रायबरेली। एम्स रायबरेली के बाल रोग विभाग की ओर से 18 सितंबर को ‘बच्चों की एंडोक्राइन बीमारियों में रोजमर्रा के चिकित्सकीय निर्णय’ विषय पर पहला सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य रेजिडेंट डॉक्टरों और बाल रोग विशेषज्ञों के बीच बच्चों में एंडोक्राइन बीमारियों की पहचान और उपचार से संबंधित व्यावहारिक चिकित्सकीय जानकारी एवं निर्णय क्षमता को मजबूत करना रहा। सीएमई में बच्चों में होने वाली प्रमुख एंडोक्राइन बीमारियों पर चर्चा की गई। इनमें शारीरिक विकास में असामान्यताएं, यौवन संबंधी समस्याएं, थायरॉयड रोग और बचपन में होने वाला मधुमेह शामिल रहा। विशेषज्ञों ने बीमारी की शुरुआती पहचान, उचित जांच और समय पर उपचार के महत्व पर जोर दिया।
कार्यक्रम में एम्स रायबरेली की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिता जैन ने सहभागिता की और संबोधित किया। उन्होंने चिकित्सकीय ज्ञान को आगे बढ़ाने तथा साक्ष्य आधारित चिकित्सा पद्धति को मजबूत करने में ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्यकर्मियों की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए नियमित विकास की निगरानी, बीमारी की शुरुआती पहचान और समय पर उपचार को महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर वरिष्ठ शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों में डीन (अनुसंधान) प्रो. अर्चना वर्मा, डीन (परीक्षा) प्रो. डॉ. प्रगति गर्ग, उप निदेशक (प्रशासन) कर्नल अखिलेश सिंह और वित्तीय सलाहकार कर्नल उपेंद्र नाथ राय मौजूद रहे। प्रख्यात बाल एंडोक्राइन विशेषज्ञ एवं इंडियन सोसाइटी फॉर पीडियाट्रिक एंड एडोलसेंट एंडोक्रिनोलॉजी (ISPAE) के अध्यक्ष डॉ. अनुराग बाजपेयी ने मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने बाल एंडोक्राइन रोगों से जुड़े रोजमर्रा के चिकित्सकीय निर्णयों के व्यावहारिक पहलुओं पर जानकारी साझा की।
UP AOP के प्रेसिडेंट-इलेक्ट डॉ. अजय श्रीवास्तव ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने इस शैक्षणिक पहल की सराहना की और प्रो. डॉ. अमिता जैन के नेतृत्व में एम्स रायबरेली में हो रहे विकास का उल्लेख किया। सीएमई में KGMU लखनऊ, MLN मेडिकल कॉलेज प्रयागराज, RML लखनऊ, SGPGI लखनऊ, KSSCI लखनऊ और एम्स मदुरै सहित विभिन्न प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ एवं फैकल्टी सदस्य शामिल हुए। विशेषज्ञों की भागीदारी से चिकित्सकों को जटिल मामलों पर चर्चा करने, अनुभव साझा करने और बाल एंडोक्राइनोलॉजी में आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। कार्यक्रम का आयोजन बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय के मार्गदर्शन में बाल रोग विभाग की एडिशनल प्रोफेसर एवं पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी यूनिट की प्रभारी डॉ. नमिता मिश्रा ने किया। इसमें बाल रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजकुमार की भी सहभागिता रही। आयोजकों के प्रयासों से कार्यक्रम में चिकित्सकीय ज्ञान के आदान-प्रदान और पेशेवर विकास के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध हुआ।
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