Sunday, August 16, 2026
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मकतब फैज़ान-ए-सिद्दीक़ में मनाया गया यौमे-आज़ादी का पर्व

♦ तलबा व तालिबात ने बेहतरीन अन्दाज़ में अपने प्रोग्राम पेश किए

कानपुर। यौमे-आज़ादी के मौक़े पर शहर कानपुर के मशरिक़ी इलाक़े में वाक़े मकतब फैज़ान-ए-सिद्दीक़ पिपौरी में एक पुरवकार, बामक़सद और शानदार तक़रीब का इनश्इक़ाद किया गया। तक़रीब की सदारत कारी अनीस अहमद साबरी ने की, जबकि मकतब के निगराँ हाफ़िज़ हसीन अहमद की ज़ेर-ए-निगरानी प्रोग्राम का इनश्इक़ाद अमल में आया।
तक़रीब में बतौर-ए-ख़ास मेहमान-ए-ख़ुसूसी मास्टर साजिद साहब, प्रिंसिपल ग्रीनवुड स्कूल ने शिरकत की, जबकि मौलाना उस्मान साहब ने भी ख़ुसूसी खिताब किया।
प्रोग्राम का आग़ाज़ तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से हुआ। इसके बाद मकतब के तलबा व तालिबात ने यौमे-आज़ादी के हवाले से मुख़्तलिफ़ प्रोग्राम पेश किए। बच्चों ने तक़ारीर, नात और दीगर तालीमी व इस्लाही प्रोग्रामों के ज़रिए अपनी सलाहियतों का भरपूर मुज़ाहिरा किया। तलबा व तालिबात की पुरजोश और उम्दा पेशकशों को हाज़िरीन ने ख़ूब सराहा और उनकी हौसला-अफ़ज़ाई की।
इस मौक़े पर मेहमान-ए-ख़ुसूसी मास्टर साजिद साहब ने खिताब करते हुए कहा कि आज़ादी अल्लाह तआला की एक अज़ीम नेमत है और हमें इस नेमत की क़द्र करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुल्क की आज़ादी के लिए हमारे बुज़ुर्गों ने बेशुमार क़ुर्बानियाँ पेश की हैं, इसलिए नई नस्ल को आज़ादी की तारीख़ और क़ुर्बानियों से वाकिफ़ कराना हमारी ज़िम्मेदारी है। उन्होंने तलबा व तालिबात पर ज़ोर दिया कि वे मेहनत और लगन के साथ तालीम हासिल करें, अपने वालिदैन व असातिज़ा का एहतराम करें और मुल्क व क़ौम की ख़िदमत के लिए ख़ुद को तैयार करें।
मौलाना उस्मान साहब ने अपने खिताब में यौमे-आज़ादी की अहमियत और हमारी क़ौमी व समाजी ज़िम्मेदारियों पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि आज़ादी सिर्फ़ जश्न मनाने का नाम नहीं, बल्कि यह हमें अपनी ज़िम्मेदारियों का एहसास भी दिलाती है। हमें मुल्क में अम्न, भाईचारे, मोहब्बत और इत्तिहाद को फ़रोग़ देना चाहिए और एक ज़िम्मेदार शहरी की हैसियत से अपने फ़राइज़ अंजाम देने चाहिए। उन्होंने कहा कि नई नस्ल की दीनी व अख़लाक़ी तरबियत के साथ उन्हें मुआशरे के लिए मुफ़ीद और ज़िम्मेदार फ़र्द बनाना वक़्त की अहम ज़रूरत है।
मौलाना उस्मान साहब ने तलबा व तालिबात की हौसला-अफ़ज़ाई करते हुए कहा कि मकतब और तालीमी इदारे बच्चों की तालीम व तरबियत में बुनियादी किरदार अदा करते हैं। अगर बच्चों को इल्म के साथ अच्छे अख़लाक़, हुस्न-ए-किरदार, नज़्म व ज़ब्त, वालिदैन व असातिज़ा का अदब और खिदमत-ए-ख़ल्क़ का जज़्बा दिया जाए तो वे मुस्तक़बिल में मुल्क व मिल्लत के लिए क़ीमती सरमाया साबित हो सकते हैं।
मकतब के निगराँ हाफ़िज़ हुसैन अहमद ने तक़रीब के अग़राज़ व मक़ासिद पर रोशनी डालते हुए कहा कि ऐसे प्रोग्रामों के ज़रिए तलबा व तालिबात में ख़ुद-एतिमादी, सलाहियतों के इज़हार और क़ौमी व समाजी शऊर को फ़रोग़ मिलता है। उन्होंने तक़रीब में शिरकत करने वाले तमाम मेहमानान, असातिज़ा, सरपरस्तान और शुर्का का शुक्रिया अदा किया।
तक़रीब में मौजूद उलमा-ए-किराम ने भी अपने ख़यालात का इज़हार किया और तलबा व तालिबात की कारकर्दगी को सराहा।
तक़रीब में तलबा व तालिबात के साथ उनके सरपरस्तान, मकतब के असातिज़ा और इलाक़े के मुअज़्ज़िज़ीन ने भी शिरकत की। प्रोग्राम के दौरान बच्चों की पुरजोश शिरकत ने तक़रीब को मज़ीद यादगार बना दिया।
आखि़र में मुल्क की सलामती, अम्न व अमान, तरक़्क़ी व ख़ुशहाली, बाहमी इत्तिहाद व इत्तिफ़ाक़ और मुल्क व मिल्लत की सरबुलंदी के लिए ख़ुसूसी दुआ की गई। यौमे-आज़ादी के मौक़े पर मकतब फैज़ान-ए-सिद्दीक़ पिपौरी में मुनश्अक़िद होने वाली यह तक़रीब न सिर्फ़ तलबा व तालिबात के लिए अपनी सलाहियतों के इज़हार का बेहतरीन मौक़ा साबित हुई, बल्कि आज़ादी की क़द्र, क़ौमी ज़िम्मेदारी और अच्छे किरदार की अहमियत को भी उजागर करने का ज़रिया बनी।
निज़ामत के फ़राइज़ कारी सरफ़राज़ अहमद जामई ने अंजाम दिए। इस मौक़े पर मौलाना अहमद फ़राज़ नदवी, मौलाना मुहम्मद यूसुफ़ नदवी, मौलाना मुहम्मद मुस्तक़ीम साकिबी, मौलाना मुहम्मद सुहैल वग़ैरह ने बतौर-ए-ख़ास शिरकत फ़रमाई।