रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायबरेली के सूक्ष्मजीवविज्ञान विभाग द्वारा सामुदायिक चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य विभाग के सहयोग से ‘वायरल हेपेटाइटिस’ विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को हेपेटाइटिस-बी एवं हेपेटाइटिस-सी की रोकथाम, निदान तथा उपचार से संबंधित नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम का शुभारंभ सूक्ष्मजीवविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शेफाली गुप्ता के स्वागत उद्बोधन से हुआ। इसके पश्चात एम्स रायबरेली की कार्यकारी निदेशक डॉ. अमिता जैन ने कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन करते हुए निरंतर चिकित्सा शिक्षा तथा वायरल हेपेटाइटिस उन्मूलन के लिए प्रभावी रोकथाम रणनीतियों की आवश्यकता पर बल दिया। वैज्ञानिक सत्रों में डॉ. अमिता जैन ने “राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीएचसीपी): प्रगति एवं चुनौतियां” विषय पर व्याख्यान दिया। इसके अतिरिक्त नीडल-स्टिक इंजरी से प्रभावित एक स्वास्थ्यकर्मी ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे व्यावसायिक सुरक्षा तथा समय पर पोस्ट-एक्सपोजर प्रबंधन के महत्व को रेखांकित किया गया। इस अवसर पर एम्स रायबरेली की डीन (अकादमिक) डॉ. नीरज कुमारी तथा अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए निरंतर चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रमों के महत्व पर प्रकाश डाला तथा वायरल हेपेटाइटिस की रोकथाम, समय पर निदान, प्रभावी उपचार एवं संक्रमण नियंत्रण में स्वास्थ्यकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. सौरभ पॉल ने रक्तजनित हेपेटाइटिस के महामारी विज्ञान एवं रोग भार पर प्रकाश डाला। डॉ. स्वेता सिंह ने हेपेटाइटिस-बी एवं हेपेटाइटिस-सी के प्रयोगशाला निदान की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। डॉ. निधि भटनागर ने निदान में नवीनतम प्रगतियों पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। डॉ. मनु शर्मा ने हेपेटाइटिस-बी एवं हेपेटाइटिस-सी की रोगजनन एवं उपचार पर विस्तृत चर्चा की, जबकि डॉ. मुकेश शुक्ला ने पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस एवं संक्रमण की रोकथाम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। कार्यक्रम का समापन डॉ. स्वेता सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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