Tuesday, September 8, 2026
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धोखे का जवाब धैर्य से दें, वाणी में रखें संयम : निर्भय सागर

फिरोजाबाद। जीवन में सुख-दुःख का चक्र प्राकृतिक है। रात के बाद दिन और शाम के बाद सुबह आती है। उसी प्रकार बुरे समय के बाद अच्छा समय भी अवश्य आता है। इसलिए मनुष्य को निराश होने के बजाय भगवान पर विश्वास रखते हुए निरंतर पुरुषार्थ करते रहना चाहिए। यह विचार आचार्य निर्भय सागर महाराज ने छदामी लाल जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि धोखा देने वाले से कभी बदला नहीं लेना चाहिए, बल्कि धैर्य रखना ही सच्चा विवेक है। दूसरों की कड़वी बातों को उसी प्रकार सहन कर लेना चाहिए, जैसे कड़वी दवा को निगलकर पचा लिया जाता है। आचार्यश्री ने कहा कि कांच पत्थर से और पत्थर घन से टूटता है, लेकिन इंसान का दिल और रिश्ते कटु वाणी से टूट जाते हैं। इसलिए वाणी पर संयम रखना बेहद आवश्यक है।

उन्होंने मौन को आत्मशांति का साधन और मुनि का शक्तिशाली शस्त्र बताया। आचार्यश्री ने कहा कि दूसरों पर उंगली उठाने वाला दुर्जन कहलाता है, जबकि गिरते हुए व्यक्ति को उठाने के लिए हाथ बढ़ाने वाला सज्जन कहलाता है। बुराई का जवाब भी भलाई से देना ही अच्छे व्यक्ति का धर्म है। मीडिया प्रभारी अजय जैन बजाज ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन प्रातः साढ़े आठ बजे मंगल प्रवचन और सायं साढ़े छह बजे शंका-समाधान का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसके अलावा प्रत्येक शनिवार और रविवार को विशेष ‘संत की अदालत’ कार्यक्रम भी आयोजित होता है।