राजीव रंजन नाग: नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे मामले में दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने यमुना विहार निवासी मोहम्मद इलियास द्वारा दायर याचिका के जवाब में दिया। ताजा फैसले के बाद कपिल मिश्रा को इस्तीफा देना पड़ सकता है।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश की गई सामग्री से यह स्पष्ट होता है कि मिश्रा संबंधित क्षेत्र में मौजूद थे और ‘सभी चीजें इस बात की पुष्टि कर रही थीं।’ मोहम्मद इलियास ने दिसंबर 2024 में अदालत का रुख किया था और दंगों में मिश्रा तथा छह अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की थी। साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
मार्च 2025 में दिल्ली पुलिस ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि भाजपा नेता की भूमिका की पहले ही जांच हो चुकी है और कोई संगीन आरोप सामने नहीं आए थे। कपिल मिश्रा इस समय भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार में कानून और न्याय मंत्री हैं।
अपनी याचिका में मोहम्मद इलियास ने कपिल मिश्रा, मुस्तफाबाद के विधायक और डिप्टी स्पीकर मोहन सिंह बिष्ट, तत्कालीन डीसीपी (उत्तर-पूर्व), दयालपुर पुलिस स्टेशन के तत्कालीन एसएचओ और पूर्व भाजपा विधायक जगदीश प्रधान पर दंगों में उनकी कथित संलिप्तता का आरोप लगाया था। इलियास ने दावा किया था कि उन्होंने 23 फरवरी 2020 को मिश्रा और अन्य लोगों को कर्दमपुरी में एक सड़क को जाम करते और रेहड़ी-पटरी वालों के ठेले को नष्ट करते देखा था। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व डीसीपी और कुछ अन्य अधिकारी मिश्रा के साथ खड़े थे, जब वह सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों को धमका रहे थे। याचिका में यह भी कहा गया था कि उन्होंने दयालपुर के पूर्व एसएचओ और अन्य लोगों को उत्तर-पूर्वी दिल्ली की मस्जिदों में तोड़फोड़ करते देखा था।
दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद, गुलफिशा फातिमा और शरजील इमाम सहित कई छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं को दंगों के सह-साजिशकर्ता के रूप में नामित किया है। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग द्वारा गठित 10 सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने कहा था कि दिल्ली दंगों में हिंसा ‘सुनियोजित और लक्षित’ थी और इसके लिए कपिल मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया था।
रिपोर्ट में कहा गया था कि ’23 फरवरी, 2020 को मौजपुर में कपिल मिश्रा के भाषण के लगभग तुरंत बाद विभिन्न इलाकों में हिंसा शुरू हो गई थी।’ अपने भाषण में उन्होंने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद में प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक हटाने का खुले तौर पर आह्वान किया था।
मिश्रा का भड़काऊ भाषण
दिल्ली में दंगा भड़कने से एक दिन पहले 23 फरवरी को कपिल मिश्रा ने एक वीडियो ट्वीट किया था, जिसमें वह मौजपुर ट्रैफिक सिग्नल के पास सीएए के समर्थन में जुड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए नजर आ रहे थे। इस दौरान उनके साथ उत्तर-पूर्वी दिल्ली के डीसीपी वेदप्रकाश सूर्या भी खड़े थे। मिश्रा ने कहा था, “वे (प्रदर्शनकारी) दिल्ली में तनाव पैदा करना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने सड़कें बंद कर दी हैं। इसलिए उन्होंने यहां दंगे जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। हमने कोई पथराव नहीं किया। हमारे सामने डीसीपी खड़े हैं और आपकी तरफ से मैं उन्हें यह बताना चाहता हूं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत में रहने तक हम इलाके को शांतिपूर्वक छोड़ रहे हैं। अगर तब तक सड़कें खाली नहीं हुईं तो हम आपकी (पुलिस) भी नहीं सुनेंगे। हमें सड़कों पर उतरना पड़ेगा।”