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हाहाकार: पैसा पावर और जुगाड़

 

-आकांक्षा सक्सेना

हो, ब्यूटी, टैलेन्ट तो क्या हो बात
फिर जो बटरिंग कर जाये बेमिशाल….!
बस उसकी किस्मत उसका राज्य….
आज कलयुग की है यही डिमाण्ड….!
आँसुओं का भी हो रहा व्यापार
पाप की गठरी बस जिन्दाबाद….!
जनता शोषित बदहाल पड़ी
उनको तो बस वोट की पड़ी….!
भैंस भी लाठी बन गयी आज
न्याय-नैतिकता हुई गुमनाम
असत्य के साथ चार बाॅडीगार्ड….!
कोई नही सुनता फरियाद
गरीब की आस बस भगवान…..!
सब जानकर बनते अनजान
चारों तरफ आज हाहाकार…..!