Tuesday, June 16, 2026
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लेख/विचार

कौन जिम्मेदार है बढ़ते साम्प्रदायिक उन्माद के लिए: डॉ.दीपकुमार शुक्ल

बीते दिनों दो नेताओं के विवादित बयान से कानपुर में भड़का साम्प्रदायिक उन्माद बड़े दंगे का रूप ले सकता था, यदि पुलिस ने समय रहते उस पर नियन्त्रण न पा लिया होता| देश के भीतर तो स्थिति पर काबू पा लिया गया परन्तु विभिन्न मुस्लिम देशों की प्रतिक्रिया ने भारत को असहज करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है| खाड़ी देशों में खुलेआम चल रही भारत विरोधी मुहीम थमने का नाम नहीं ले रही है| यहाँ तक कि यह मामला संयुक्त राष्ट्र तक जा पहुंचा है| ऐसे में सवाल उठता है कि इस परिस्थिति से आखिर निपटा कैसे जायेगा? क्या भाजपा द्वारा अपने दोनों प्रवक्ताओं के खिलाफ उठाया गया कदम नाकाफी है? क्या यह परिस्थिति अचानक उत्पन्न हुई है? क्या इसके पीछे सिर्फ भाजपा प्रवक्ताओं के बयान ही मूल कारण हैं? या फिर साम्प्रदायिक राजनीति से दो वर्गों के बीच बनती टकराव की पृष्ठभूमि का यह एक ट्रेलर है?

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कितनी ओर फाइलें

कश्मीर फाइल्स देखी तो दिल को बहुत ठेस पहुंची थी। जो अत्याचार अपने ही वतन में हुआ वह 1947 से कम भयावह नहीं था। वह जो वक्त था कि बयान करने से नहीं बनता।कितनी ही दर्दनाक चीखे जो उस वक्त सुनी थी वह आज भी हवाओं में गूंज रही हैं अगर कोई सुनने वाला हो तो! अगर सुनाई दे तो समझो वह अपने लिये एक वार्निंग हैं।पार्टीशन होने की मुख्य दो वजहें गिनी जायेगी,धर्म और राजनीति। आम नागरिकों का उसने कोई मतलब नहीं दिखाई देता।सिर्फ धर्म के नाम पर राजनैतिक फैसलों को अंजाम दिया गया था।लेकिन न ही धर्म के ठेकेदारों का कोई जान माल का नुकसान हुआ और न ही राजनैतिग्यों का,जो कुछ सहन किया वह आम नागरिकों ने ही किया हैं।

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वाह रे गुरुर!!!

गुरुर में रहोगे तो रास्ते भी ना देख पाओगे – मंजिल पाना तो बहुत दूर की बात है!!

लक्ष्यों की सफ़लता में गुरुर सबसे बड़ा बाधक!! नम्रता, सहयोग, इमानदारी लक्षित मंजिलों तक पहुंचाने की चाबी – एड किशन भावनानी

गोंदिया – कुदरत ने इस खूबसूरत सृष्टि में मानव काया की अनमोल रचना कर उसे कुशाग्र बुद्धि क्षमता के रूप में अनमोल अस्त्र सौंपा है! तो गुरूर, अभिमान, अहंकार, अकड़, अहंवाद, गुमान, नखरो जैसी अनेक विशुद्धयां भी डाली है, ताकि मानवीय जीवन यात्रा में अच्छे काबिल और उचित लोग उस उचित स्थान याने मंजिल तक पहुंच सके और सारी मानवता का कल्याण कर अच्छाई से अपनी जीवन यात्रा पूर्ण कर वापस वैकुंठ धाम में प्रवास करेंl साथियों हमने अपने बड़े बुजुर्गों से सुने हैं कि जिस मानव के पास लक्ष्मी मां प्रवास करती है तो उसे पद, प्रतिष्ठा देकर उसकी परीक्षा लेती है, जिसमें विकारों से लेकर उपरोक्त विशुद्घियां और नम्रता, सहयोग, इमानदारी जैसी शुद्घियों का घेरा डालती है!! फिर मानव का कार्य है कि अपनी बुद्धि के बल पर विशुद्धियों और शुद्धियों का चुनाव करें स्वाभाविक ही है, कुशाग्र बुद्धि का व्यक्ति शुद्धियों को और बाकी लोग विशुद्धियों को चुनेंगे जिसके कारण लक्ष्मी मां वहां से प्रस्थान कर ती है यह महत्वपूर्ण बात संपूर्ण मानव जाति के लिए रेखांकित करने योग्य बात है। इन उपरोक्त पैरा में बताए गए शब्दों को हम गुरूर में परिभाषित कर सकते हैं, यही लक्ष्यों की सफलताओं में सबसे बड़ा बाधक है इसलिए हर व्यक्ति को चाहिए कि नम्रता, सहयोग, ईमानदारी सहित सभी शुद्धि सूचक शब्दों को अपनाकर लक्षित मंजिलों तक पहुंचकर अपना खुद का, समाज, जिला, राज्य और राष्ट्रीय का भला कर सकते हैं

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15 मई – परिवारों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस:टूट रहे परिवार हैं, बदल रहे मनभाव ;प्रेम जताते ग़ैर से, अपनों से अलगाव 

(भौतिकवादी युग में एक-दूसरे की सुख-सुविधाओं की प्रतिस्पर्धा ने मन के रिश्तों को झुलसा दिया है. कच्चे से पक्के होते घरों की ऊँची दीवारों ने आपसी वार्तालाप को लुप्त कर दिया है. पत्थर होते हर आंगन में फ़ूट-कलह का नंगा नाच हो रहा है. आपसी मतभेदों ने गहरे मन भेद कर दिए है. बड़े-बुजुर्गों की अच्छी शिक्षाओं के अभाव में घरों में छोटे रिश्तों को ताक पर रखकर निर्णय लेने लगे है. फलस्वरूप आज परिजन ही अपनों को काटने पर तुले है. एक तरफ सुख में पडोसी हलवा चाट रहें है तो दुःख अकेले भोगने पड़ रहें है. हमें ये सोचना -समझना होगा कि अगर हम सार्थक जीवन जीना चाहते है तो हमें परिवार की महत्ता समझनी होगी और आपसी तकरारों को छोड़कर परिवार के साथ खड़ा होना होगा तभी हम बच पायंगे और ये समाज रहने लायक होगा.)

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आखिर क्यों गहरा रहा है देश में बिजली का संकट?

भीषण गर्मी के बीच बिजली की तेजी से बढ़ती मांग के कारण देश के कई राज्यों में बिजली की कमी का संकट गहरा रहा है। बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की खपत तेजी से बढ़ी है और इसी कारण कुछ राज्यों के बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक घट रहा है। दरअसल गर्मी के कारण कई बिजली कम्पनियों में बिजली की मांग में वृद्धि हुई है और जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, बिजली की मांग में भी उसी तेजी से वृद्धि हो रही है। कोरोना लॉकडाउन के बाद बड़ी मुश्किल से पटरी पर लौट रही औद्योगिक गतिविधियों के कारण उद्योगों में भी बिजली की खपत बढ़ी है, इससे भी बिजली की मांग बढ़ रही है लेकिन मांग के अनुरूप पावर प्लांटों में कोयले का स्टॉक नहीं है। कोयले की कमी के संकट को लेकर कोल इंडिया स्वीकार चुकी है कि गर्मी शुरू होने के साथ ही देश के बिजली संयंत्रों में कोयला भंडार नौ साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि संघीय दिशा-निर्देशों के अनुसार बिजली संयंत्रों में कम से कम 24 दिनों का कोयला स्टॉक होना चाहिए।
आंकड़े देखें तो महाराष्ट्र में करीब 28 हजार मेगावाट बिजली की मांग है, जो गत वर्ष के मुकाबले 4 हजार मेगावाट ज्यादा है। उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना इत्यादि राज्य भी इस समय कोयले की किल्लत से जूझ रहे हैं, जिस कारण कुछ राज्यों में कुछ पावर प्लांटों में तो बिजली उत्पादन ठप्प हो गया है तोे कुछ प्लांटों में बिजली उत्पादन अपेक्षाकृत कम हो पा रहा है। केन्द्रीय बिजली प्राधिकरण (सीईए) के मुताबिक देश में 173 बिजली संयंत्रों में से 155 गैर-पिथेड बिजली संयंत्र हैं, जहां पास में कोई कोयला खदान नहीं है और इनमें औसतन कोयले का करीब 28 फीसदी स्टॉक है जबकि कोयला खदानों के पास स्थित 18 पिथेड संयंत्रों का औसत स्टॉक सामान्य मांग का 81 फीसदी है। पिछले साल अक्तूबर माह में भी बिजली की मांग करीब एक फीसदी बढ़ जाने के कारण कोयला संकट के चलते बिजली संकट गहराया था और तब यह भी स्पष्ट हुआ था कि बिजली संयंत्रों को कोयले की वांछित आपूर्ति नही होने के अलावा कई नीतिगत खामियां भी बिजली संकट का प्रमुख कारण हैं।

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“माँ की महिमा”

जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य से सर्जन हुई उस माँ की शान में क्या लिखूँ, लिखने को बहुत कुछ है पर आज बस इतना ही लिखूँ कि, लिखी है मेरी माँ ने अपनी ममता की स्याही से मेरी तकदीर, रात-रात भर जाग कर मेरी ख़ातिरदारी में अपनी नींद गंवाई है कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं”
“माँ को दिल में जगह न दो ना सही पड़ी रहने दो घर के एक कोने में पर वृध्धाश्रम की ठोकरें मत खिलाओ माँ की जगह वहाँ नहीं” कैसे कोई अपनी जनेता के साथ ऐसा व्यवहार कर सकता है, जिसकी कोख में नौ महीने रेंगते बूँद में से तीन चार किलो का पिंड बना हो, जिनके खून का एक-एक कतरा पीकर पला बड़ा हो उस माँ को वृद्धाश्रम की ठोकर खाने के लिए छोड़ते कलेजे पर करवत नहीं चलती होगी?

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‘‘माँ ही पहली शिक्षिका, पहला स्कूल”

यह एक सर्वविदित तथ्य है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चे के लिए ये सबसे अच्छी उम्र होती है, क्योंकि वह इस उम्र में सबसे ज़्यादा सीखता है। एक बच्चा पांच साल से कम उम्र के घर पर ज़्यादातर समय बिताता है और इसलिए वह घर पर जो देखता है, उससे बहुत कुछ सीखता है। छत्रपति शिवाजी को उनकी माँ ने बचपन में नायकों की कई कहानियां सुनाईं और वो बड़े होकर कई लोगों के लिए नायक बने।

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नीली चिड़िया देगी सोने के अंडे ?

ट्विटर के कमर्शियल/सरकारी यूजर्स पर थोड़ी सी फ़ीस की संभावना, जबकि कैजुअल यूजर्स के लिए फ्री!!
ट्विटर प्लेटफार्म की कुछ सेवाओं को पेड सेवाएं करना, अपना प्रभुत्व बढ़ाना, अभिव्यक्ति की आजादी, एडिट बटन ऑप्शन जोड़ना इत्यादि रणनीतिक रोडमैप पर काम की संभावना – एड किशन भावनानी
वैश्विक स्तर पर एक मजबूत डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी कंपनियों में से एक ट्विटर को दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी व्यक्ति द्वारा खरीदना और कमर्शियल/सरकारी यूजर्स पर थोड़ी सी फ़ीस की संभावना नए मालिक द्वारा दिनांक 4 मई 2022 को अपने ट्विटर हैंडल से व्यक्त की है जबकि कैजुअल यूजर्स के लिए फ्री की बात टि्वट कर दुनिया में चर्चा का विषय बना दिया है जिसके बारे में हर मीडिया प्लेटफॉर्म, टीवी चैनलों पर चर्चाएं चल रही है।

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भारत का लक्ष्य समृद्धि और शांति

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद लगाए, पीएम के यूरोप दौरे पर पूरी दुनिया की नजरें हैं – भारत पर वैश्विक विश्वास बढ़ा
पीएम का तीन दिवसीय यूरोप दौरा मज़बूत रिश्तो, बेहतर कारोबारी संबंध, डिफेंस डील सहित समृद्धि और शांति की गाथा साबित होगी – एड किशन भावनानी
गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत में हो रही विकास की गाथाओं, गतिविधियों, अद्भुत प्रौद्योगिकी विकास, 75 वें अमृत महोत्सव की गाथा, नई शिक्षा नीति, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी विदेश नीति और अभी 2 से 5 मई तक तीन दिवसीय पीएम की महत्वपूर्ण यूरोप यात्रा पर पूरी दुनिया की नजरें लगी हुई है!! जो हर भारतीय के लिए गौरवविंत क्षण है!! आज समय आ गया है कि हम अपने देश को वैश्विक नेतृत्व की पूरी गुणवत्ता से परिपूर्ण देश माने!!

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बाबा, बुलडोजर और वो… 

⇒चिंतन: बुलडोजर बाबा की रफ़्तार रोकने में रोड़ा बनेगा राजस्व विभाग 
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बार – बार अधिकारियों को नसीहत व बुल्डोजर बाबा का सक्रियता से अपराधियों व बाहुबलियों पर बुलडोजर का चलाना एक अच्छी पहल व कर्मठता सिद्ध करता है लेकिन राजस्व कर्मियों का रोड़ा बनना कहीं न कहीं बाबा की कार्ययोजना पर पानी सा फेरना भी समझ आता है। साफ जाहिर है कि प्रत्येक तहसील प्रशासन व क्षेत्रीय लेखपाल से लेकर कानूनगो व कानूनगो से लेकर तहसीलदार एवं तहसीलदार से लेकर उपजिलाधिकारी तक सभी को पता है कि किस क्षेत्र में किस – किस सरकारी जमीन पर किस – किस बाहुबली या सामान्य व्यक्ति ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है लेकिन इतना सब जानकारी होने के बाद भी स्वतः संज्ञान लेकर कार्यवाही न किया जाना आखिकार किसका दोष है? वैसे हिस्ट्रीशीटर व हाई प्रोफाइल दोषियों पर प्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिलाधिकारी के माध्यम से बुलडोजर चलना कोई बड़ी बात नहीं, बड़ी बात तो तब होगी जब तहसील स्तर पर प्रशासनिक अमले द्वारा बिना भेदभाव व बिना लेनदेन सरकारी संपत्ति को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया जाए। प्रत्येक तहसील स्तर पर सरकारी भूमि में बंजर, ऊसर, नवीन परती, गौचर, आबादी, ग्राम समाज, तालाब, वन विभाग सहित अन्य मदों की जमीन का होना स्वाभाविक व आम बात है और इस प्रकार की आरक्षित भूमियों पर कहीं न कहीं और किसी न किसी का कब्जा होना भी स्वाभाविक है लेकिन लेखपाल स्तर से कानूनगो स्तर तक या इससे भी ऊपर के स्तर कर खाऊ कमाऊ नीति के चलते लेनदेन कर प्रशासन द्वारा अतिक्रमणकारियों को वरदान देना भी आम बात है।

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