Thursday, August 13, 2026
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मानक पूरे न करने पर यूपी के 184 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से बाहर

लखनऊ। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता से समझौता करने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई की गई है। प्रदेश के 184 निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना से डी-इम्पैनल कर दिया गया है। अब इन अस्पतालों में योजना के तहत मरीजों को कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिलेगी। नए मानकों के अनुरूप कराए गए सत्यापन के दौरान अस्पतालों की व्यवस्थाओं और दस्तावेजों की जांच की गई। भारत सरकार की ओर से आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए सुरक्षा और गुणवत्ता संबंधी मानकों को सख्त किए जाने के बाद प्रदेश के संबद्ध अस्पतालों का विस्तृत सत्यापन कराया गया। इस दौरान अस्पतालों से फायर एनओसी, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट समेत अन्य अनिवार्य मानकों को पूरा करने और संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा गया था।

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि अस्पतालों को मानकों की पूर्ति के लिए मार्च से लगातार अवसर और सूचनाएं दी जा रही थीं। इसके बावजूद कई अस्पतालों ने निर्धारित समय में जरूरी शर्तें पूरी नहीं कीं। विशेष रूप से फायर एनओसी जैसे मरीजों की सुरक्षा से सीधे जुड़े मानकों में कमी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की गई। इसके बाद 184 अस्पतालों को योजना से बाहर कर दिया गया। डिप्टी सीएम ने कहा कि डी-इम्पैनलमेंट का उद्देश्य अस्पतालों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित करना है। आयुष्मान योजना में वही अस्पताल जुड़े रहेंगे, जो निर्धारित सभी मानकों और सुरक्षा नियमों का पालन करेंगे। उन्होंने बताया कि डी-इम्पैनल किए गए अस्पतालों के लिए दोबारा योजना से जुड़ने का रास्ता खुला रहेगा। यदि संबंधित अस्पताल भविष्य में सभी अनिवार्य शर्तें पूरी कर लेते हैं और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करा देते हैं तो वे नियमानुसार दोबारा इम्पैनलमेंट के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनके आवेदन और अस्पताल की व्यवस्थाओं का सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का स्पष्ट संदेश है कि आयुष्मान योजना में मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों में किसी तरह का समझौता करने वाले अस्पतालों को योजना में शामिल नहीं रखा जाएगा।