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खर्राटे का आना किसी भी व्यक्ति के लिए जान लेवा साबित हो सकते

वार्ता के दौरान जानकारी देते डा0 निशान्त सक्सेना

कानपुर नगर, स्वप्निल तिवारी। भारतीय परिवेश में खर्राटों को आम समझा जाता है और खर्राटा भरने वाले व्यक्ति का मजाक बनाया जाता है। लेकिन खर्राटा आने का कारण नाक और मुंह के पिछले भाग में वायु मार्ग का आंशिक रूपा से अवरूद्ध होना होता है। यह बात एक वार्ता के दौरान ईएनटी विशेषज्ञ डा0 निशान्त सक्सेना ने कही।
डा0 निशान्त ने बताय कि खर्राटे की बीमारी को आब्स्ट्रिकल स्लीप एप्नीया कहते है ओर खर्राटे के कारण उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हार्ट अटैक, बौथ्द्धक विकास, अवसाद, नपुसंकता, पक्षाघात जैेसे रोग भी हो सकते है। कहा चिडचिडापन होना, राम में कई बार नींद टूटना, बैठे-बैठे सो जाना, सुबह उठने पर सिर दर्द एवं शरीर में भारीपन होना एप्नीया के मरीज के लक्षण है। बताया नाक व मुंह अवरूद्ध होने पर पार जाने के प्रयास वाली हवा द्वारा आवाज उत्पन्न हेाती है। आज 45 प्रतिशत से अधिक वयस्क खर्राटे लेते है। जिसमें 25 प्रतिश्ज्ञत वयस्क निरन्तर खर्राटे लेते है। कहा चिकित्सक द्वारा पूर्ण निरीक्षण के बाद खर्राटों के उपचार में यह पहला कदम है जिसमें गले की बनावट की जांच कर नई चिकित्सा पद्धति कोब्लेशन के द्वारा एक सरल व त्वरित प्रक्रिया के साथ खर्राओं को नियंत्रित किया जा सकता है। इस तकनीक में मामूली रेडियोफ्रीक्वेंसी उजा्र और प्राकृतिक सलाइन का उपयोग कर नर्म तालू के ऊतक को निकालकर उसे सिकोड दिया जाता है, जिससे शीघ्र स्वास्थ्यलाभ होता है। डाक्टरों द्वारा पेटेंट की गयी कोब्लेशन द्वारा आॅपरेशन हो चुके है। बताया मरीज खर्राटे लेने की गंभीरता का मूल्यांकन कानपुर में आभा हास्पिटल व स्वरूप नगर स्थित क्लीनिक में उपलब्ध है और यह कानपुर में खर्राटो के लिए पहली चिकित्सा पद्धति है।