Thursday, September 10, 2026
Breaking News
Home » मुख्य समाचार » सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों के पुनर्नियोजन की आयु सीमा 70 वर्ष हुई

सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों के पुनर्नियोजन की आयु सीमा 70 वर्ष हुई

500 निःसंवर्गीय पदों पर होगी नियुक्ति, नियमित भर्ती होने तक मिलती रहेंगी विशेषज्ञ सेवाएं 

लखनऊ। प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों के पुनर्नियोजन की अधिकतम आयु सीमा 65 से बढ़ाकर 70 वर्ष करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस फैसले से चिकित्सालयों में नियमित नियुक्तियां होने तक अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं ली जा सकेंगी। उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश में बढ़ती आबादी के साथ अस्पतालों की ओपीडी और भर्ती मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुनर्नियोजन की व्यवस्था से आमजन को बेहतर और समयबद्ध चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष के अनुसार, पीएमएचएस संवर्ग से सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों को 70 वर्ष की आयु तक पुनर्नियोजित किया जा सकेगा। वहीं, एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद 65 वर्ष की आयु तक पुनर्नियोजन की मौजूदा व्यवस्था यथावत रहेगी। सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त विशेषज्ञ और एमबीबीएस चिकित्सकों को भी निर्धारित प्रावधानों के तहत पुनर्नियोजित किया जा सकेगा। सरकार के मुताबिक विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए 500 निःसंवर्गीय पद स्वीकृत किए जाएंगे। इन पदों पर नियुक्ति वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से अनुबंध के आधार पर होगी। पदों का जनपदवार निर्धारण महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की संस्तुति के आधार पर शासन द्वारा प्रत्येक वर्ष किया जाएगा। किसी भी स्थिति में पुनर्नियोजन के पदों की संख्या 500 से अधिक नहीं होगी। पुनर्नियोजन नियमित चिकित्साधिकारियों की नियुक्ति होने अथवा एक वर्ष की अवधि पूरी होने तक रहेगा। इनमें जो भी पहले होगा, उसी के आधार पर अवधि समाप्त होगी। इसके बाद चिकित्सक के कार्य, आचरण, स्वास्थ्य और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर पुनर्नियोजन की अवधि वर्ष-दर-वर्ष बढ़ाई जा सकेगी, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 70 वर्ष की आयु तक होगी।

पुनर्नियोजित विशेषज्ञ चिकित्सकों को प्रशासनिक पद नहीं दिया जाएगा। वे ‘कंसल्टेंट’ अथवा ‘परामर्शी’ के रूप में कार्य करेंगे। अस्पताल की जरूरत के अनुसार उन्हें आपातकालीन और आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं में भी ड्यूटी करनी होगी। सरकार ने पुनर्नियोजित चिकित्सकों पर प्राइवेट प्रैक्टिस को पूरी तरह प्रतिबंधित किया है। उन्हें अस्पताल में सरकारी व्यवस्था के तहत उपलब्ध दवाओं को ही मरीजों के लिए संस्तुत करना होगा। प्राइवेट प्रैक्टिस या निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करने पर पुनर्नियोजन तत्काल समाप्त किया जा सकेगा। नियमित विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति होने के बाद संबंधित निःसंवर्गीय पद स्वतः समाप्त हो जाएंगे। सरकार का कहना है कि नियमित भर्ती के साथ अनुभवी सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं का उपयोग करने से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।