जन सामना डेस्क। भारत की अग्रणी पीआर संस्था, पीआर 24×7 संबंधित उद्योग में इस माह 16 वर्षों का लम्बा सफर तय कर चुकी है। 27 फरवरी को स्थापना दिवस के मौके पर कंपनी के वरिष्ठ सदस्यों ने नए सदस्यों के मनोबल को बढ़ाते हुए अपने अनुभव साझा किए। एकता और एकजुटता की अवधारणा को सर्वाेपरि रखते हुए, पीआर 24×7 ने अपने स्थापना दिवस पर टीम के निष्ठा भाव को बरकरार रखने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों को भी कार्यक्रम में शामिल किया। इसके साथ ही सीएसआर गतिविधि के चलते वृद्धजनों के लिए तम्बोला आदि खेलों का आयोजन किया तथा कई उपहार दिए। देश के अन्य राज्यों में कार्यरत सदस्यों ने भी वर्चुअल रूप से जुड़कर अपने अनुभव साझा किए। टीम के अहम् सदस्य और प्रोडक्शन मैनेजर, वीडियो; आसिफ पटेल को स्टैंड आउट परफॉर्मर के रूप में पुरस्कृत किया गया।
टीम को संबोधित करते हुए, पीआर 24×7 के फाउंडर अतुल मलिकराम ने कहा, मैं अपनी टीम के सभी सदस्यों को उनके निरंतर समर्थन और कड़ी मेहनत के लिए धन्यवाद् और बधाई देना चाहता हूँ। मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि यह मेरी टीम के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि पीआर 24×7 ने रीजनल पीआर में ऊँची उड़ान भरी है। साथ ही सभी क्लाइंट्स को भी धन्यवाद् देना चाहता हूँ, क्योंकि एक कमरे के ऑफिस से कंपनी की नींव रखकर पीआर 24×7 को आज देश की रीजनल पीआर की चुनिंदा सर्वश्रेष्ठ कंपनियों में से एक बनाने में क्लाइंट्स का प्रत्यक्ष रूप से बहुत बड़ा योगदान रहा है। 16 वर्षों की यह बेहद सुंदर और साहसिक यात्रा रही है, भविष्य में भी क्लाइंट्स के साथ की कामना करता हूँ।
कंपनी के विस्तार के बारे में बात करते हुए, पीआर 24×7 की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, नेहा गौर ने कहा, एक दशक से अधिक समय से अपने क्लाइंट्स के भरोसे को कायम रखने में समर्थ रहे हैं। हमारा आदर्श हमेशा से एक ही रहा है- हमारे क्लाइंट्स को सर्वाेत्तम सेवा प्रदान करना। अपनी ब्रांड कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी की प्रभावशीलता को आगे बढ़ाते हुए, रीजनल मार्केट्स में अपनी साख बनाने के साथ ही अब हम डिजिटल और प्रिंट दोनों क्षेत्रों में महानगरों में अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं।
विविधा
कामुकता ही कामयाबी का मापदंड
पहले के ज़माने में शादीशुदा स्त्री के कुछ दायरे और बहू के औधे की गरिमा हुआ करती थी। किसी खानदान की इज्जत और शाख होती है बहूएं। ससुराल वाले कितने भी मार्डन क्यूँ न हो, अपने घर की लक्ष्मी को पूरी दुनिया के सामने गैर मर्द के साथ हर सीमाएं पार करते कामुक हरकतें करते हुए कैसे देख सकते है। भले ही उनके प्रोफ़ेशन का हिस्सा हो। आज के आधुनिक ज़माने में कुछ लोगों को ऐसी बातें दकियानुसी और पुराने खयालात वाली लग सकती है। पर क्या हम खुद अपने घर की बहू बेटियों को ऐसी हालत में देख सकते है। कई हीरोइनों ने शादी के बाद क्षेत्र सन्यास ले लिया है। कहने का मतलब ये नहीं की शादी के बाद काम छोड़ दो, पर आप किसी के घर की मर्यादा हो इज्जत हो इस बात को याद रखकर एक सीमा तय करते काम करना चाहिए।
नियति का न्याय
कभी-कभी हम न चाहते हुए भी किसी पर अंधा विश्वास कर जाते है। वैसे तो बढ़े-बूढ़े यानि बुजुर्ग कह गए है की हर कदम फूँक-फूँक कर रखना चाहिए, पर राम तो अपनी बेटी के विवाह के समय अपने मित्र पर अंधा विश्वास कर गया। बेटी का विवाह हो गया, पर कुछ समय पश्चात ही परिवार की संकीर्ण सोच उमा पर हावी होने लग गई। उमा सदैव ही माता-पिता के प्रति समर्पित लड़की थी। तलाक जैसे शब्द तो उसके शब्दकोष में थे ही नहीं। उमा उस परिवार में स्वयं को असहाय महसूस करने लगी, पिता के प्यार के कारण वापस घर आना भी उसे स्वीकार नहीं था। अतः अंतिम निर्णय उसने स्वयं को समाप्त करना चुना।
माँ
बहुत ही पुरानी बात हैं,जब गावों में बिजली नहीं होती थी,मकान कच्चे होते थे,रसोई में चूल्हे पर खाना बनता था और सुख सुविधा के नाम पर एक चार पाई बिछी रहती थी। साल में एक ही बार दर्जी घर में आके पूरे साल के कपड़े सील जाता था।
ऐसी सादगी की जिंदगी हुआ करती थी। उन्ही दिनों की बात हैं,एक गांव में मास्टरजी अपने छ: बच्चे और बीमार पत्नी के साथ रहते थे। एक कमरा, रसोई घर और बड़ा सा औंसारा ये था उनका कच्चा सा घर। पढ़ाने जाने से पहले खाना बना के जाते थे और घर के बाकि के काम वह बच्चों की मदद से कर लिया करते थे। वैसे बहुत मुश्किल था ऐसी गृहस्थी निभाना पर निभ रही थी जैसे तैसे।
भाई को भाई का दुश्मन बनाती हरियाणा सरकार
ये अंक उन बच्चों को नहीं मिलेंगे जिस घर में पति-पत्नी, भाई, बहन, सास-ससुर या परिवार में कोई भी नौकरी पर हो। क्या ये भाई की नौकरी से दूसरे भाई और बहन से अन्याय नहीं ? क्या ये माँ-बाप के नौकरी पर होने से बच्चों की प्रतिभा से अन्याय नहीं या फिर हरियाणा के मुख्यमंत्री ने अपने भाई का घर बसाने का ठेका ले रखा है और उन्होंने पति-पत्नी के बीच कभी तलाक न होने का फरमान जारी कर दिया है।
जी हाँ, कन्फ्यूज्ड सरकार की कन्फ्यूज्ड पॉलिसी ने अभ्यर्थियों को कंफ्यूज कर दिया है। हरियाणा में हर भर्ती के लिए सोसियो इकोनॉमिक के अंक देने का नियम चला है। सोच कर देखिये सौ अंकों के पेपर में अगर बीस अंकों की खैरात बांटी जाये तो किसका चयन होगा? क्या वहां कोई भी मेहनती बच्चा जिसके पास ये बीस अंक नहीं है वो टिक पायेगा?
UP में BSP का चुनावी सफर और 2022 क्या होगी चुनावी डगर
बहुजन समाज पार्टी का गठन 14 अप्रैल 1984 को मान्यवर कांशीराम के द्वारा किया गया था उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी ने शानदार और ऐतिहासिक चुनावी प्रदर्शन के कारण 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी।
1989 से लेकर 2017 के विधानसभा चुनाव परिणामों की एक रिपोर्ट कार्ड आपके समक्ष रख रहे हैं 1989 में उत्तर प्रदेश की 10 वी विधानसभा के चुनाव संपन्न हुये इन चुनावों में बसपा 13 विधानसभा सीटें जीत पाई 9. 33% वोट प्राप्त हुए।
हम ऐसे हैं और वो वैसे हैं!!!
हमें गर्व है हम भारतीय हैं – भारतीय सोच, सहिष्णुता, संकल्प जांबाज़ी, ज़ज्बे का विश्व में डंका!!!
आज का भारत 2047 के नेतृत्व के लिए मौजूदा युवा पीढ़ी को रणनीतिक रोडमैप से बागडोर और कर्तव्यपरायणता के बीजारोपण में जुटा – एड किशन भावनानी
भारतीय सोच, संस्कृति, बौद्धिक क्षमता, दूरदृष्टि फ़र्ज अदायगी, कर्तव्यपरायणता में वैश्विक स्तर पर बहुत आगे है। और हो भी क्यों ना? क्योंकि भारतीय मिट्टी में जन्मे हमारे हर भारतीय नागरिक और प्रवासी भारतीय के रग-रग में भारत माता के गुणों का संचार हो रहा है!! याने हमारा भारतवर्ष एक ऐसे सुगंध का समूह है जो अपनी व्याख्या करें, या ना करें लेकिन हवाएं उस सुगंध की ख़ुशबू को सात समंदर पार तक भी पहुंचा देती है!!! यही स्थिति भारतीय कलाओं, सोच, सहिष्णुता,संकल्प जांबाज़ी और ज़ज्बे की भी है!!!
बनें जागरूक उपभोक्ता – योगेश कुमार गोयल
अनिल ने अपना बिजली का बिल सही समय पर जमा करा दिया लेकिन फिर भी विभाग ने उसका बिजली कनैक्शन काट दिया। रोमा ने रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए आवेदन भेजने की अंतिम तिथि से 4 दिन पहले ही स्पीड पोस्ट द्वारा आवेदन भेज दिया था लेकिन आवेदन सही समय पर नहीं पहुंचने के कारण वह परीक्षा में नहीं बैठ सकी और डाक विभाग इसके लिए अपनी गलती मानने को तैयार नहीं। सीमा का लैंडलाइन फोन कई महीनों से खराब पड़ा है पर विभाग फोन ठीक कराने के बजाय बिल लगातार भेज रहा है और बिलों के भुगतान के लिए बाध्य करता है।
समय से संवाद करता ‘सत्यवान सौरभ’ का दोहा संग्रह ‘तितली है खामोश’
अमेजन, फ्लिपकार्ट और अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्म पर उपलब्ध यह दोहा संग्रह कुछ आप बीती और कुछ जगबीती से परिपूर्ण है। यह वर्तमान समय से संवाद करता हुआ काव्य कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। मुझे विश्वास है यह दोहा संग्रह पाठकों को प्रभावित करेगा। सत्यवान ‘सौरभ’ के दोहा संग्रह “तितली है खामोश” के दोहे आज के सामाजिक परिवेश आवश्यकताओं तथा लोक की भावनाओं का जीवंत चित्रण है। युवा दोहाकार ने अपने दोहों में जीवन के हर पहलू को छुआ है। सहज और सरल भाषा के साथ इस कृति के दोहों का धरातल बहुत विस्तृत है।
‘दोहा’ हिंदी का एक पुराना और प्रतिष्ठित अर्द्धसम मात्रिक छंद है। भक्तिकाल में रामबाण और रीतिकाल में कामबाण बनकर चलने वाला यह लघु छंद वर्तमान काल में अग्निबाण बनकर लक्ष्य-बेधन कर रहा है। दोहा भले ही ‘देखन में छोटा’ लगे, किंतु ‘नावक के तीर’ की भांति इसका घाव बड़ा गहन और गंभीर होता है। अपने इसी पैनेपन और मारक क्षमता के कारण, प्राचीन छंद होते हुए भी, दोहे ने कवियों और श्रोताओं/पाठकों पर सदैव अपना सम्मोहन बनाये रखा है।
जन्मदिवस पर मोमबत्ती नहीं बुझाना

आज रुद्र का जन्मदिन था और रुद्र अपने बचपन की यादों में खो गया। माता-पिता ने उसे जन्मदिवस कुछ अलग तरीके से मनाना सिखाया था। पुरानी फोटो देखकर वह मन-ही-मन प्रफुल्लित हो रहा था। रुद्र को याद आ रहा था की नाना ने सिखाया था की जन्मदिवस पर मोमबत्ती नहीं बुझाना बल्कि जन्मदिवस के अनुरूप दीप प्रज्वलित करना, क्योंकि हम बोलते है “तमसो माँ ज्योतिर्गमय” अर्थात हम अंधकार से प्रकाश की तरफ जाए। मेरे जन्मदिवस पर मेरी आयु के अनुरूप ही दीप प्रज्वलित किए जाते थे।
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Jansaamna