Monday, September 24, 2018
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बेबस बाप के लाचार बेटे की खाट पर सिमटी दुनियां

– आर्थिक तंगी बनी इलाज में रोड़ा, मदद की आस
सच्चिदानन्द सिंह, मीरजापुर। जिस बाप ने बचपन में उंगली पकड़कर चलना सिखाया, सोचा था कि बेटा बड़ा होकर उनके बुढ़ापे का सहारा बनेगा। जवान बेटे की गृहस्थी बसाने के लिए बाप ने उसकी शादी कर दी। बेटा अपने बाप के अरमान को पूरा करने के लिए ट्रक चालक बनकर सूरत में कमाई करने लगा। पिछले वर्ष 2017 जनवरी माह की 11 तारीख उसके और परिवार के लिए मनहूस बनकर आई। दो ट्रकों की टक्कर में जवान बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके दोनों पैर बुरी तरह घायल होने के कारण बेकार हो गए। पेट में भी अंदरूनी चोट लगने से कई अंग शिथिल पड़ गए। पेट व पैर के कई आपरेशन के बाद भी वह बेड पर ही पड़ा है। उसकी सारी दुनिया बेड पर ही सिमट गई है। अपने विकलांग बेटे को खड़ा करने के लिए बाप ने अपने पुश्तैनी खेत तक बेच दी, लोगों से कर्ज लेकर उसका इलाज कराया कि बेटा किसीअपने पैरों पर खड़ा हो जाए। आर्थिक तंगी के चलते बाप लाचार है । उसे अब योगी और मोदी जैसे दयालु नेताओं के सहायता की दरकार है। बेबस बाप अपनी लाचार बेटे को देखकर खून के आंसू रोने को विवश है।
परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए युवा बेटा पिता की अरमानों को पूरा करने के लिए घर, जिला और प्रदेश छोड़कर सूरत चला गया। कभी सड़क पर फर्राटे भरने वाला छानबे विकासखंड के डंगहर गांव निवासी शिवमणि तिवारी का पुत्र ओमप्रकाश तिवारी अभी दुनिया को कायदे से समझ भी नहीं पाया था कि वह सड़क हादसे का शिकार बन गया। ट्रक चलाते समय सूरत में सामने से आई दूसरी ट्रक ने ऐसा धक्का मारा की उसकी दुनिया ही सिकुड़ गयी। हादसे में ओमप्रकाश गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके दोनों पैर खराब हो गये। अंदरूनी चोट व घायल अवस्था में उसका इलाज सूरत में कराया गया। उसकी हालत में सुधार न होने पर परिजनों ने उसका इलाहाबाद में इलाज कराया। लाखों रुपए खर्च करने पर भी कोई खास राहत न मिलने पर वाराणसी के एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया।
इस दौरान उसके कई आॅपरेशन किए गए आॅपरेशन में अब तक करीब 18 लाख रुपए का खर्च इलाज में किया जा चुका है। प्राइवेट कंपनी से सेवानिवृत्त होने वाले शिवमणि तिवारी दो बेटों में छोटे ओम प्रकाश को पुनः अपने पैरों पर खड़ा होना देखना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन तक बेंच दी। इतना ही नहीं जब उस से भी मनसा पूरी नहीं हुई तो वह लोगों से कर्ज लेकर अपने बेटे का इलाज करा रहे है। कर्ज में डूबा पिता अपने बेटे की बेड पर ही सिमटी दुनिया को देख भगवान को दिन रात याद कर रहा है। उसकी मंशा बस यही है कि ओमप्रकाश फिर अपने पैरों पर खड़ा हो जाए और पहले की तरह स्वस्थ प्रसन्न रहे। दिल का दर्द ना चाहते हुए भी उनकी आँखों से आंसू बनकर निकल पड़ता है। बिस्तर पर पडे ओम प्रकाश चाह कर भी खड़ा नहीं हो सकता। उसके पैर की कई बार सर्जरी के बावजूद बाहर से स्क्रू के साथ लोहे का सहारा दिया गया है, जो अब शरीर का अंग ही बन गया है। चिकित्सकों का कहना है कि अभी कुछ और आॅपरेशन कूल्हे का करना बाकी है उसके बाद बेड पर पड़ा मरीज खड़ा हो सकता है। ओम प्रकाश के बिस्तर पर पड़ने के बाद पूरे परिवार उनकी तीमारदारी में लगा है। उनके बड़े भाई की दुनिया ही बदल गई है। अब अपने भाई के लिए कंपाउंडर की भूमिका अदा कर रहे हैं। हर तीसरे दिन ड्रेसिंग करने का जिम्मा उनके ऊपर है। इसके अलावा नहलाना व शौच कराना यह सब परिवार के लोग बखूबी कर रहे हैं। बेबस बाप अपने लाचार बेटे को बिस्तर पर पड़ा देख मन ही मन सिसक रहा है। उसे अब सरकारी मदद की आस है जिसके बल पर वह अपने बेटे को एक बार फिर पैरों पर खड़ा कर सके। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के संसदीय इलाके का एक गरीब सवर्ण आर्थिक तंगी के चलते इलाज को मोहताज बना है। छानबे वह क्षेत्र है जहाँ से विधायक भी अपना दल के राहुल प्रकाश कोल हैं।