नेता जी अब तुम्ही बताओ,
अच्छे दिन कब आएंगे !
ठेला, गुमटी रोज हटाते,
हम सबकी फुटपाथों से !
आप कहे तो गला घोट दूँ,
अपने बच्चों की, हाथों से !
बिना कमाई के बच्चे सब,
जीते जी मर जाएंगे !
नेता जी अब तुम्ही बताओ,
अच्छे दिन कब आएंगे !
कहते हो तुम बेच पकौड़ा,
फिर करवाते निगम का दौड़ा !
तोड़ फोड़ सामान छीनते,
भर ले जाते मार हथौड़ा !
हमी तलें घर बैठ पकौड़ा,
और हमीं क्या खाएंगे ?
नेता जी अब तुम्हीं बताओ,
अच्छे दिन कब आएंगे !
जब जी चाहा उड़ जाते हो,
हम गरीब पर ध्यान नहीं !
विजय माल्या, नीरव मोदी,
के जैसा तो प्लान नहीं !!
Jansaamna
डॉन या गैंगस्टर… सिल्वर स्क्रीन पर ये किरदार बहुत पुराने हैं दर्शकों का खूब मनोरंजन किया है मगर समय के अनुसार ये किरदार और इनके स्वरूप बदलते रहे। 70 के दशक में डॉन खूब छाए पर्दे पर। अगर किसी खलनायक ने डॉन की भूमिका निभाई तो वो किरदार अक्सर नेगेटिव होते थे जहां खून खराबे, स्मगलिंग, महिलाओं की तस्करी वगैरह करता था वो गैंगस्टर लेकिन अगर जब कोई हीरो पर्दे पर डॉन बनता था तब वो या तो जुल्म से सताए जाने के बाद डॉन बनता था या फिर गरीबी से तंग आकर गैंगस्टर बनता था हालांकि वो भी खतरों से खेलता था और ड्रनग्स या सोने की तस्करी करता था। डॉन का लुक और अंदाज भी निराले हुवा करते थे।
बिहार के छोटे से शहर सहरसा का एक लड़का इन दिनों मुंबई की माया नगरी में फिल्म निर्देशन के जरिए अपनी धाक जमा रहा है जिसका नाम है अमृत सिन्हा। अमृत सिन्हा ने रंगमंच के द्वारा फिल्मों का सफर तय किया है। अमृत सिन्हा ने महज दो वर्ष पूर्व तनय इंटरनेशनल फिल्म प्रोडक्शन हाउस की नीव रखी थी जो आज सफलता का पर्याय साबित हुआ है। विगत वर्ष 2016 में आयी अमृत सिन्हा और आनंद दाय गुप्ता की फिल्म खजुरवाटिका फिल्म का प्रदर्शन भी देश सहित अंतरराष्ट्रीय मंचो पर किया गया था। इस फिल्म में खजुराहो में बने पोराणिक मंदिर की मूर्तिकला को व उससे जुड़े तथ्यों का फिल्मांकन किया गया था। इसके बाद 2017 इसी फिल्म का नाम व पटकथा परिवर्तन करके नयी खजुरवाटिका फिल्म का निर्माण हुआ जो विश्व पटल पर काफी सराही गयी। जोकि काफी फिल्म अवार्ड अपने नाम कर पाने में सफल रही। फिर 2017 में आयी फिल्म रक्तप्रदाता जीवनदाता जोकि हैदराबाद के ब्लड डोनर पर आधारित थी जिसमें रक्तदान के प्रति जागरूकता दिखाई गयी थी। इसी क्रम में अमृत की दूसरी फिल्म ए शॉल देट बीट्स आयी जोकि खाने की बर्बादी के प्रति जागरूकता फैलाती फिल्म थी। यह दोनों सामाजिक फिल्में अवार्ड के लिये बेस्ट फिल्म के नाम से नॉमीनेट हो चुकी है। और अब अमृत सिन्हा और शौर्य सिंह की दो घंटे दस मिनट अवधि की फिल्म ‘‘फैरस’’ चर्चा में हैं जोकि आज के परिदृश्य में देश में बढ़ते क्राईम पर आधारित है जिसमें मुख्य भूमिका में वॉलीवुड के चर्चित अभिनेता विजय राज, जाकिर हुसैन, गोपाल सिंह, विक्रमजीत, पंकज झा, राहुल सिन्हा, दियांश शर्मा व मीरा जोशी हैं। अमृत सिन्हा कम समय में अपनी बेमिसाल फिल्मों के जरिए दर्जनों फिल्म फेस्टिवल जैसे- मियामी इपीक ट्रेलर फेस्टिवल, इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, आचार्य तुलसी शार्ट फिल्म फेस्टिवल,चिल्ड्रन एनीमेशन अवार्ड, इंटरनैशनल फिल्म फेस्टिवल ओडिशा, में प्रतिभागी बन चुके हैं और उनकी फिल्में कई श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।
कानपुरः अर्पण कश्यप। एक ओर जहां सरकार समाज में समानता पर जोर दिए है तो दूसरी ओर ऐसे उदाहरण देखने में मिल रहे हैं जो बहुत ही शर्मनाक कहा जा सकता है। ऐसा ही एक मामला बर्रा थाना क्षेत्र में प्रकाश में आया कि सरेराह कूढा फेंकने से टोकने एक महिला ने सफज्ञई कर्मी को जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित किया। महिला सरकारी अध्यापक बताई जा रही है। यह भी बताया गया कि महिला ने सफाई कर्मी को इतना लज्जित किया को वो झाडू फेंक कर रोता हुआ चला गया।
कानपुर नगरः स्वप्निल तिवारी। प्रजापति महासभा द्वारा चतुर्थ नव जोड़ों का सामूहिक विवाह दित्यांशी गार्डेन बर्रा बाईपास पर हुआ जिमसें कानपुर शहर तथा अन्य जिलो एवं प्रदेशो से आये हुए 9 जोडो की भागदीरी हुई।
कानपुरः जन सामना संवाददाता। भारतीय अल्पसंख्य बोर्ड के सदस्यों द्वारा कानपुर प्रेस क्लब में एक वार्ता के आयोजन के दौरान बताया गया कि अखिल भारतीय रक्षक बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुल कुददूस हादी की अध्यक्षता तथा पादरी जितेन्द्र सिंह, हरविंदर सिंह लार्ड व अन्य पदाधिकारियों द्वारा आगामी 23 फरवरी को संविधान बचाओं एवं कौमी एकता महासम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
⇒वर्षो से नालियों की नही हुई सफाई, नालियों पर पक्का निर्माण