रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायबरेली में विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर न्यूरोलॉजी ओपीडी में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. अमिता जैन के मार्गदर्शन में न्यूरोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ब्रेन स्ट्रोक (लकवा/पक्षाघात) के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा इसकी रोकथाम, समय पर पहचान और त्वरित उपचार के महत्व के बारे में जानकारी देना था।
इस अवसर पर न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना वर्मा ने ब्रेन स्ट्रोक के कारणों, लक्षणों और समय पर उपचार के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक मृत्यु और दिव्यांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। यह एक गंभीर चिकित्सकीय स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति बाधित होने अथवा मस्तिष्क में रक्तस्राव होने के कारण मस्तिष्क की कोशिकाएं प्रभावित होने लगती हैं। उन्होंने बताया कि देश में हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति ब्रेन स्ट्रोक का शिकार होता है, जबकि हर 4 मिनट में एक व्यक्ति की इससे मृत्यु हो जाती है।
चेहरे का एक ओर झुकना, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने अथवा समझने में कठिनाई तथा अचानक देखने या चलने में परेशानी ब्रेन स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना चाहिए और चिकित्सा सहायता लेने में किसी भी प्रकार की देरी नहीं करनी चाहिए।
ब्रेन स्ट्रोक के उपचार में समय का विशेष महत्व है। कुछ उपयुक्त मरीजों में लक्षण शुरू होने के साढ़े चार घंटे के भीतर थक्का घोलने वाली दवा से उपचार किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, चिकित्सकीय जांच के आधार पर कुछ मरीजों में अन्य आधुनिक उपचार विकल्प भी उपलब्ध होते हैं। समय पर उपचार मिलने से मस्तिष्क को होने वाले नुकसान को कम करने और मरीज के स्वास्थ्य लाभ की संभावना बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
स्ट्रोक से बचाव के लिए उच्च रक्तचाप की नियमित निगरानी, मधुमेह पर नियंत्रण, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सामान्य बनाए रखने, हृदय संबंधी बीमारियों का समय पर उपचार कराने तथा नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाने की सलाह दी। उन्होंने तंबाकू से दूर रहने और शराब के सेवन से बचने पर भी जोर दिया।
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