मजहबी आज़ादी पर नज़र रखने वाली एक गैर राजनीतिक अमरीकी संस्था यूएस कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ़्रीडम (USCIRF) ने साल 2020 के लिए मंगलवार को जारी अपनी सालाना रिपोर्ट में भारत को उन 14 देशों के साथ रखने का सुझाव दिया है जहाँ धार्मिक आज़ादी को लेकर कुछ ख़ास चिंताएं हैं। रिपोर्ट में भारत को उन देशों में शामिल किया गया है जहाँ धार्मिक अल्पसंख्यकों पर उत्पीड़न लगातार बढ़ रहा है।अल्पसंख्यक उत्पीड़न और भारत
मजहबी आज़ादी पर नज़र रखने वाली एक गैर राजनीतिक अमरीकी संस्था यूएस कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ़्रीडम (USCIRF) ने साल 2020 के लिए मंगलवार को जारी अपनी सालाना रिपोर्ट में भारत को उन 14 देशों के साथ रखने का सुझाव दिया है जहाँ धार्मिक आज़ादी को लेकर कुछ ख़ास चिंताएं हैं। रिपोर्ट में भारत को उन देशों में शामिल किया गया है जहाँ धार्मिक अल्पसंख्यकों पर उत्पीड़न लगातार बढ़ रहा है।
Jansaamna
दुनिया भर में कोरोना वायरस का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत में भी इस घातक वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 21 हजार को पार कर चुकी है। लोगों के मन में इस वायरस को लेकर कई तरह के सवाल हैं, ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन हर संभव कोशिश कर रहा है कि इस वायरस से जुड़ी जानकारियों को सभी देशवासियों से साझा किया जाए। कई लोग इस बात से भी चिंतित हैं कि कोरोना वायरस का संक्रमण शरीर में कितने दिनों तक रहता है। कोविड-19 से संक्रमित लोग भले ही जल्दी ठीक हो रहे हो लेकिन अब इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि कुछ मरीजों को पूरी तरह से ठीक होने में लंबा वक्त लग सकता है। संक्रमण के बाद ठीक होने में लगने वाला समय इस बात पर निर्भर करेगा कि सबसे पहले आप किस हद तक बीमार हुए थे।
विरोधियों की भी मजबूरी बन जाओ,
कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन लागू है। कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में तेजी बरकरार रहने की वजह से इसका 30 अप्रैल तक बढ़ना तय माना जा रहा है। इस बीच फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने कहा है कि भारत जैसे देश को महीनों तक लॉकडाउन नहीं रखा जा सकता है। ऐसे में लॉकडाउन और आर्थिक गतिविधियों के बीच एक बैलेंस बनाने की जरूरत है। उद्योग संगठन ने लॉकडाउन को धीरे-धीरे खत्म करने और स्वस्थ युवाओं को काम पर लौटने को लेकर केंद्र सरकार को कई सुझाव दिए हैं।
कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए देश में लॉकडाउन चल रहा है। यह लॉकडाउन आगे कब तक चलेगा, यह स्पष्ट नहीं है। इस दौरान लोग घरों से ही काम कर रहे हैं। सुबह से लेकर रात तक कोरोना वायरस की खबरें देखकर-पढ़कर बहुत सारे लोगों के मन में एक अजीब सा भय का माहौल बनने लगता है। बहुत सारे लोगों के मन में कहीं न कहीं एक नकारात्मकता भी जन्म ले रही है। लेकिन इस वायरस से हमें डरने की बजाय इसकी सही जानकारी रखने की जरूरत है। अफवाहों से दूर रहते हुए हमें सकारात्मक रहना भी आवश्यक है।
प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा था कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे उन डॉक्टर्स, वैज्ञानिकों, एयर इंडिया, सफाई कर्मचारियों नर्सों के हौसले को बढ़ाने के लिए उनका ताली या थाली बजाकर स्वागत और हौसला अफजाई करें। लेकिन भारत देश के अंदर थाली और घण्टा पीटने की बातों में अवैज्ञानिक एवं पाखण्डवाद के कारण उसको वायरस के संबंध से पूरी दुनिया हमारी इन हरकतो पर हंसती है।
इन दिनों कोरोना का भय हर तरफ दिख रहा है। इससे बचाव का रास्ता सिर्फ सावधानी ही बताया जा रहा है जो सिर्फ लॉक डाउन के माध्यम से गुजर रहा है। लॉक डाउन होने के चलते तमाम कारखाने अथवा संस्थान अस्थाई तौर पर बन्द कर दिए गए। नतीजन मजदूरों की रोटी पर संकट आता देख सरकारों ने उनको आर्थिक मदद के साथ ही राशन आदि की व्यवस्था करना शुरू किया।