
अब सरकार नर्सरी से आठवीं तक हैप्पीनेस पाठ्यक्रम शुरू करने जा रही है। अगले शैक्षिक सत्र से यह पाठ्यक्रम सरकारी स्कूलों में लागू होगा। जिसमें प्रतिदिन एक पीरियड हैप्पीनेस विषय का होगा। इस विषय की कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी। मूल्यांकन बच्चों के हैप्पीनेस इंडेक्स के माध्यम से किया जाएगा।
भारतीय परंपरा में शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को खुशनुमा जीवन जीने के लिए तैयार करना रहा है। बच्चों को तनाव से बचाने के लिए ही इसे तैयार किया जा रहा है। पाठ्यक्रम के माध्यम से बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य को विकसित किया जाएगा। यह शैक्षणिक उपलब्धियों जितना ही महत्वपूर्ण होगा।
शिक्षाविदों का मानना है कि स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई बोझिल न लगे, बच्चे तनावमुक्त रहकर पढ़ाई करें, ऐसे में बच्चों को हैप्पीनेस की शिक्षा की ओर ले जाने की जरूरत है। सरकार का यह एक अच्छा निर्णय है।