
बतातें चले कि इस साल कोरोना महामारी को देखते हुए सरकार ने कोविड गाइड लाइन के तहत मोहर्रम मनाने की इजाज़त दी थी।मजलिस के दौरान मौलाना ने बताया कि इमाम हुसैन कर्बला में इस्लाम और इंसानियत को बचाने के लिए भूखे प्यासे शहीद हो गए थे लेकिन उन्होंने ज़ुल्म के आगे अपना सर नही झुकाया।कर्बला में इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में हम मोहर्रम मनाते है।मौलाना ने जब इमाम हुसैन के मसाएब बताए तो वहां माहौल ग़मज़दा हो गया और लोग रोने लगे।इसके अलावा हैदर अली और डॉ.आमिर रिज़वी ने “शब्बीर का मातम होगा सदा,ज़ंजीर का मातम होगा सदा”ये इब्ने अली का मातम है,औलादे नबी का मातम है” नोहे पर बच्चे बूढ़े और जवानों ने जंजीर का मातम किया।नौहे के बाद अजादारों की या हुसैन या अलविदा की सदाये बुलंद होती रहीं।मातम के बाद ताज़िया अपने ख़दीमी रास्तो से होते हुए कर्बला की ओर चल दिये छोटे इमामबाड़े का ताजिया मटरवा चौराहे के पास कोल्ड स्टोर के पीछे कर्बला में दफन किया गया वहीं बड़े इमामबाड़े का ताजिया गेवडे मैदान के पास कर्बला में दफन किया गया।
इस बीच प्रशासन की तरफ से जनपद में हर जगह सुरक्षा व्ववस्था चाक चौबंद रही ।सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा।चौकी प्रभारी पंकज राज शरद अपने पुलिस बल के साथ जगह जगह पर निगरानी करते रहे।इसके अलावा राजस्व विभाग से कानून गो आदित्य कुमार मौर्य और लेखपाल मुकेश कुमार भी ताज़िया दफन होने तक साथ रहे।इस मौके पर अंजुमन के सेक्रेटरी इतरत नक़वी,सभासद शम्सी रिज़वी, हैदर अली,राशिद नक़वी,बाबर हादी,आरिफ मेहदी,परवेज़,तालिब अब्बास ,मो. हैदर वसी रज़ा,पूर्व सभासद शोफ़ी रिज़वी,सभासद हसन ग़ुलाम कासिम खान,नाहीद सलमानी,इसके अलावा काफी संख्या में लोग मौजूद रहे और अंत मे सेक्रेटरी इतरत नक़वी और सभासद एड्वोकेट शम्सी रिज़वी ने प्रशासन व जुलूस में आए हुए तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया।