➤ बड़ौत की धरती से निकली शिक्षा की धारा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बनाई विशिष्ट पहचान
बागपत। उत्तर प्रदेश में बागपत के बड़ौत नगर स्थित जनता वैदिक कॉलेज आज केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि जनसहयोग, सामाजिक जागृति, ग्रामीण समाज की सामूहिक चेतना और शिक्षा के प्रति समर्पण का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। 20 अक्टूबर 1917 को एक छोटे से वैदिक हाईस्कूल के रूप में शुरू हुई यह संस्था आज अपनी गौरवशाली यात्रा के शताब्दी वर्ष एवं हीरक जयंती के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी ऐतिहासिक विरासत को स्मरण कर रही है। यह अवसर संस्था के विकास में योगदान देने वाले उन असंख्य लोगों और किसान परिवारों को याद करने का भी है, जिनके त्याग और सहयोग से इसकी नींव मजबूत हुई।
किसान परिवारों के सामूहिक सहयोग से रखी गई नींव
जनता वैदिक कॉलेज के पूर्व प्राचार्य एवं प्रोफेसर, कृषि अर्थशास्त्र डॉ. अरुण सोलंकी के अनुसार, जनता वैदिक कॉलेज का इतिहास किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि की कहानी नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के असंख्य किसान परिवारों के सामूहिक त्याग, श्रम, सहयोग और संकल्प की गाथा है। दूरदर्शी शिक्षाविद् चौधरी दलीप सिंह ने विद्यालय की स्थापना के लिए अपनी भूमि दान की। इसके बाद विद्यालय के विकास और भवन निर्माण की जिम्मेदारी पूरे समाज ने सामूहिक रूप से उठाई। उस समय संसाधन सीमित थे, लेकिन शिक्षा के प्रति समाज की आस्था अत्यंत मजबूत थी। क्षेत्र के किसान परिवारों ने अपनी गाढ़ी कमाई का हिस्सा शिक्षा के लिए समर्पित किया। किसी ने आर्थिक सहयोग दिया, किसी ने अन्नदान किया तो किसी ने श्रमदान के माध्यम से योगदान दिया। इसी सामूहिक सहयोग ने एक छोटे से विद्यालय को धीरे-धीरे एक विशाल शैक्षणिक संस्था का स्वरूप प्रदान किया। यही वजह है कि आज संस्था के नाम में शामिल ‘जनता’ शब्द केवल एक नाम नहीं, बल्कि इसकी मूल सामाजिक भावना और जनभागीदारी का प्रतीक बन गया।
1920 में पंजीकरण, 1956 में मिला पूर्ण स्नातक महाविद्यालय का दर्जा
पूर्व प्राचार्य एवं प्रोफेसर, कृषि अर्थशास्त्र डॉ. अरुण सोलंकी ने बताया, वर्ष 1920 में संस्था को पंजीकृत संस्था का दर्जा मिला। इसके बाद विकास की यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रही। वर्ष 1956 में इसे पूर्ण स्नातक महाविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ। वर्तमान में यह चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से संबद्ध है और कला, विज्ञान तथा विशेष रूप से कृषि शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाए हुए है। कॉलेज में स्नातक स्तर पर 12 विषयों तथा स्नातकोत्तर स्तर पर 17 विषयों में शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त 15 विभिन्न विषयों में पीएचडी शोध कार्य संचालित हो रहे हैं। बदलते समय की शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पारंपरिक पाठ्यक्रमों के साथ बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री जैसे आधुनिक एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को भी स्थान दिया गया है।
शिक्षा के साथ खेल, एनसीसी और शोध को भी महत्व
पूर्व प्राचार्य डॉ. अरुण सोलंकी की मानें तो जनता वैदिक कॉलेज ने शिक्षा को केवल कक्षा और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए खेलकूद, एनसीसी, शोध, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी गतिविधियों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। कॉलेज का एनसीसी विंग वर्ष 1961 से संचालित है। यह विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्र सेवा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। कॉलेज में वाई-फाई, INFLIBNET तथा आधुनिक प्रयोगशालाओं जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। इस प्रकार संस्था ने अपनी ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक शिक्षा की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को निरंतर विकसित किया है।
शताब्दी वर्ष एवं हीरक जयंती पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन
शताब्दी वर्ष एवं हीरक जयंती के अवसर पर कॉलेज परिसर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर परिसर में अमर बलिदानी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा का अनावरण किया गया। यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों के लिए देशभक्ति, साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा का केंद्र बनने की परिकल्पना के साथ स्थापित की गई है। इसी अवसर पर भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जीवन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनके योगदान पर विशेष विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें आगरा के पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह के अंतर्गत अखिल भारतीय ओपन कबड्डी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें देश के आठ विश्वविद्यालयों की टीमों ने भाग लेकर अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कई पीढ़ियों ने देश-विदेश में बनाई पहचान
जनता वैदिक कॉलेज के पूर्व विद्यार्थियों ने विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर संस्था का गौरव बढ़ाया। अपनी एक सदी से अधिक लंबी यात्रा में जनता वैदिक कॉलेज ने बागपत और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों के साथ-साथ देश के विभिन्न भागों से आने वाले विद्यार्थियों को भी शिक्षा का अवसर प्रदान किया है। संस्था से शिक्षा प्राप्त करने वाली अनेक पीढ़ियों ने प्रशासन, पुलिस सेवा, उच्च शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए कॉलेज का नाम रोशन किया है। कॉलेज की आधिकारिक पूर्व छात्र सूची में ऐसे अनेक विद्यार्थियों का उल्लेख मिलता है, जिन्होंने शिक्षा प्राप्त करने के बाद देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ-साथ विदेशों में भी महत्वपूर्ण दायित्व निभाए।
प्रशासन और सार्वजनिक जीवन में बढ़ाया कॉलेज का गौरव
प्रो. वेदप्रकाश ने जनता वैदिक कॉलेज में शिक्षा प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण शैक्षणिक दायित्वों से जुड़े। उनकी उपलब्धियों ने कॉलेज की शैक्षणिक परंपरा को गौरवान्वित किया। इसी प्रकार जनता वैदिक कॉलेज में शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में श्री सत्यपाल सिंह ने आगे चलकर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में स्थान बनाया और महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। उनके सार्वजनिक जीवन की उपलब्धियों ने संस्था का गौरव बढ़ाया। श्री करण सिंह ने भी जनता वैदिक कॉलेज से शिक्षा प्राप्त कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में स्थान बनाया और आगे चलकर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व पर कार्य किया। श्री सुरेश पाल सिंह ने भारतीय प्रशासनिक सेवा में अपनी सेवाएं देते हुए भारत सरकार में संयुक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य किया। वहीं श्री राहुल पाण्डेय और श्री संजीव पाण्डेय ने भारतीय वन सेवा (IFS) में पहुंचकर वन एवं पर्यावरण क्षेत्र में अपनी सेवाएं दीं। इन सभी पूर्व विद्यार्थियों की उपलब्धियां जनता वैदिक कॉलेज की प्रतिभाशाली शैक्षणिक परंपरा का परिचय देती हैं।
विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में भी चमके पूर्व विद्यार्थी
जनता वैदिक कॉलेज के विद्यार्थियों ने विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई। इस संस्था में शिक्षा प्राप्त कर डॉ. अंजू जैन और डॉ. देवेंद्र पाल सिंह ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) में वैज्ञानिक के रूप में कार्य करते हुए अनुसंधान के क्षेत्र में योगदान दिया। इसी प्रकार डॉ. एस.के. चौहान, डॉ. सेवा राम और डॉ. सुरेश पाल सिंह ने भी ICAR में वैज्ञानिक के रूप में कार्य कर अपने संस्थान का गौरव बढ़ाया। डॉ. पुष्पेंद्र कुमार ने जनता वैदिक कॉलेज से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए जी.बी. पंत विश्वविद्यालय, पंतनगर में प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसी क्रम में डॉ. ऋषिपाल सिंह तोमर ने वैज्ञानिक क्षेत्र में आगे बढ़कर नेशनल केमिकल लेबोरेटरी, पुणे के निदेशक जैसे महत्वपूर्ण दायित्व तक पहुंच बनाई। डॉ. संतोष सत्या ने भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली में प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। इन उपलब्धियों की श्रृंखला यह बताती है कि जनता वैदिक कॉलेज ने केवल सामान्य शिक्षा प्रदान करने तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि यहां से निकली प्रतिभाओं ने वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा और राष्ट्रीय संस्थानों में पहुंचकर अपनी क्षमता का परिचय दिया।
विदेशों में भी पहुंची जनता वैदिक कॉलेज की प्रतिभा
जनता वैदिक कॉलेज की शैक्षणिक विरासत की पहुंच भारत की सीमाओं तक भी दिखाई देती है। इस संस्था में शिक्षा प्राप्त कर प्रो. जगबीर सिंह ने अमेरिका की Temple University, Philadelphia में सांख्यिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अकादमिक दायित्व निभाया। प्रो. के.पी. सिंह ने भी जनता वैदिक कॉलेज से शिक्षा प्राप्त करने के बाद अमेरिका की University of North Texas, Texas में बायोस्टैटिस्टिक्स के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शैक्षणिक दायित्व संभाला। इसी प्रकार श्री विनय तोमर ने इसी कॉलेज से शिक्षा प्राप्त करने के बाद अमेरिका में IBM, Atlanta जैसी प्रतिष्ठित संस्था में Software Engineer के रूप में कार्य किया। श्री कृष्णपाल सिंह ने भी विदेश में Software Engineer के रूप में कार्य करते हुए अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। विदेशों में इन पूर्व विद्यार्थियों की उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि बड़ौत जैसे ग्रामीण परिवेश से निकली प्रतिभाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचकर भी अपनी पहचान बनाने में सफल रही हैं।
पूर्व विद्यार्थियों की उपलब्धियां ही संस्था की सबसे बड़ी विरासत
जनता वैदिक कॉलेज की उपलब्धि केवल उसकी विशाल इमारतों, पाठ्यक्रमों अथवा संस्थागत विस्तार में नहीं, बल्कि उन अनेक पीढ़ियों के विद्यार्थियों की उपलब्धियों में दिखाई देती है, जिन्हें इस संस्था ने शिक्षा और आगे बढ़ने का अवसर दिया। यहां से पढ़कर कोई प्रशासनिक सेवा में पहुंचा, किसी ने पुलिस एवं सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण दायित्व संभाला, किसी ने वैज्ञानिक अनुसंधान में योगदान दिया, किसी ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और किसी ने विदेशों में जाकर अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इन पूर्व विद्यार्थियों की उपलब्धियां जनता वैदिक कॉलेज के लिए केवल व्यक्तिगत सफलताओं की कहानी नहीं हैं, बल्कि उस सामाजिक और शैक्षणिक विरासत का परिणाम हैं, जिसे इस संस्था ने एक सदी से अधिक समय में तैयार किया है। यही वे उपलब्धियां हैं जो आने वाली पीढ़ियों के विद्यार्थियों को प्रेरणा देती हैं और जनता वैदिक कॉलेज की पहचान को और व्यापक बनाती हैं।
ग्रामीण समाज और किसान परिवारों की विरासत
जनता वैदिक कॉलेज की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में उसकी सामाजिक विरासत भी शामिल है। जिस ग्रामीण समाज से यह संस्था निकली, उसी समाज के सहयोग और विश्वास ने इसे निरंतर शक्ति प्रदान की। उन असंख्य किसान परिवारों का योगदान संस्था की नींव में समाहित है, जिन्होंने अपनी सीमित आय और संसाधनों के बावजूद शिक्षा के लिए सहयोग दिया। आज जब संस्था अपने विस्तार और उपलब्धियों के साथ एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र के रूप में स्थापित है, तब उन सभी पूर्वजों और परिवारों के योगदान को स्मरण करना उसकी ऐतिहासिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनकी दूरदृष्टि का परिणाम है कि क्षेत्र की अनेक पीढ़ियों को उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने जीवन को नई दिशा देने का अवसर मिला।
‘जनता’ की भावना संस्था की मूल पहचान
जनता वैदिक कॉलेज की वास्तविक शक्ति उसके नाम में निहित ‘जनता’ की भावना, उसके वैदिक आदर्शों, ग्रामीण समाज से उसके गहरे संबंध और शिक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता में देखी जा सकती है। यदि इन मूल भावनाओं को आधुनिक शिक्षा, उच्च स्तरीय शोध, तकनीकी ज्ञान और बदलती सामाजिक आवश्यकताओं के साथ जोड़ा जाता रहे, तो संस्था की भूमिका आने वाली पीढ़ियों के लिए और व्यापक हो सकती है। ज्ञान, शोध, संस्कार, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में संस्था की ऐतिहासिक भूमिका को आगे बढ़ाने की संभावनाएं बनी हुई हैं।
109 वर्षों की यात्रा में अतीत से भविष्य की ओर
जनता वैदिक कॉलेज की 109 वर्षों की यात्रा उस ग्रामीण समाज की सामूहिक शक्ति, त्याग और दूरदृष्टि की कहानी है, जिसने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया। यह यात्रा इस बात का उदाहरण प्रस्तुत करती है कि जब समाज किसी सकारात्मक उद्देश्य के लिए एकजुट होकर कार्य करता है, तो सीमित संसाधनों के बावजूद आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी और गौरवशाली विरासत का निर्माण किया जा सकता है। शताब्दी वर्ष एवं हीरक जयंती का यह अवसर केवल अतीत की गौरवशाली यात्रा को स्मरण करने का अवसर नहीं है, बल्कि संस्था की भविष्य की दिशा पर विचार करने का भी अवसर है। आधुनिक शिक्षा, शोध, तकनीकी ज्ञान और राष्ट्र निर्माण की नई संभावनाओं के साथ जनता वैदिक कॉलेज अपनी ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में नई भूमिका निभा सकता है।
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Jansaamna