Sunday, September 20, 2026
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थाली में धीमा जहर

बचपन में कभी जल्दी होटल वगैरा जाना नहीं होता था, जरूरत भी नहीं पड़ती थी और ना ही उस तरह का माहौल घर में था। जो भी इच्छा हुई खाने की, वो घर पर ही बन जाता था और जब भी चाट, समोसे, पानी पुरी, खस्ता, कचौड़ी वगैरा खाने की इच्छा होती थी तो दौड़ पड़ते थे चाट की दुकानों पर और अगर कभी बीमार हुए तो सबसे पहले हमारी अरहर की दाल बंद कर दी जाती थी और मूंग दाल खाने की सलाह दी जाती थी क्योंकि वो पचने में आसान होती थी। जो सब्जी बनी है, वही सब लोग खाएंगे, किसी भी व्यक्ति के लिए अलग से कोई भी चीज नहीं बनती थी। गर्मी के आते ही आमपना या मौसमी फल मिलने लगते थे, सर्दियों में ठंड की मिठाइयां बनती थीं, जैसे मेथी के लड्डू, तिल की मिठाई वगैरा। पता नहीं वह दौर कौन सा था कि चीजें मिलावटी नहीं मिलती थीं। दूध, पनीर, खोया, सब्जियां, फल वगैरा मिलावट वाले नहीं मिलते थे और इन पर केमिकल का उपयोग भी नहीं होता था। ज्यादा हेल्दी दिखाने की या यूं कहिए कि ज्यादा मुनाफे के लिए सेहत से सौदा नहीं किया जाता था और शायद कैंसर जैसी बीमारी के इतने मामले भी नहीं हुआ करते थे।

आज वक्त ऐसा आ गया है कि खाने की कोई भी चीज खरीदें तो सबसे पहले ध्यान में यही बात आती है कि चीज असली है क्या? केमिकल वाला तो नहीं है? यदि सामने वाला व्यक्ति बोल रहा है कि चीज सही है तो क्या गारंटी है कि चीज सही ही है? मापने-परखने का क्या तरीका है और क्या आमतौर पर सब लोग माप पाते हैं? फिर चीजें भी तो सस्ती नहीं होतीं। कैंसर का नाम सुनते ही मन में एक भय व्याप्त हो जाता है। एक वक्त था जब दूध में पानी मिलाने पर ही बड़ा हो-हल्ला हो जाता था, लेकिन आज कहते हैं कि भले ही पानी मिला रहा है, लेकिन यूरिया, डिटर्जेंट तो नहीं मिला रहा है। मतलब डर हर व्यक्ति की मानसिकता पर प्रहार कर रहा है।

FSSAI ने हाल ही में बहुत सी 6 बड़ी कंपनियों को भ्रामक दावों, गलत लेबलिंग और खुद को अनधिकृत रूप से “एनर्जी ड्रिंक” लिखने के कारण सख्त नोटिस जारी किया है। दूध से जुड़ी चीज, पनीर, दही, छाछ, फ्लेवर्ड मिल्क, आइसक्रीम, ऐसी बहुत सी चीजों पर जो नकली है, वो बैन हो गई है।

ऐसी बहुत सी चीजें जो हम-आप बिना सोचे-समझे खाए जा रहे हैं, जिसके एवज में हम ना जाने कौन सी बीमारी को न्योता दे रहे हैं। भारत में हर साल कैंसर के लगभग 14 लाख नए केस आते हैं। FSSAI ने 115 प्रोडक्ट्स पर रोक लगाई है। किंडर जॉय, स्टिंग, रेड बुल इन सब में ज्यादा रंग, केमिकल और गलत लेबल की वजह से बंद कर दिया गया है। यूं तो पान, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू और शराब के सेवन से कैंसर होता है, लेकिन बाजार जब इन नकली जहरीली चीजों से भरा पड़ा हो तो जनसामान्य कितना भी सचेत हो, कहां बच पाता है? और कहां-कहां वह समझौता करेगा? FSSAI की यह पहल बहुत काबिलेतारीफ है और एक भरोसा भी है कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ नहीं होगा। FSSAI का यह कदम इस लड़ाई का पहला कदम है।

भिंडी, बैंगन, पत्तागोभी, अंगूर और मिर्च में सबसे ज्यादा कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, जो कि धोने से पूरी तरह नहीं जाता है। खतरा आजकल सिर्फ जंक फूड से ही नहीं है, बल्कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली सब्जियों और फलों से भी है। इनमें रंग और चमक लाने के लिए Malachite Green नामक केमिकल का इस्तेमाल होता है। साथ ही फलों को चमकदार बनाने के लिए मोम (वैक्स) का इस्तेमाल करते हैं। तरबूज को लाल बनाने के लिए Erythrosine और हल्दी में Metanil Yellow नामक केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह आम, केला को भी Carbide से पकाते हैं, जबकि सभी इस बात से वाकिफ हैं, लेकिन यह जानकारी ज्यादातर लोगों को नहीं पता है कि Carbide में पकी हुई चीजें लीवर पर असर करती हैं, हार्मोनल प्रॉब्लम, आंत और पेट का कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।

यदि थोड़ी सी सावधानी बरती जाए तो हम काफी हद तक अपने परिवार और खुद को बचा सकते हैं। यदि सब्जियां ज्यादा चमकदार हैं तो छिलका उतार लेना चाहिए। सब्जियों को नमक के पानी में एक घंटा भिगोकर रखना चाहिए और फिर इस्तेमाल में लिया जाना चाहिए। बाहर के स्नैक्स कम से कम इस्तेमाल करने चाहिए। मौसमी फल और सब्जियां ली जाएं तो ज्यादा बेहतर रहेगा, जबकि जैविक बाजार यानी ऑर्गेनिक मंडी से ली जाएं तो ज्यादा बेहतर होगा। हम पैकेट पर एक्सपायरी डेट तो देखते हैं, लेकिन पैकेट के अंदर का केमिकल नहीं देखते हैं। “कैंसर का इलाज महंगा है, लेकिन परहेज सस्ता है।” अगर हम पैकेट पर केवल एक्सपायरी डेट देखने के बजाय उसके पीछे लिखे रसायनों को भी पढ़ना शुरू कर दें तो जागरूक उपभोक्ता बनकर हम खुद को और अपने परिवार को 30% से 40% तक इन बीमारियों से बचा सकते हैं।

महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे का काम वाकई प्रशंसनीय है। 100 दिनों में 12,083 से ज्यादा रेड की। 603 लाइसेंस सस्पेंड किए गए, 875 गिरफ्तारियां की गईं, 665 पर एफआईआर की गई, 35 करोड़ से अधिक की नकली चीजें जब्त की गईं और जांच में कॉकरोच, गंदा पानी, बिना ढका कच्चा चिकन, गलत कोल्ड स्टोरेज मिला है। 10 टन नकली पनीर, 5000 किलो मिलावटी खोया पकड़ा गया। गलत लेबल वाला तेल, सिंथेटिक रंग और मिलावटी दूध पकड़ा गया। 11 फूड फैक्ट्री पर छापा मारा गया, 20.48 लाख का माल जब्त किया गया। 28,955 किलो आलू वेफर, फराली चिवड़ा, भाकरवड़ी, शेजवान स्टिक, बेसन, पाम ऑयल जब्त किए गए। लाखों लोगों का फेवरेट पतंजलि पर भी भ्रामक विज्ञापन के आरोप में 51.41 लाख की दवाएं जब्त की गईं। दृष्टि आई ड्रॉप, गिलोय घनवटी, कुटज घनवटी, सिस्टो ग्रिट, न्यूरो ग्रिट गोल्ड, मधु ग्रिट, मेमोरी ग्रिट इन सब दवाइयों पर पाबंदी लगाई गई है। यह इस लड़ाई का पहला सराहनीय कदम है।

  • प्रियंका वर्मा माहेश्वरी, गुजरात