Thursday, October 18, 2018
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सरकार को गुमराह करते अधिकारी

देश या प्रदेश सभी सरकारों को अधिकारी गुमराह तो कर ही रहे हैं, साथ ही आमजन का दर्द अनदेखा कर सीएम व पीएम के सपनों को पलीता लगा रहे हैं। इसकी पुष्टि उत्तर प्रदेश में की जा सकती है। देश के पीएम ने देश की जनता की समस्याओं को सुनने व उनका निस्तारण करने के लिए पोर्टल चालू किया जिससे कि लोग अपनी शिकायतों को आॅन लाइन दर्ज करवा सकें और उनका निस्तारण उन्हें घर बैठे प्राप्त हो जाये लेकिन यह कटु सत्य है कि आम जन की ज्यादातर शिकायतों का निस्तारण गुणवत्तापरक नहीं किया जा रहा है। कमोवेश यहीं हाल उत्तर प्रदेश के सीएम पोर्टल/आईजीआरएस पोर्टल का है जिसमें आम जन शिकायतें तो खूब दर्ज करवा रहे और अपनी समस्या का निस्तारण होने का इन्तजार करते रहते हैं। लेकिन आमजन को निराशा उस समय हांथ लगती है जब उसकी शिकायत का निस्तारण करने के नाम पर जांच करने वाला अधिकारी खाना पूर्ति कर अपनी जादुई कलम से उच्चाधिकारियों को गुमराह कर देते हैं और भ्रष्टाचारियों को बचा रहे हैं। यही हाल लगभग हर विभाग का है। वहीं खास बात यह भी है कि जिस अधिकारी की शिकायत की जाती है, जांच भी उसी अधिकारी को सौंपी जाती है जिससे साफ जाहिर होता है कि शिकायत कर्ता की समस्या को तो नजरअन्दाज किया ही जा रहा है साथ ही सरकार को भी गुमराह किया जा रहा है। आॅन लाइन शिकायतों का गुणवत्तापरक हल ना होना जहां एक ओर आम आदमी को निराश तो कर ही रहा है साथ ही दूसरी ओर सरकारों के प्रति नाराजगी भी आमजन के मन में बढ़ाने का कार्य भी स्थानीय अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। शिकायतों के निस्तारण सम्बन्धी आख्याओं को देख कर यह कहना कदापि अनुचित नहीं है कि जांच करने के नाम पर सरकार को गुमराह किया जा रहा है। रही सरकारी आंकड़ों की बात तो जन समस्याओं को निस्तारित करने के सम्बन्ध में प्रस्तुत आंकड़े सही नहीं कहे जा सकते हैं क्योंकि जब निस्तारण में घपला किया गया हो तो आंकड़ों को सही कैसे कहा जा सकता है।