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ईएसआई अस्पताल में बूंद-बूंद पीने के पानी लिए तरस रहे मरीज

स्वच्छ भारत अभियान की कमर तो किदवई नगर ईएसआई अस्पताल में टूटती दिखाई पड़ रही
कानपुर, नीरज राजपूत। जहां एक तरफ सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। परंतु कुछ भ्रष्ट अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इरादों को पलीता लगाने का काम कर रहे हैं। जहां बारिश के चलते पूरे शहर भर में पानी ही पानी दिखाई पड़ रहा है। बहुत से लोग अपने घर से बेघर हो गए हैं क्योंकि उनके घरों में पानी भरा हुआ है। वहीं कुछ नागरिकों को पीने के पानी की चंद बूंदों के लिए तरसना पड़ रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यू इंडिया, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया जैसी महात्वाकांक्षी योजनाओं के बीच आम जनमानस की बुनियादी सुविधाओं जैसे बिजली, पानी और मकान के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है। कुछ ऐसा ही हाल कानपुर के किदवई नगर के कर्मचारी राज्य बीमा चिकित्सालय का है। जहां मरीज इलाज के लिए आता है और उसे पीने के लिए एक गिलास पानी तक नसीब नहीं होता है।

मामला उत्तर प्रदेश से कानपुर जिले के किदवई नगर कर्मचारी राज्य बीमा चिकित्सालय का जहां बीमा अस्पताल के कैंपस में रहने वाले स्टॉफ के लोगों के लिए पानी की समस्या विकराल रुप धारण किए है। कई दिनों से पानी की समस्या है, लेकिन अधिकारियों की नींद नही खुल रही है अधिकारी कहते हैं मैंने अपने सीनियर से कह दिया है। जो भी काम होगा सरकारी नियम अनुसार होगा।
क्षेत्रीय नागरिकों ने आज मजबूरन चिकित्सा अधीक्षक को घेर कर धरना प्रदर्शन किया
क्षेत्रीय नागरिकों नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष यहां मोटर खराब हो जाती है। जिसकी लागत हर बार ₹200000 पास होती है अभी अप्रैल में एक नई बोरिंग हुई थी और हर बोरिंग 10 दिन से ज्यादा नहीं चल पाती है पिछले 20 वर्ष से सड़क नहीं बनी, हर वर्ष यहां फर्जी बिल पास किए जाते हैं और सारी कार्यवाही कागजों में ही होती है। जमीनी स्तर पर कार्यवाही के लिए किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के पास समय नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छ भारत अभियान की कमर तो ईएसआई अस्पताल किदवई नगर में टूटती दिखाई पड़ रही है। जहां एक तरफ स्वच्छता के नाम पर आलाधिकारी बड़े-बड़े दावे करते है। वहीं स्वच्छता अभियान की पोल खुद अस्पताल के ठीक पीछे बने ईएसआई बीमा अस्पताल के क्वार्टर में खुल गई।
हमारा सवाल स्वास्थ्य मंत्री जी से है कि ऐसे में गरीब तबके का आम आदमी अस्पताल में बीमारी को दूर करने के लिए पहुंचता है या फिर बीमारी को गले लगाने के लिए।