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लेख/विचार

भयंकर विनाश के संकेत

Pankaj k singhपंकज के. सिंह
वर्ष 2009 में ‘अलकायदा’ की सऊदी और यमन शाखाओं ने एकजुट होकर संगठित रूप से एक नए संगठन ‘अलकायदा फॉर अरब पेनिंसुला’ का रूप ले लिया था। इसके उपरांत पिछले कुछ वर्षों से निरंतर जारी ड्रोन हमले और आतंकवाद निरोधी सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बावजूद यमन और सऊदी अरब के सीमावर्ती क्षेत्रों में ‘अलकायदा’ की स्थिति आज भी बेहद मजबूत बनी हुई है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि निकट भविष्य में यमन में भी सीरिया और इराक जैसे ही भयंकर सांप्रदायिक गृहयुद्ध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वैसे भी पश्चिम एशिया में सांप्रदायिक हिंसा और व्यापक आतंकवाद के कारण संपूर्ण क्षेत्र में ही दहशत और तनाव का वातावरण बना हुआ है। इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष तथा लीबिया और मिस्र में उत्पन्न गृहयुद्ध के चलते समूचे पश्चिम एशिया और अरब प्रायद्वीप के क्षेत्र में भयंकर विनाश के स्पष्ट संकेत दिखाई पड़ रहे हैं। § Read_More....

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हिंसा का अंतहीन दौर

पंकज के. सिंह

Pankaj k singhयमन में वर्चस्व और सत्ता के लिए शिया और सुन्नी समुदायों के मध्य कड़ा संघर्ष चल रहा है। इस संघर्ष में जहां अलकायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे खतरनाक आतंकी संगठन सुन्नियों का साथ दे रहे हैं, वहीं शिया लड़ाकों की अगुवाई हूती मिलिशिया जैसे विद्रोही संगठन कर रहे हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए यह नहीं लगता है कि यमन बहुत जल्द गृह युद्ध और हिंसा की जटिल परिस्थितियों से बाहर आ सकेगा। गृहयुद्ध के कगार पर पहुंच चुके अरब देश यमन में शिया हाउती विद्रोहियों के ठिकानों पर सऊदी अरब के नेतृत्व में हवाई हमले शुरू किए गए। राजधानी सना और उसके आसपास के इलाकों में किए गए हमलों तथा सत्ता संघर्ष में सरकार और विद्रोहियों में जारी हिंसा में हजारों नागरिकों की मौत हो चुकी है तथा कई लाख नागरिक बेघर हो गए हैं। हजारों इमारतें और मकान ध्वस्त हो गए हैं तथा चारो ओर आतंक और दहशत का हाहाकार मचा हुआ है। इन हमलों के बाद मुस्लिम राष्ट्र दो गुटों में बंट गए हैं। एक ओर सऊदी अरब के नेतृत्व में कतर, बहरीन, कुवैत, मिस्र जैसे देश हैं, जो किसी भी कीमत पर शिया हाउती विद्रोहियों से यमन के राष्ट्रपति आब्दीरब्बू मंसूर हादी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर ईरान इन देशों के विरोध में खड़ा हो गया है। हवाई हमलों पर नाराजगी जताते हुए ईरान ने कहा है कि इससे विवादों का हल तलाशने में मदद नहीं मिलेगी। सऊदी अरब के नेतृत्व में यमन सरकार को बचाने के लिए पांच अरब राजशाही सहित 10 देशों का गठबंधन बनाया गया है।  § Read_More....

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क्या यह पूरा न्याय है

dr. neelamबात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी क्योंकि अगर सरकार की जानकारी के बिना यह प्रवेश हुए तो फिर सरकार क्या कर रही थी और अगर सरकार की जानकारी में हुए तो वो होने क्यों दे रही थी? दोनों ही स्थितियों में सरकार सवालों के घेरे से बच नहीं सकती। तो जिस दोषी सिस्टम और सरकारी तंत्र के सहारे पूरा घोटाला हुआ उस का कोई दोष नहीं उसे कोई सजा नहीं लेकिन जिसने इस सिस्टम का फायदा उठाया दोषी वो है और सजा का हकदार भी। तो यह समझा जाए कि सरकार की कोई जवाबदेही नहीं है न तो सिस्टम के प्रति न लोगों के प्रति, उसकी जवाबदेही है सत्ता और उसकी ताकत के प्रति यानी खुद के प्रति। ‘व्यापम’ अर्थात व्यवसायिक परीक्षा मण्डल, यह उन पोस्ट पर भर्तियाँ या एजुकेशन कोर्स में एडमिशन करता है जिनकी भर्ती मध्यप्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन नहीं करता है जैसे मेडिकल इंजीनियरिंग पुलिस नापतौल इंस्पेक्टर शिक्षक आदि। साल भर पूरी मेहनत से पढ़कर बच्चे इस परीक्षा को एक बेहतर भविष्य की आस में देते हैं। परीक्षा के परिणाम का इंतजार दिल थाम कर करते हैं। वह बालक जो अपनी कक्षा और कोचिंग दोनों ही जगह हमेशा अव्वल रहता है, तब निराश हो जाता हैं जब पता चलता है कि मात्र एक नम्बर से वह अनुत्तीर्ण हो गया लेकिन उसे आज पता चला कि वह एक नम्बर नहीं बल्कि चन्द रुपयों से अनुत्तीर्ण हुआ था। यह परीक्षा बुद्धि बल की नहीं धन बल की थी।  § Read_More....

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त्रिकोणात्मक संघर्ष की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश

deep shuklaडॉ. दीपकुमार शुक्ल
देश के पांच राज्यों पंजाब, गोवा, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश तथा मणिपुर में संपन्न हो रहे विधान सभा चुनाव में सर्वाधिक महत्व उत्तरप्रदेश को ही दिया जा रहा है। दरअसल इस राज्य के चुनाव परिणाम से ही आगामी लोकसभा चुनाव की दिशा तय होनी है। लोकसभा में उत्तर प्रदेश की 80 में से 71 सीटें जीतकर केन्द्र में सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश विधान सभा का चुनाव किसी परीक्षा से कम नहीं है। लोकसभा चुनाव परिणाम के दृष्टिगत भाजपा को तीन सौ से भी अधिक सीटें मिलनी चाहिए परन्तु अब तक के विभिन्न सर्वेक्षणो पर यदि निगाह डालें तो भाजपा को सरकार बनाने के लिए आवश्यक 202 सीटें भी मिलती हुई नहीं दिखायी दे रही हैं। उत्तर प्रदेश की सत्ता में बैठी समाजवादी पार्टी कांग्रेस से गठबंधन करके एक नए उत्साह के साथ मैदान में डटी है। समाजवादी पार्टी को कांग्रेस से गठबंधन करने का लाभ भले ही न मिले परन्तु उसने अपना एक विरोधी जरुर कम कर लिया है। हालाकि इस गठबंधन के चलते चुनाव लड़ने से वंचित हुए अनेक समाजवादी नेताओं का भितरघात भी सपा को झेलना पड़ेगा। जिसका सीधा लाभ भाजपा को ही होगा। सर्वेक्षण के नतीजों में यह गठबंधन बहुमत से काफी दूर है। वर्ष 2012 के चुनाव में भ्रष्टाचार तथा अराजकता से त्रस्त यू.पी. की जनता ने अखिलेश यादव के विचारों से प्रभावित होकर 224 सीटें सपा की झोली में डालकर उन्हें पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने का अवसर दिया था। 2012 के चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश ने उत्तर प्रदेश की जनता को भरोसा दिया था कि वह प्रदेश से भ्रष्टाचार तथा अपराध को हर हाल में समाप्त कर देंगे। प्रदेश में अपराध और भ्रष्टाचार कितना कम हुआ यह तो सभी को पता है लेकिन इतना जरुर रहा कि पिता मुलायम सिंह के कार्यकाल की तरह प्रदेश दस्यु सरगनाओं की पनाहगाह नहीं बन पाया। साथ ही अपराधियों के संरक्षक की पहचान बना चुके चाचा शिवपाल सिंह को अखिलेश यादव ने न केवल अलग-थलग कर दिया बल्कि स्वयं को साफ सुथरी छवि वाला नेता सिद्ध करने में भी सफल रहे। § Read_More....

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यह हैं असली नायिकाएँ

dr neelam mahendraरानी पद्मावती एक काल्पनिक पात्र है लेकिन भंसाली शायद यह भी भूल गए कि काल्पनिक होने के बावजूद रानी पद्मावती एक भारतीय रानी थी जो किसी भी सूरत में स्वप्न में भी किसी क्रूर मुस्लिम आक्रमण कारी पर मोहित हो ही नहीं सकती थी।

भंसाली का कहना है कि पद्मावती एक काल्पनिक पात्र है । इतिहास की अगर बात की जाए तो राजपूताना इतिहास में चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का नाम बहुत ही आदर और मान सम्मान के साथ लिया जाता है।
भारतीय इतिहास में कुछ औरतें आज भी वीरता और सतीत्व की मिसाल हैं जैसे सीता द्रौपदी संयोगिता और पद्मिनी। यह चारों नाम केवल हमारी जुबान पर नहीं आते बल्कि इनका नाम लेते ही जहन में इनका चरित्र कल्पना के साथ जीवंत हो उठते है।
रानी पद्मिनी का नाम सुनते ही एक ऐसी खूबसूरत वीर राजपूताना नारी की तस्वीर दिल में उतर आती है जो चित्तौड़ की आन बान और शान के लिए 16000 राजपूत स्त्रियों के साथ जौहर में कूद गई थीं। आज भी रानी पद्मिनी और जौहर दोनों एक दूसरे के पर्याय से लगते हैं। इतिहास गवाह है कि जब अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ के महल में प्रवेश किया था तो वो जीत कर भी हार चुका था क्योंकि एक तरफ रानी पद्मिनी को जीवित तो क्या मरने के बाद भी वो हाथ न लगा सका । § Read_More....

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मन उलसित भयो आज

kanchan pathakमंद मंद पवन बहे पुष्पन सुगंध लेत
मन उलसित भयो आज आओ री, आओ री
बसंत चपल है, वसंत चंचल है, बसंत सुन्दर है, बसंत मादक है, बसंत कामनाओं की लड़ी है, बसंत तपस्वियों के संयम की घड़ी है, बसंत )तुओं में न्यारा है, बसंत अग-जग का प्यारा है।
इस ऋतु में सरसों फूलकर पूरी धरती को पीले रंग से रंग देती है। हमारे यहाँ वसंत का विशिष्ट रंग पीला होता है। पीला रंग आध्यात्म का भी प्रतीक है। कई पश्चिमी देशों में बसंत का विशिष्ट रंग हरा होता है। हरा का मतलब सर्वत्र हरियाली, प्रकृति का रंग, पर हमारे यहाँ इस मनोहारी ऋतु को आध्यात्म के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। हम भारतीय इसे सरस्वती की अभ्यर्थना से प्रारंभ करके होली के महा-उत्सव पर समाप्त करते हैं।
शीत या शिशिर की ठिठुरन भले ही हाड़ कंपाती हो किन्तु इन बर्फीली ऋतुओं के बिना भी तो प्रकृति का आँगन सूना-सूना होता है और फिर इसके बाद गाते गुनगुनाते रस के पुखराजी छींटे उड़ाते बसंत के आगमन से मौसम के आँगन का सुख दूना-दूना होता है। वसंत की रंगत ही ऐसी मनोहारी है कि कठोर से कठोर तपस्वी का ह्रदय भी पुरवैया की झकोर से बेबस हो आत्मनियंत्रण खो कर बेकाबू हो जाए। ऋषि विश्वामित्र के तपोभंग का वृतांत इसका सबसे प्रबल प्रमाण है। § Read_More....

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अनुशासन की आड़ में कहीं शोषण तो नहीं

dr neelam mahendraअगर हम वाकई में राष्ट्र हित के विषय मे सोचते हैं तो हमें कुछ खास लोगों द्वारा उनके स्वार्थ पूर्ति के उद्देश्य से बनाए गए स्वघोषित आदर्शों और कुछ भारी भरकम शब्दों के साये से बाहर निकल कर स्वतंत्र रूप से सही और गलत के बीच के अंतर को समझना होगा।
भ्रष्टाचार जिसकी जड़ें इस देश को भीतर से खोखला कर रही हैं उससे यह देश कैसे लड़ेगा ?
यह बात सही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काफी अरसे बाद इस देश के बच्चे बूढ़े जवान तक में एक उम्मीद जगाई है। इस देश का आम आदमी भ्रष्टाचार और सिस्टम के आगे हार कर उसे अपनी नियति स्वीकार करने के लिए मजबूर हो चुका था,उसे ऐसी कोई जगह नहीं दिखती थी जहाँ वह न्याय की अपेक्षा भी कर सके। लेकिन आज वह अन्याय के विरुद्ध आवाज उठा रहा है।
सोशल मीडिया नाम की जो ताकत उसके हाथ आई है उसका उपयोग वह सफलतापूर्वक अपनी आवाज प्रधानमंत्री तक ही नहीं, पूरे देश तक पहुँचाने के लिए कर रहा है। देखा जाए तो देश में इस समय यह एक आदर्श स्थिति चल रही है जिसमें एक तरफ प्रधानमंत्री अपनी मन की बात देशवासियों तक पहुंचा रहे हैं तो दूसरी ओर देशवासियों के पास भी इस तरह के साधन हैं कि वे अपनी मन की बात न सिर्फ प्रधानमंत्री बल्कि पूरे देश तक पहुंचा पा रहे हैं। § Read_More....

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नेता जी ने शायद ऐसा अन्त तो नहीं सोचा होगा

dr-neelam-mahendra-mpदेश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश के सबसे शक्तिशाली राजनैतिक परिवार में कुछ समय से चल रहा राजनैतिक ड्रामा लगभग अपने क्लाइमैक्स पर पहुंच ही गया; कुछ कुछ फेरबदल के साथ। दरअसल यू पी के होने वाले चुनावों और मुलायम सिंह की छवि को देखते हुए केवल उनके राजनैतिक विरोधी ही नहीं बल्कि लगभग हर किसी को उनकी यह पारिवारिक उथल पुथल महज एक ड्रामा ही दिखाई दे रहा था ए वो क्या कहते हैं न महज एक पोलीटिकल स्टंट!
आखिर वो पटकथा ही क्या जिसके केंद्र में कोई रोमांच न हो ! सबकुछ ठीक ही चल रहा था। एक पात्र था अखिलेश ए तो दूसरा शिवपाल और जिस को वो दोनों ही पाना चाहते थे ए वह थी सत्ता की शक्ति। पटकथा भी बेहद सधी हुई ए एक को नायक बनाने के लिए घटनाक्रम लिखे गए तो दूसरा खुदबखुद ही दर्शकों की नजरों में खलनायक बनता गया। 1992 में समाजवादी पार्टी के गठन से लेकर आज तक पार्टी पर नेताजी का पूरा कंट्रोल था। भले ही अपने भाईयों के साथ उन्होंने इसे सींचा था लेकिन श्नेताजी श् तो एक ही थे जिनके बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता था। यह उन्हीं की पटकथा का कमाल था कि आज अखिलेश को पार्टी से निकाले जाने के बाद पार्टी के 200 से भी अधिक लगभग 90ः विधायक मुलायम शिवपाल नहीं अखिलेश के साथ हैं ! 2012 के चुनावी दंगल में उन्होंने अखिलेश को पहली बार जनता के सामने रखा। मुलायम की कूटनीति और अखिलेश की मेहनत से समाजवादी पार्टी की साइकिल ने वो स्पीड पकड़ी कि सबको पछाड़ती हुई आगे निकल गई । शिवपाल की महत्वाकांक्षाओं और अपेक्षाओं के विपरीत अखिलेश को न सिर्फ सी एम की कुर्सी मिली बल्कि जनता को उनका युवराज मिल गया । उनके पूरे कार्यकाल में जनता को यही संदेश गया कि वे एक ऐसे नई पीढ़ी के युवा नेता हैं जो एक नई सोच और जोश के रथ पर यूपी को विकास की राह पर आगे ले जाने के लिए प्रयासरत हैं। वे ईमानदारी और मेहनत से प्रदेश के बुनियादी ढांचे में सुधार से लाकर आम आदमी के जीवन स्तर को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध हैं और अपनी इस छवि निर्माण में वे काफी हद तक सफल भी हुए हैं। जिस रिकॉर्ड समय में आगरा लखनऊ एकस्प्रेस हाईवे बनकर तैयार हुआ है वह यूपी की नौकरशाही के इतिहास को देखते हुए अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। आज लखनऊ मेट्रो केवल अखिलेश का ड्रीम प्रोजेक्ट नहीं रह गया है बल्कि उसने यूपी के हर आमोखास की आँखों में भविष्य के सपने और दिल को उम्मीदों की रोशनी से भर दिया है। अखिलेश के सम्पूर्ण कार्यकाल में मुलायम सिंह की सबसे बड़ी उपलब्धि अखिलेश की यही छवि निर्माण रही। § Read_More....

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दक्षिण चीन सागर में तनाव-पंकज के. सिंह

pankaj-k-singhभारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाते हुए सेशेल्स के साथ चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। सेशेल्स को भारत ने अपना विश्वसनीय मित्र और रणनीति साझीदार बताया है। भारतीय प्रधानमंत्री के अनुसार, हिंद महासागर के द्विपक्षीय देशों के साथ मजबूत और स्थाई संबंध भारत की सुरक्षा एवं आर्थिक प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। सेशेल्स ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता का भी समर्थन किया है। भारत द्वारा सेशेल्स के नागरिकों के लिए तीन माह का मुफ्त वीजा और वीजा आॅन एराइवल की घोषणा की गई है। भारत और सेशेल्स के मध्य जल सर्वेक्षण, अक्षय ऊर्जा तथा बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में परस्पर सहयोग को सुनिश्चित किया गया है। दोनों देशों के मध्य नैविगेशन चार्ट और इलेक्ट्रॉनिक नैविगेशन चार्ट का निर्माण किया जाएगा। दोनों देश प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करते हुए अपनी अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए ब्लू इकॉनमी की दिशा में पारस्परिक सहयोग को और गति देंगे। इस संदर्भ में दोनों देश संयुक्त कार्यसमूह गठित करने पर भी सहमत हो गए हैं। भारत और आसियान देश दक्षिण चीन सागर में चीन के निरंतर बढ़ते प्रभुत्व के मद्देनजर सशंकित दिखाई पड़ रहे हैं। भारत और आसियान देश समुद्र और साइबर स्पेस समेत अनेक क्षेत्रों में नवीन सुरक्षा ढांचा विकसित करने पर चर्चा करते रहे हैं। भारत हमेशा ही इस बात के लिए प्रयत्नशील रहा है कि उच्च सागर में नौ चालन तथा परिवहन की स्वतंत्रता होनी चाहिए और दक्षिण चीन सागर से जुड़े किसी भी प्रकार के सीमा विवाद का हल पारस्परिक वार्ताओं द्वारा ही निकाला जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि दक्षिण चीन सागर में चीन, वियतनाम और फिलिपिंस समेत अन्य तटवर्ती देशों के मध्य अनेक द्विपीय और सामुद्रिक सीमा संबंधी विवाद निरंतर सामने आते रहते हैं और इनकी वजह से प्रायः तनावपूर्ण स्थितियां बनी रहती हैं। हिंद महासागर के द्वीपीय देशों की यात्रा के दौरान कूटनीतिक कारणों की वजह से भारतीय प्रधानमंत्री ने मालदीव को अपने दौरे में शामिल नहीं किया था। मालदीव ने इस संदर्भ में आधिकारिक रूप से दुख और निराशा व्यक्त की है। उल्लेखनीय है कि मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद को 13 वर्ष की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद भारत समेत विश्व के अनेक देशों ने इस पर चिंता व्यक्त की थी। मालदीव का इस संदर्भ में यही कहना है कि यह सजा एक विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए सुनाई गई है और यह मालदीव का एक नितांत घरेलू मामला है। मालदीव के विदेश मंत्रालय में उपविदेश मंत्री फातिमा इनाया ने भारत की चिंताओं के संदर्भ में कहा कि, ‘‘हम इस संदर्भ में भारत की चिंता समझ सकते हैं। यह स्वाभाविक ही है कि आप अपने पड़ोस में होने वाली घटनाओं के संदर्भ में चिंतित हों।’’ § Read_More....

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इश्क और जंग

manisha-shukla
मनीषा शुक्ला

इश्क और जंग (चुनावी जंग समाहित) में सब जायज है, शायद यह सोच भाजपा ने बसपा पर शिकंजा कस डाला है। जानते हुए भी कि बसपा ही नहीं, हर पार्टी के मुकाबले भाजपा के पास ज्यादा बेनामी चंदा है। भाजपा की यह चाल पोच है। बसपा ने पार्टी की नकदी से जमीनें नहीं खरीदी, न कमीशन देकर उस राशि को चोर बाजार में बदलवाया। बल्कि उसे अपने खाते में जमा ही करवाया। बसपा भ्रष्ट है, यह जाहिर जानकारी है। लेकिन चंदे के मामले में क्या भाजपा खुद धुली है? भाजपा और कांग्रेस तो इस सिलसिले में सबसे ज्यादा चंदा जमा करने वाले दल घोषित हो चुके हैं। क्या इन दलों ने पुराने नोटों में स्वीकार पैसा अपने खातों में जमा नहीं करवाया है? क्या बीस हजार तक के चंदे में नाम गुप्त रखने की ’नीति’ का फायदा और दलों ने नहीं उठाया है? विचित्र बात यह है कि काले या बेईमानी के धन के दाखिलेे की छूट खुद सरकार ने इस पर उठे तमाम हल्ले के बावजूद छोड़ दी है – काले धन के नाम पर छेड़ी गई अपनी ऐतिहासिक मुहिम के साथ-साथ। राजनीतिक दल न आरटीआइ के तहत आएँगे, न हजारों करोड़ के चंदों का स्रोत बताएँगे। पर मौका पड़ने पर दुश्मन दल पर सरकारी छापे पड़ते रहेंगे और उनके बहाने चुनावी दुष्प्रचार का अभियान भी चलेगा। बसपा के साथ भाजपा ने यही किया है। भले इसका फायदा मिलने के आसार नगण्य हों।

लेखिका मनीषा शुक्ला

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