Monday, September 24, 2018
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भारत रत्न बाबा साहब डा0 बीआर अम्बेडकर के विचार विषय पर आयोजित की संगोष्ठी

⇒डा0 बी.आर. अम्बेडकर ने दलितों के उत्थान के साथ पूरे समाज को खुशहाली समृद्धि का रास्ता दिखाया
⇒संगोष्ठी में आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को उच्च कोटि की मिली पुस्तकें
⇒डा0 अम्बेडकर किताबों के थे शौकीन, लंदन से जब पढ़कर वापस भारत लौटे तब 34 बक्सों में किताबे भरकर लाये भारत
कानपुर देहातः जन सामना ब्यूरो। बाबा साहब एक ऐसा नाम है जो 20 वीं सदी की पहचान बन गया है और जिससे 21वीं सदी की परिकल्पना की जा सकती है। बाबा साहब ने भारतीय संविधान के रूप में राष्ट्र को एक ऐसा मनोवांछित दस्तावेज दिया है जिससे देश का गौरव व सम्मान निरन्तर बढ़ रहा है। बाबा साहब की घटना कहानी को सुनाया, भीम के बचपन में स्कूल में एक अंग्रेज अधिकारी ने बच्चों से पूछा की तुम कौन सी ऐसी चीज है जो देख सकते हो पर छू नही सकते। तभी बच्चों ने कहा हम चांद देख सकते हैं पर छू नहीं सकते। ऐसा तमाम सभी बच्चों ने उत्तर दिया, जब अम्बेडकर से पूछा गया तो उन्होने बाहर रखे पानी के घड़ें को दिखा कर कहा कि वो घड़े को देख सकता है पर छू नही सकते। इस बात पर सुनकर अंग्रेज अधिकारी चैंक गया। बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के बचपन के संघर्षों के तमाम किस्सों को सुनाया गया, उददेश्य बाबा साहब का था मां जिसने जन्म दिया है वह चाहती थी कि भीम बड़ा होकर महान बनें तथा देश व समाज की सेवा करे। इस घटना का सुनाने का उद्देश्य यह है कि किसी भी प्रकार के अभावों में भी स्वयं को विचलित न करें और न ही अपने उद्देश्यों से भटकें। डा0 अम्बेडकर ने उन्होने कानून बनाकर शिक्षा सब के लिए लागू कराया, आज बाबा साहब की बदौलत सब पढ़ पा रहे है। अंध विश्वास, पाखंड, धार्मिक रूढ़ियों से दूर रहें, शिक्षित बनों संगठित बनो, संघर्ष करें बाबा साहब डा0 भीमराव अम्बेडकर के जीवन पाठ सहित देश के विश्व के महान पुरूषों, महात्मा गंाधी, शहीद भगत सिंह, डा0 राम मनोहर लोहिया, पं0 दीनदयाल उपाध्याय, जवाहर लाल नेहरू, वीर अब्दुल हमीद, इंदिरा गांधी, अब्राहम लिंकन, आदि को भी जाने, तथा उनकी शिक्षाओं पर चलें।
ये विचार बाढ़ापुर रोड स्थत सुपर मार्शल एकेडमी द्वारा आयोजित एक दिवसीय-शिक्षित बनो-संगठित बनो संघर्ष करों-भारत रत्न बाबा साहब डा0 बीआर अम्बेडकर विचार विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी के अवसर पर छात्र छात्राओं सहित विशेषज्ञ द्वारा व्यक्त किये गये। सहायक निदेशक सूचना प्रमोद कुमार ने आयोजित संगोष्ठी व बाबा साहब अम्बेडकर की मनायी जा रही जयंती के अवसर पर केक काटा तथा बाबा साहब अम्बेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रृद्धासुमन अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माता व संविधान शिल्पी भारत रत्न डा0 बीआर अम्बेडकर के मूलमंत्र शिक्षित बनो संगठित बनो संघर्ष कर तथा रचनात्मक सकारात्मक कार्यो से व्यक्ति अपना संर्वागीण विकास कर समाज व देश को उन्नति समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ा सकता है। भारतीय संविधान के जनक, आधुनिक राष्ट्र निर्माता, पीड़ित मानवता के मसीहा, भारतरत्न बाबा साहब डा0 भीमराव अम्बेडकर, सिंबल आॅफ नाॅलेज व चैम्पियन आॅफ सोशल जस्टिस के भी रूप में जाने जाते हैं। मेहनत व लगन से पढ़ना व अपने कार्य को करना व संगठित रहते हुए बाबासाहब के मूल मन्त्र को समझें व अन्य लोगों को समझाएं। उस पर आचरण व अमल में लाकर अच्छा नागरिक बनकर समाज व देश को उन्नति के पथ पर ले जाकर राष्ट्रीय एकता, अखण्डता व भाईचारे को मजबूत करें तथा राष्ट्र को सशक्त करें यही बाबासाहब डा0 भीमराव रामजी अम्बेडकर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। बाबा साहब के प्रति सच्ची श्ऱद्धांजलि जब है जब हम समाज मे राष्ट्र की उन्नति के लिए निरन्तर सोंचे तथा सकारात्मक व रचनात्मक कार्य को जीवन में अधिक तरजीह दें। बाबा साहब ने पर्यन्त समाज के उत्थान के लिए कार्य किया। पूरा भारतवासी उनका जीवन पर्यन्त ऋणी रहेगा। प्रगतिशील किसान व समाजसेवी रामगोपाल कुशवाहा व विजय बहादुर सिंह ने बाबा साहब को महामानव बताते हुए कहा कि बाबा साहब डा0 अम्बेडकर ने दलितों, कमजोर वर्गो, पिछड़ों, पीड़ितों, महिलाओं को विकास की मुख्य धारा से जोड़ा है। वे एक ऐसे युगपुरूष थे जिन्होंने एक दबे कुचले हुए राष्ट्र में नयी चेतना का संचार किया उसे अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाया आहत सभ्यता को नयी पहचान दी। आईएएस सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे मेधावी छात्र एवं छात्राओं को संगोष्ठी व बाबा साहब डा0 भीमराव अम्बेडकर की 127 वीं जयन्ती के अवसर व सहायक निदेशक सूचना अपनी माता स्मृतिशेष गायत्री देवी के स्मृति में आगे की पढ़ाई हेतु जनपद के चार आईएएस परीक्षा प्रतिभागी दीपक, प्रिया, सत्येन्द्र, शीतल प्रत्येक को सिविल सेवा परीक्षा से संबंधित उच्च कोटि की पुस्तकें प्रोत्साहन प्रेरणादायक स्वरूप पुस्तकें, विश्व, भारत, उत्तर प्रदेश का नक्शा, एनसीआरटी की पुस्तकें, बाबा साहब डा0 अम्बेडकर का चित्र व उनका जीवन परिचय लेख आदि भी स्वयं तथा संस्था के छात्र-छात्राओं को डिम्पल, दिव्या, विजय, चाइना आदि के माध्यम से दिलाया गया। संस्था के अध्यक्ष शीतल पाल व सचिव साजिद ने कहा कि संगोष्ठी व बाबा साहब की 127वी जंयती समारोह का आयोजन करने का उद्देश्य छात्र छात्राओं को उच्च लक्ष्य के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ही बाबा साहब के सिद्धान्तों का समाज में व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए समाजिक बुराईयों, नशा व अन्य समाजविरोधी कार्यों से दूर रहने की जानकारी देनी है। डा0 अम्बेडकर को किताबों का बड़ा शौक था, अमेरिका में अध्ययन के दौरान दो हजार किताबें खरीद कर भारत लाये, लंदन से जब पढ़कर वापस लौटे तब 34 बक्सों में किताबे भरकर भारत लाये। उस समय पं0 मदन मोहन मालवीय जी ने काशी विश्व विद्यालय (बीएचयू) के लिए के लिए दो लाख रूपये उस समय वर्तमान में करोड़ों रूपया इनकी किताबों को खरीदने के लिए बाबा साहब अम्बेडकर से अनुरोध किया था। परन्तु उन्होनें मना कर दिया, यह है उनकी महानता, वि़द्वता और पुस्तक प्रेम की गाथा, अतः सभी ग्राम वासी बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए किताबे खरीदने व शिक्षा ग्रहण करने में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतें। आयोजित कार्यक्रम में अम्बेडकर विचारगोष्ठी, सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि की भी आकर्षक प्रस्तुति हुई। प्रदेश सरकार की लाभपरक योजनाएं सबका साथ सबका विकास, एक साल नई मिसाल, सरकार की उपलब्धियां आदि की भी जानकारी उपस्थितजनों को दी गयी।