तुम्हें धिक्कारती है।
पुरुष को कभी किसी स्त्री को हीन भाव से देखने का अधिकार नहीं है किसी भी परिस्थिति में वो सृष्टि है प्रेम की प्रतिमूर्ति सहजता सौम्यता सहिष्णुता सरलता संभवतः ये गुण उसके प्रादुर्भाव किस समय ही उसे प्राप्त हो गए थे हमने कभी उसको समझना नहीं चाहा एक स्त्री पुरुष से क्या चाहते हैं सम्मान इसके अतिरिक्त उसकी कोई अभिलाषा नहीं होती क्या हम यह कहें कि अब हम मानसिक रूप से इतने विक्षिप्त हैं कि हम उसे सम्मान और प्रेम की दृष्टि से देखना ही नहीं चाहते या यह कहें कि हमारे पास वो दृष्टि अब रही नहीं।
आंतों में छेद भी कर रहा है व्हाइट फंगस संक्रमण: नाजुक अंगों पर हमला करता है व्हाइट फंगस
एक ओर जहां रूप बदल-बदलकर कोरोना वायरस पिछले डेढ़ वर्षों से पूरी दुनिया में लोगों पर कहर बरपा रहा है और लाखों लोगों को अपना निवाला बना चुका है, वहीं भारत में अब इस बीमारी से ठीक होने वाले कुछ लोगों पर विभिन्न प्रकार के खतरे मंडरा रहे हैं। देशभर में ब्लैक फंगस के हजारों मामले सामने आने के बाद अब कोरोना से उबरे मरीजों में व्हाइट फंगस, यैलो फंगस और एस्पेरगिलिस फंगस के मामले भी मिलने लगे हैं। हालांकि अभी तक यैलो और एस्पेरगिलिस फंगस के गिने-चुने मामले ही मिले हैं लेकिन व्हाइट फंगस से संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 29 मई को तो गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में फंगस के 23 नए मरीजों की पहचान हुई, जिनमें से व्हाइट फंगस के ही 17 मरीज थे।
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