Monday, August 24, 2026
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महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने पर मंथन, नवाचार और आत्मनिर्भरता को बताया विकास की कुंजी

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उपायों पर मंथन हुआ। विश्वविद्यालय में सोमवार को इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल, डिपार्टमेंट ऑफ फूड एंड न्यूट्रीशन तथा सेंटर फॉर इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड इंटरप्रेन्योरशिप के संयुक्त तत्वावधान में ‘महिला उद्यमिता’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. सुनीता मिश्रा मौजूद रहीं, जबकि पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल की प्रो. शैलजा दीक्षित ऑनलाइन माध्यम से जुड़ीं। मंच पर इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के अध्यक्ष प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा और डिपार्टमेंट ऑफ फूड एंड न्यूट्रीशन की विभागाध्यक्ष प्रो. नीतू सिंह मौजूद रहीं।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। आयोजन समिति की ओर से शिक्षकों को पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रो. नीतू सिंह ने अतिथियों एवं उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य से अवगत कराया।
मुख्य वक्ता प्रो. सुनीता मिश्रा ने सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की आवश्यकता और उन्हें स्थानीय स्तर पर लागू करने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों को अपनाकर सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण युवा पीढ़ी स्वस्थ एवं पौष्टिक आहार के प्रति अधिक जागरूक हो रही है। मिलेट्स और माइक्रोग्रीन्स जैसे पोषक खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग से नए उद्यमों की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
प्रो. मिश्रा ने कहा कि मिलेट आधारित खाद्य पदार्थों, हेल्दी बेकरी उत्पादों और माइक्रोग्रीन्स जैसे क्षेत्रों को महिला उद्यमिता से जोड़कर महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ स्वस्थ समाज और सतत विकास के निर्माण में भी योगदान दे सकती हैं।
प्रो. शैलजा दीक्षित ने कहा कि उद्यमिता को केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे एक महत्वपूर्ण जीवन कौशल के रूप में देखा जाना चाहिए। उद्यमिता व्यक्ति में पहल करने, समस्याओं का समाधान खोजने, नवाचार, संसाधनों के प्रभावी उपयोग, निर्णय लेने, वित्तीय समझ, आत्मविश्वास और जोखिम उठाने की क्षमता विकसित करती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की उद्यमिता में भागीदारी बढ़ना आर्थिक सशक्तीकरण के साथ समाज और अर्थव्यवस्था के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने कहा कि वर्तमान समय में महिला उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने सफल महिला उद्यमियों और कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाओं ने नवाचार, नेतृत्व क्षमता, दृढ़ संकल्प और व्यावसायिक कौशल के बल पर अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने विश्वविद्यालय की सेक्शन-8 कंपनी ‘नवकल्पना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों में नवाचार और उद्यमशीलता की भावना विकसित करने में सहायक हैं।
उन्होंने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बड़ी संख्या में महिलाएं गृह उद्योग, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और छोटे व्यवसायों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने विभागीय स्तर पर शिक्षकों से विद्यार्थियों के साथ नियमित ब्रेनस्टॉर्मिंग गतिविधियां आयोजित करने पर जोर दिया, ताकि उनमें नए विचारों, समस्या-समाधान और उद्यमिता की सोच विकसित हो सके।
कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति की ओर से मुख्य वक्ता को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। डॉ. माधवी डेनियल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो. शालिनी अग्रवाल, प्रो. शूरा दारापुरी, डॉ. प्रियंका शंकर सहित अन्य शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।