लखनऊ: जन सामना ब्यूरो : उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री राजीव कुमार ने निर्देश दिये हैं कि बुन्देलखण्ड में आगामी ग्रीष्मऋतु में पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने हेतु जल निगम एवं जल संस्थान के अधिशासी अभियन्ताओं को अपने कार्यक्षेत्र के अधीनस्थ स्थापित ट्यूबवेल एवं हैण्डपम्पों को चालू होने की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर लिखित रूप से प्रमाण-पत्र उच्च अधिकारियों को प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड में स्थापित 2070 राजकीय नलकूपों में से वर्तमान में असंचालित 72 ट्यूबवलों को यथाशीघ्र चालू कराने हेतु सम्बन्धित अभियन्ताओं को लिखित रूप से अवगत कराना होगा कि असंचालित 72 ट्यूबवेल किस तिथि तक प्रत्येक दशा में संचालित करा दिये जायेंगे। उन्होंने यह भी निर्देश दिये गये कि गांव में पेयजल की उपलब्धता की जानकारी ग्राम प्रधानों एवं किसानों से उनके मोबाइल नम्बर से प्राप्त कर पेयजल की आपूर्ति ग्राम स्तर पर सुनिश्चित कराई जाये। उन्होंने कहा कि आगामी जुलाई माह तक पानी की समस्या किसी भी क्षेत्र में कतई न होने देने के लिये आवश्यक व्यवस्थाएं समय से सुनिश्चित करा ली जायें।मुख्य सचिव ने निर्देश दिये हैं कि खराब नलकूपों को समय से मरम्मत सुनिश्चित कराई जाये। उन्होंने कहा कि पेयजल के कुंओं को आवश्यकतानुसार गहरा कराये जानेे साथ-साथ पशुओं के पेयजल हेतु सिंचाई विभाग की नहरों, नलकूपों एवं निजी नलकूपों के माध्यम से तालाब एवं पोखरों के भरवाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाये। उन्होंने कहा कि खेतिहर मजदूरों एवं अन्य जरूरतमन्द लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाये। श्री राजीव कुमार ने कहा कि ट्रान्सफार्मर खराब होने पर निर्धारित अवधि में बदले जाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाये। उन्होंने कहा कि रोस्टर के अनुसार निर्धारित समय में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाये। उन्होंने कहा कि पशुओं के चारे के अभाव की स्थिति से निपटने हेतु कार्य योजना तैयार कराई जाये। उन्होंने कहा पशु चिकित्सालयों में पशुओं के उपचार के संसाधन एवं दवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाये। उन्होंने कहा कि महामारी के नियन्त्रण हेतु दवाओं का चिन्हांकन करके समुचित स्टाॅक की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाये। उन्होंने आकस्मिकता हेतु आवश्यक खाद्यान्न एवं उपभोक्ता वस्तुओं की व्यवस्था सुनिश्चित कराये जाने के साथ-साथ कुपोषण की स्थिति से निपटने हेतु आवश्यक कार्य योजना बनाये जाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि मृदा में नमी संरक्षण के उपायों का प्रचार-प्रसार कराये जाने के साथ-साथ वैकल्पिक फसलों के साथ खाद्य एवं बीज के प्रबन्ध की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाये। उन्होंने कहा कि फसलों में रोग बचाव हेतु कीटनाशक दवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाये। बैठक में प्रमुख सचिव, सिंचाई सुरेश चन्द्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
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