लड़कियों की शादी की उम्र अठाराह से इक्कीस कर दी गई ये सरकार की ओर से लिया गया एक बहुत ही सराहनीय और अहम् फैसला है। अब लड़के और लड़की दोनों की शादी की उम्र इक्कीस की हो जाएगी। संसद सभ्य जया जेटली की अध्यक्षता में टास्क फोर्स ने पिछले दिसम्बर ही ये निवेदन रख दिया था, जिसे मोदी सरकार ने हरी झंडी देने का फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले से बहुत सारी लड़कियों का जीवन संवर जाएगा और लड़कियों की ज़िंदगी में बहुत ही सकारात्मक परिवर्तन आएंगे। एक तो कच्ची उम्र में शादी होने से लड़कियां माँ भी बहुत जल्दी बन जाती है, जिस कारण बच्चें कमज़ोर पैदा होते है। अभी खुद माँ ही बच्ची होती है, न शारीरिक विकास होता है न बौधिक उपर से बच्चे की ज़िम्मेदारी। शारीरिक और मानसिक विकास के लिए 20/21 साल सही होते है।आज सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए लड़कीयों को पैरों पर खड़ी करना आवश्यक हो गया है, उसके लिए पढ़ाई और हाथ में डिग्री अनिवार्य है। कल को लड़की के जीवन में कोई भी मुश्किल आए तो वह किसीके उपर निर्भर नहीं होनी चाहिए, इसके लिए पढ़ाई बहुत जरूरी है ताकि अपना निर्वाह खुद कर सकें। अब लड़कियों को पढ़ाई के लिए समय मिलेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई-कई परिवारों में तो बच्ची के अठारह साल पूरे होने का ही इंतज़ार होता है, अठारह वर्ष की हुई नहीं की शादी करवा देते है। और कई बार प्यार-व्यार के चक्कर में पड़ कर लड़कियां भी इसी फ़िराक में होती है कच्ची बुद्धि होने की वजह से भविष्य के बारे में सोचती नहीं और ऐसे वैसे लड़कों के साथ अठारह साल पूरे होते ही घर से भाग कर शादी कर लेती है, फिर पछताती है। बीस इक्कीस साल तक सोच भी परिपक्व हो जाती है और अपना अच्छा-बुरा समझने जितनी समझ आ जाती है। पर अब इस कानून को थोड़ा सख़्त बनाने की भी जरूरत है, क्यूँकि कई-कई जगह तो बालविवाह कानून की ऐसी-तैसी करते अठारह साल से पहले ही लड़कियों की शादी करवा दी जाती है जो बहुत ही गलत है।वैसे आजकल की पढ़ी लिखी लड़कियां करियर ऑरिएंटेड हो गई है, तो जब तक खुद पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो जाती तब तक शादी के बारे में नहीं सोचती। पर पिछड़े वर्ग में ये समझ आनी बाकी है।पिछले कई सालों में लड़कियों के शारीरिक विकास में एक बदलाव पाया गया है। हाइपोथेलाम, पिच्ट्यूटरी और ऑवरी के जल्दी विकास की वजह से लड़की बारह साल की होते ही माहवारी शुरू हो जाती है और शरीर के अंग विकसित होने लगते है, जिसके चलते विपरित सेक्स के प्रति आकर्षण भी जल्दी पनपने लगता है। पिरीयड़ प्रेग्नेंसी और सेक्स का कच्चा ज्ञान लड़कियों को कई बार मुश्किल में ड़ाल देता है। अठारह साल की उम्र कुछ बातों को समझने के लिए बहुत कम होती है, इसलिए अब शादी के लिए तय की गई उम्र इक्कीस साल सही है।ये उम्र लड़कियों को हर फैसला लेने में सहायक होगी। इक्कीसवें साल में शादी होगी तो बच्चे भी तेईस से पच्चीस साल के आसपास होंगे, तो परिवार नियोजन कैसे करना है, बच्चे कब पैदा करने है, बच्चों की परवरिश कैसे करनी है इन सारी चीज़ों की समझ आ जाती है। साथ में अब उन लड़कियों का जीवन संवर जाएगा जो सच में पढ़ लिखकर कुछ बनना चाहती है पर परिवार वालों की मर्ज़ी मानते जबरदस्ती शादी के बंधन में बंध जाना पड़ता है उनको इस फैसले से राहत मिलेगी। कुल मिलाकर लड़कीयों के हक में लिया गया ये फैसला महिला सशक्तिकरण में एक सशक्त भूमिका निभाएगा।
भावना ठाकर ‘भावु’ (बेंगुलूरु, कर्नाटक)