Monday, August 24, 2026
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अब घर का नक्शा पास कराने के लिए नहीं लगाने होंगे विकास प्राधिकरण के चक्कर

मथुरा। भवन निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृत कराने की व्यवस्था में मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) ने बदलाव किया है। अब भवन मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए आवेदकों को प्राधिकरण के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। पुरानी व्यवस्था को बंद कर फास्ट पास पोर्टल के माध्यम से मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया लागू कर दी गई है। जुलाई में पोर्टल पर प्राप्त करीब 75 प्रतिशत मामलों में निर्धारित समय सीमा के भीतर या उससे पहले नक्शों को स्वीकृति मिल गई। एमवीडीए उपाध्यक्ष लक्ष्मी एन ने बताया कि मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से फास्ट पास पोर्टल को प्रभावी किया गया है। इसके माध्यम से नक्शा स्वीकृति के साथ विभिन्न विभागों से जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्राप्त करने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन कर दी गई है। नई व्यवस्था से आवेदकों को आवेदन की स्थिति की जानकारी ऑनलाइन मिल सकेगी। इससे उन्हें बार-बार प्राधिकरण के कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। ऑनलाइन प्रक्रिया से मानचित्र स्वीकृति में जवाबदेही बढ़ने और अनावश्यक देरी कम होने की उम्मीद है।

तीन श्रेणियों में बांटी गई प्रक्रिया

मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को भूखंड के आकार और जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है। एक से 100 वर्ग मीटर तक के भूखंडों को लो-रिस्क, 100 से 500 वर्ग मीटर तक के भूखंडों को मीडियम-रिस्क और 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंडों को हाई-रिस्क श्रेणी में रखा गया है। लो-रिस्क श्रेणी में 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय भूखंडों के नक्शे की स्वीकृति आवेदक स्वयं फास्ट पास पोर्टल के माध्यम से प्राप्त कर सकता है। वहीं प्राधिकरण से स्वीकृत कॉलोनियों में 500 वर्ग मीटर तक के आवासीय भूखंडों के नक्शे आर्किटेक्ट के माध्यम से पोर्टल पर स्वीकृत कराए जा सकते हैं। व्यावसायिक भूखंडों के लिए यह सीमा 30 वर्ग मीटर तक निर्धारित की गई है। इन श्रेणियों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत मानचित्र स्वीकृति के लिए प्राधिकरण की अलग से स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी। नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया में तेजी आने के साथ आवेदकों की भागदौड़ भी कम होने की संभावना है।