Thursday, October 29, 2026
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गोवंश संरक्षण के लिए मंडी परिषद देगी 69.16 करोड़

⇒10 वर्षों में 15 गुना बढ़ा प्रावधान
⇒गोसेवा आयोग को 34.58 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी
⇒मंडियों की कुल आय का तीन प्रतिशत गोवंश संरक्षण पर होगा खर्च
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की कृषि मंडियों से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा निराश्रित गोवंश के संरक्षण और भरण-पोषण पर खर्च किया जा रहा है। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए 69.16 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इसमें से 34.58 करोड़ रुपये की पहली किस्त उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग को जारी कर दी गई है। बीते दस वर्षों में गोवंश संरक्षण के लिए मंडी परिषद का वार्षिक वित्तीय प्रावधान 15 गुने से अधिक बढ़ा है। वर्ष 2016-17 में इस मद में महज 4.51 करोड़ रुपये दिए गए थे।
मंडी परिषद मंडी शुल्क, सेस और अन्य मदों से प्राप्त कुल आय का तीन प्रतिशत गोसेवा आयोग को उपलब्ध कराती है। इस धनराशि का उपयोग पंजीकृत गोशालाओं में संरक्षित निराश्रित गोवंश के चारे, आश्रय, टीकाकरण, चिकित्सा और देखभाल संबंधी व्यवस्थाओं में किया जाता है। इस प्रकार कृषि उपज के विपणन से प्राप्त राजस्व गोवंश संरक्षण का भी आर्थिक आधार बन रहा है।
गोवंश संरक्षण के लिए वर्ष 2019 में गोसेवा आयोग को दिए जाने वाले अनुदान का प्रावधान दो प्रतिशत किया गया था। इसके बाद वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंडी परिषद के संचालक मंडल ने परिषद की कुल आय का तीन प्रतिशत गोसेवा आयोग को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। इसके तहत धनराशि दो किस्तों में जारी की जाती है। पहली किस्त में डेढ़ प्रतिशत राशि दी जाती है, जबकि शेष डेढ़ प्रतिशत पहली किस्त का उपयोगिता प्रमाणपत्र मिलने के बाद जारी किया जाता है।
मंडी परिषद की ओर से गोसेवा आयोग को दिए जाने वाले अनुदान में पिछले वर्षों के दौरान लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2019-20 में 31.69 करोड़ रुपये, 2023-24 में 45.66 करोड़ रुपये और 2024-25 में 51.50 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह राशि बढ़कर 59.14 करोड़ रुपये पहुंच गई।
गोवंश के भरण-पोषण के साथ गो-आश्रय स्थलों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर है। इसके अंतर्गत दूध, गोबर और कम्पोस्ट जैसे उत्पादों के विक्रय से अतिरिक्त आय अर्जित कर आश्रय स्थलों के संचालन में उपयोग करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे गोशालाओं के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हो सकेंगे।
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में निराश्रित गोवंश का संरक्षण एवं संवर्धन प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मंडी परिषद किसानों को बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए भी आर्थिक सहयोग दे रही है। इससे गोशालाओं में गोवंश के भरण-पोषण और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूती मिलेगी।