मजबूत इच्छाशक्ति, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास कोविड.19 मरीजों और कोविड योद्धाओं की ताकतः एड किशन भावनानी
गोंदिया . कोविड.19 महामारी ने पूरे विश्व में एक भय का वातावरण निर्माण कर दिया है। आज अगर हम वैश्विक रूप से देखें तो मानवीय जीवन में खुशियां गायब हुई है और एक भय का वातावरण निर्माण हो गया है। हालांकि कुछ ही देश हैं जो कोरोना महामारी पर विजय प्राप्त करने की ओर अग्रसर हैं और वहां जश्न मनाने के समारोह हम टीवी चैनलों के माध्यम से देख रहे हैं। अमेरिका ने भी 12 से 15 वर्ष की आयु वालों को टीकाकरण की अनुमति जारी कर दी है। भारत ने भी बायोटेक को कोवैक्सीन 2 से 18 वर्ष के बच्चों पर ट्रायल की अनुमति दे दी है। और बुधवार दिनांक 12 मई 2021को इंटरनेशनल नर्सिंग डे हैं और विश्व की सभी नर्सेस को सकारात्मक प्रोत्साहन देना लाज़मी भी हैं।… बात अगर हम कोरोना महामारी से लड़ाई की करें तो चिकित्सीय तकनीकी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हर देश कोविड.19 से जंग लड़ रहा है और कामयाबी की ओर बढ़ भी रहे हैं।
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Jansaamna
ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकान्त शास्त्री ने मातृ दिवस के पावन पर्व पर अपनी मां सहित देश दुनिया की सभी माताओ को प्रणाम करते हुए कहाँ की, मां बच्चों की प्रथम पाठशाला एवं गुरु होती हैए मां ही एक ऐसी गुरु है। जो अपने बच्चों को पूरे मनोयोग से वात्सल्य और प्यार के साथ शिक्षा देती है। मां साहस, धैर्य, ममता, त्याग, तपस्या, सेवा, विश्वास के मिसाल की प्रतिमूर्ति होती है और इसलिए मां सदा.सदा पूज्य थी, पूज्य है और पूज्य रहेंगी। शास्त्री ने यह भी कहा कि मां ममता के आंचल की सर्वोत्तम छाया है। माँ का सम्मान दुनिया के सभी देवी देवताओं का सम्मान है। वर्तमान कोविड.19 महामारी में मां का विशेष ख्याल रखें। शास्त्री ने कहा मेरा ऐसा कोई दिन नहीं बितता जिस दिन मां को प्रणाम न करूं और मां को याद न करूं। वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री ने कहा कि मां का दर्जा दुनिया में सबसे ऊपर है और शायद ही कभी कोई मां के ऋण को अदा कर पाएगाए बड़ी बहन एवं बड़ी भाभी भी मां के समान ही पूजी जाती हैं और अपना कर्तव्य बखूबी निभाती है। मां के प्यार से हम तो क्या भगवान भी नतमस्तक हो जाते हैं। मां ने ही भगवान कृष्ण एवं भगवान राम आदि महापुरुषों को जन्म दिया है। शास्त्री ने यह भी कहा कि आज का पावन पर्व देश दुनिया के सभी माताओं को बारंबार प्रणाम करने का दिवस है एवं समूचे देश दुनिया की मातृ शक्तियों को आदर करने और इसको यादाश्त रखने वाला दिवस है और इसी को ही मातृ दिवस कहां जाता है और माँ की कृपा देश दुनिया के सभी भाई बहनों के ऊपर बनी रहे।
रचयिता- डाॅ. कमलेश जैन ‘वसंत’, तिजारा
हिसार की रहने वाली लेखिका और रेडियो एंकर उनकी माँ बिदामो देवी ने अभिभावकों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों में रचनात्मकता को सही माहौल प्रदान करके और उनके जुनून में शामिल होने की अनुमति दें। “हर छोटे से प्रोत्साहन से बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है। हमें अपने बच्चों के लिए घर में सकारात्मक माहौल बनाना चाहिए। शिवम के चित्रों से मुझे उम्मीद है कि समय बेहतर होगा, ”उन्होंने कहा।
आ जाओ एक बार मकां को ख़ुशबू वाले घर कर दो
इंडिया फर्स्ट के 100 एपिसोड्स का प्रसारण आस्था चैनल पर हो चुका है और इंडिया फर्स्ट की लोकप्रियता को देखते हुए इसका प्रसारण दूसरे चैनल आस्था भजन पर भी शुरू कर दिया गया है।
एक स्वतंत्र गणराज्य बनने और भारत में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था।
देश की स्वतंत्रता के इतिहास में 26 जनवरी का स्थान कितना महत्वपूर्ण रहा, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में 26 जनवरी को ही सदैव स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया था लेकिन 15 अगस्त 1947 को देश के स्वतंत्र होने के बाद 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाए जाने के बजाय इसका इतिहास भारतीय संविधान से जुड़ गया और यह भारतवर्ष का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व बन गया।
आज भारत में हम कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हर कस्बे, शहर, मेट्रोसिटी, में देखें तो हमें ऐसे अनेक मामले दिखेंगे कि सार्वजनिक भूमि पर तथाकथित कुछ लोग लोगों का अनाधिकृत अतिक्रमण कर निर्माण कार्य है। और हम सब यह जानते हैं कि इस प्रकार के कार्य किसकी शह पर होते हैं और फिर, मामला जनता तक, फिर जनता से अदालतों की दहलीज तक, पहुंच जाता है। पर सवाल आता है कि इस प्रकार के कार्य होते क्यों हैं’? जबकि इस संबंध में नियम व कानून सब बने हैं फिर भी यह सब होता है। अतः इस पर हम सबको चिंतन करना होगा, और स्वयं इस मुद्दे पर विचार कर निर्णय लेना होगा, तो अदालतों की दहलीज पर जाने की जरूरत ही नहीं होगी।