बेशक राज कुंद्रा ने गलत किया और गुनहगार है, हर जुर्म कि सज़ा उन्हें मिलनी चाहिए, पर इस मामले में ये कांड होते ही एक-एक करके जो लड़कियां आरोपों का पिटारा खोल रही है उस बात पर एक बार संदेह जरूर होता है। अब देखिए शर्लिन चोपड़ा ने उन पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। शर्लिन चोपड़ा ने कथित तौर पर पुलिस को दिए अपने बयान में राज कुंद्रा पर सेक्सुअल असॉल्ट का आरोप लगाया है। शर्लिन चोपड़ा का दावा है कि राज कुंद्रा दो साल पहले 2019 में एक दिन अचानक उनके घर पहुंचे थे और उनके साथ सेक्सुअल मिसकंडक्ट यानी यौन दुराचार किया। शर्लिन का आरोप है कि राज कुंद्रा ने उन्हें जबरन किस किया था।
लेख/विचार
मिशन पांच राज्यों में इलेक्शन 2022 – हर पार्टी नें तात्कालिक रणनीतिक रोडमैप बनाना शुरू किया
चुनाव जीतने प्रबुद्ध सम्मेलन, प्रतिमा स्थापन, सोशल व जातीय इंजीनियरिंग, नेतृत्व परिवर्तन सहित अनेक रणनीतिक पैटर्न पर काम शुरू – एड किशन भावनानी
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और भारत की अनेक खूबसूरतीयों में से एक है भारतीय लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया को पूरी दुनिया में बहुत श्रद्धा सम्मानित रूप से, एक आइडियल के रूप में देखा जाता है। जो भारत के लिए एक गर्व की बात है। चुनावी प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए भारत में एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था भारतीय चुनाव आयोग है जो जिम्मेदारी से चुनावी प्रक्रिया संपन्न करवाता है…। साथियों बात अगर हम अगले साल 2022 में होने वाले पांच राज्यों के चुनावों की करें तो अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, सूत्रों के अनुसार गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंड विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2022 में समाप्त होगा।
कब तक कहर ढायेगा कारोना
कुछ लोग मानते हैं कि करोना की तीसरी लहर आ गई हैं।कुछ लोग कहते हैं आने वाली हैं।वैसे तो जितने लोगो का रासीकरण हो गया हैं और जितने संक्रमित हो के ठीक हो चुके हैं। उनको असर होने की संभावना कम है।तो बचे हुए लोगो को ही ज्यादा असर करेगा करोना।जो मुख्य रूप बच्चे ही हो सकते हैं। लेकिन एक और भी प्रमुख प्रश्न हैं।जो ठीक हो गए हैं उनके सामने भी कितने ही प्रश्न हैं। जो आर्थिक,सामाजिक और मानसिक मुख्य हैं। लॉकडाउन के समय से आज तक सभी व्यापारियों को कुछ न कुछ मुश्किल आई ही हैं। जैसे कारखानों में कारीगरों का घर वापसी,कच्चे माल की अलभ्यता, बिक्री नहीं हो पा रही है, क्योकि लोगो की खरीदशक्ति कम हो रही हैं, क्योंकि आमदनी कम हो गई हैं। कहां से व्यापारी देंगे इनको वेतन जब उनका ही काम नहीं चल पाया हैं।बहुत ही ऐसे ही प्रश्न हैं जो अभी अव्यक्त हैं। सामाजिक प्रश्न भी हैं, जिनके बड़े विवाह योग्य बच्चे हैं उनके रिश्तों के लिए योग्य जीवनसाथी ढूंढने के लिए करोना प्रोटोकॉल के साथ आना जाना मुश्किल हो गया था।तय की शादियों को अंजाम देना और बहु लाना या लड़की को विदा करना भी एक चुनौति बन गया था।इतनी चुनौतियों का सामना कर के अब थोड़ी परिस्थिति सामान्य हुई हैं। लेकिन अभी करोना का डर गया नहीं हैं। एक डर सा घर कर गया है करोना का जिससे मानसिक रूप से लोगो को कमजोर कर गया हैं।लोग आदमी की उपस्थिति से डर रहे हैं।कैसा समय आ गया हैं।कुछ लोग तो घर से बाहर निकलने से डर रहे हैं।मानसिक डर बैठ गया हैं कि ऐसा करने से खुद संक्रमित हो जायेगा, या कोई परिवार के सभ्यों को भी हो सकता हैं। संक्रमण,इसी डर में अपने आप को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर बना रहें हैं।
ज़िन्दगी की परीक्षा कितनी वफादार – इसका पेपर कभी लीक नहीं होता
मनुष्य को ज़िन्दगी में कर्म रूपी परीक्षा इमानदारी से देना ज़रूरी – फ़ल रूपी रिजल्ट ईश्वर अल्लाह के हाथ में जो कभी लीक नहीं होता – एड किशन भावनानी
भारत में अनेक प्रकार की कई परीक्षाएं जिसमें शैक्षणिक एकेडमिक, प्रोफेशनल, सरकारी नौकरी भर्ती, एंट्रेंस एग्जाम, सहित अनेक प्रकार की परीक्षाएं होती है। जिसके आधार पर मानवीय बौद्धिक क्षमता का मापदंड निर्धारित किया जाता है और एक कटऑफ रेट तैयार किया जाता है जिसके आधार पर सफलता और असफलता का रिजल्ट घोषित किया जाता है। परंतु यह मानवीय उद्दंडता है कि इस परीक्षा में अनेक गैरकानूनी हथकंडे अपनाए जाते हैं जिसमें नकल से लेकर पेपर लीक तक हथकंडे उपयोग किए जाते हैं, ताकि उस परीक्षा में पास हो सके या उसे नौकरी पेशे के लिए चुना जा सके और अपना शेष जीवन का पूरा भविष्य सुरक्षित किया जा सके।
मृत्यु भोज करना उचित या अनुचित?
हिंदू धर्म में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु की बारह दिन के पश्चात तेरहवें दिन मृत्यु भोज की प्रथा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। यह मृत्यु भोज तेरहवें दिन ही क्यों कराया जाता है इस प्रश्न का उत्तर हमें गरुड़ पुराण से मिल जाता है जिसमें यह विदित है की दिवंगत आत्मा को उसकी मृत्यु के पश्चात 13 दिन तक 13 गांव को पार करना होता है गरुड़ पुराण के अनुसार यह गांव बहुत भयानक होते हैं आनंददायक नहीं होते हैं यह जंगल कांटो और अग्नि से भरा हुआ गांव होता है जिसे पार करते हुए दिवंगत आत्मा को यमराज के समक्ष उपस्थित होना होता है।
एक बार फिर सोचिए
आज जब आमिर खान और किरण (खान) के वैवाहिक जीवन की समाप्ति की बात सुन मन में खयाल आया कि अपने आप को समाज का दर्पण समझने वाले लोग अपने फैंस को कैसा रोलमॉडल देंगे?“प्रसिद्ध व्यक्ति अपनी छाप समाज के सामने खुद खराब करते है”
इतनी संपत्ति के मालिक होते हुए राज कुंद्रा को ऐसा घटिया काम करने की क्या जरूरत पड़ गई। पैसे कमाने के ओर कई रास्ते है अवैध तरीके से शायद लक्ष्मी ज़्यादा और जल्दी आती है, अगर गुनाह साबित हो गया तो क्या इज्जत रह जाएगी। शायद इन लोगों के लिए ही ये उक्ति बनाई गई होगी की बदनाम हुए तो क्या हुआ नाम तो हुआ। राज कुंद्रा का नाम अब बिटक्वाइन स्कैम में जुड़ गया है। पोर्न वीडियो बनाने के मामले में गिरफ्तार हुए राज कुंद्रा को कोर्ट ने 23 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। सुनवाई के दौरान राज कुंद्रा ने बताया कि वो इस धंधे से काफी पैसा कमा रहे थे।जनसंख्या वृद्धि कानून
1975 में लगाया गया आपातकाल आज भी लोग याद करते हैं और याद करने के साथ-साथ उस वक्त की दबंगई को भी याद करते हैं। आज भी बढ़ती हुई जनसंख्या चिंता का विषय है और इसे रोकने के लिए कारगर उपाय किए जाने चाहिए। अब तक जो भी नियम कानून इस मुद्दे को लेकर बने हैं वह ज्यादा कारगर साबित नहीं हुए हैं। आज देश में हर मिनट पर 42 बच्चों का जन्म हो रहा है हर दिन 61,000 बच्चों का जन्म होता है। ये बढ़ती हुई आबादी रोजगार के अवसरों को खत्म कर रही है साथ ही गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी को बढ़ावा दे रही है। इस बढ़ती हुई जनसंख्या की सबसे बड़ी समस्या स्थान की है, साथ ही बिजली और पानी की भी है। लगातार कट रहे जंगल प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और उसका खामियाजा भी हम भुगत रहें हैं। गरीबी और खाद्यान्न की समस्या का कारण जनसंख्या वृद्धि ही है और इसका दुष्प्रभाव चिकित्सा की बद इंतजामी के रूप में भी दिखाई देता है।
ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली के परिणाम और दुष्परिणाम
शिक्षा किसी भी राष्ट्र अथवा समाज के समुचित विकास एवं निरंतर उत्थान का मुख्य कारक माना गया है किंतु पिछले डेढ़ सालों से कोविड-19 महमारी के दुष्परिणाम से यदि सबसे अधिक कोई प्रणाली अथवा व्यवस्था का ह्रास हुआ है तो वह है शिक्षा प्रणाली। वर्तमान समय में शिक्षा को विद्यालय जाकर प्राप्त करने की व्यवस्था का स्थान ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली ने ले लिया है जो कि घर बैठे ही बच्चों को फोन लैपटॉप कंप्यूटर इत्यादि से प्राप्त करना है जिसके लाभ तो बहुत कम है किंतु दुष्परिणाम बहुत सारे देखे जा रहे हैं। इस महामारी के संकट पूर्ण समय में ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली मात्र एक अल्पकालिक विकल्प के रूप में तो सही है किंतु इसे प्राय: के लिए अनिवार्य बनता यदि देखा जाए तो यह एक चिंता का विषय है।
उम्र और जिंदगी का फर्क – जो अपनों के साथ बीती वो जिंदगी, जो अपनों के बिना बीती वो उम्र
नई जनरेशन को अपनों के साथ समय बिताना और अपनों को नई जनरेशन के साथ दोस्त बनकर रहना, आधुनिक जीवन जीने का मूल मंत्र – एड किशन भावनानी
भारत अपनी परंपराओं, संस्कृति, संस्कार, अपनापन, मान मर्यादा, अपनत्व इत्यादि अनेक प्रकार की मानवीय आचरण सभ्यता के लिए विश्व प्रसिद्ध है। मेरा निजी विचार है कि भारत में नागरिक अपनों, अपने बड़े बुजुर्गों का जितना सम्मान मानमर्यादा करते हैं, विश्व में कहीं नहीं होगा। हालांकि सभी अच्छाइयों में कुछ अपवाद बुराइयां भी होती है जो नगणयता में गिनी जाती है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, अपनों से रिशता सामाजिक संबंधों का आधार है और रिश्तो में कड़वाहट मनुष्य में मानसिक अशांति पैदा करता है, जिससे जिंदगी का मकसद सिर्फ उम्र काटना तक ही सीमित हो जाता है।
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