Home » मुख्य समाचार » प्रोफेसर ई वी गिरीश ने बताये खुशनुमा जीवन के पांच सिद्धांत

प्रोफेसर ई वी गिरीश ने बताये खुशनुमा जीवन के पांच सिद्धांत

⇒कहा-मानव जीवन का उद्देश्य है सदा खुश रहो
फिरोजाबादः जन सामना संवाददाता। गांधी पार्क में आयोजित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा पांच दिवसीय शिविर के दूसरे दिन मुंबई से पधारे प्रोफेसर ई वी गिरीश भाई ने खुशनुमा जीवन के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि अगर हम सदा खुश रहना चाहते हैं तो हमें 5 सिद्धांतों पर चलना होगा ।पहला सिद्धांत आध्यात्मिक का व्यक्तित्व है। हम मानवीय जीवन जी रहे हैं।मानवीय जीवन में नौ दिन वृत रख लिए ।मुसलमान ने एक महीना रमजान कर लिया बस हम अच्छा जीवन जी रहे हैं ।खिलाना पिलाना व्रत रखना ही मानवीय जीवन समझ लिया है
दूसरा सिद्धांत मैं आत्मा हूं। मेरा शरीर है। जब तक आत्मा शरीर में है हम अपने को कभी शरीर नहीं बोलते हैं और जैसे आत्मा शरीर से निकल जाती है तो हम इस शरीर को शरीर बोलने लगते हैं ।इसका मतलब है हम आत्मा है और यह हमेशा यह शरीर है और इस शरीर का महत्व भी है जब तक उसमें आत्मा है तीसरा सिद्धांत जैसा कर्म करेगा वैसा भोगना पड़ेगा ।हम किसी के साथ गलत करते हैं और सोचते हैं कि सॉरी बोलने से हमारा किया हुआ समाप्त हो जाएगा तो यह गलत है आपने जो किया है वह आपको भोगना ही पड़ेगा ।कहते हैं मुसलमान को मस्जिद में अल्लाह दिखाई देता है।हिन्दू को मंदिर में भगवान दिखाई देता है ।लेकिन दुनिया जन्नत तभी दिखेगी जब हम इंसान में इंसान दिखाई देगा। चैथा सिद्धांत मानव जीवन का उद्देश्य है सदा खुश रहो। सदा शांत रहना। सदा मीठा बोलना सदैव हिम्मत भरे रहना। हम कहते हैं कभी-कभी गुस्सा होना चाहिए ।कभी-कभी फेल होना बच्चे को होना चाहिए। कभी-कभी यह तो कभी नहीं कहते चाहते हैं। सदा मेरा बच्चा पास होता रहे ऐसे ही सदा खुश रहना चाहिए। पांचवा सिद्धांत -मेरे जीवन में सदा दुख का कारण सिर्फ मैं हूं कोई मुझे दुख नहीं देता है जो सत्य है उसके अनुसार चलना है। डर मानव जीवन को बर्बाद करता है ।माफ करना माना किसी की गलती से होने वाले नुकसान जो जैसा करोगे वैसा भरोगे। चाहे कितनी भी क्षमा कर दो या क्षमा मांग लो जो सत्य है उसके अनुसार चलना है। डर मानव जीवन को बरबाद करता है 10 वीं कक्षा को किसने डराया माता पिता ने। माता पिता के बच्चे की देखभाल करने से कोई परेशानी नहीं है लेकिन माता पिता को अगर चिन्ता होगी तो बच्चे पर बौद्धिक विकास कम होता है क्योंकि माता पिता का डर बच्चों बौद्धिक विकास रोक देता है। दोपहर 11 बजे से एक बजे तक प्रोफेसर गिरीश भाई ने कन्याओं को वास्तविक प्रेम का अर्थ बताते हुए कहा कि प्रेम दैहिक आकांक्षा नहीे बल्कि सच्चा प्रेम वह है कि हम एक दूसरे को समझे एक दूसरे के साथ सामंजस्य बनाकर चलें कंधे से कंधा मिलाकर चलें। मुख्य रुप से इस कार्यक्रम मे मेयर नूतन राठौर, मंगल सिंह राठौर, शरष वर्मा, देवीचरण अग्रवाल, डा. प्रभास्कर राय, कृष्णकांत गुप्ता, राकेश सीए, विनोद शर्मा योगा, सुनील टण्डन, अनुज अग्रवाल, पवन अग्रवाल आदि मौजूद रहे।