पारिवारिक, सामाजिक, व्यवसायिक, राजनीतिक सहित अनेक क्षेत्रों के संबंध में बंद मुट्ठी लाख़ की खुल गई तो ख़ाक की कहावत सटीक
भारतीय संस्कृति में बड़े बुजुर्गों की कहावतों की व्यवहारिक सटीकता, हमारे दैनिक जीवन में प्रमाणित होती है – एड किशन भावनानी
गोंदिया – वैश्विक सृष्टि की रचना जब अलौकिक शक्तियों से अलंकृत शक्ति ने की होगी तो, उसके अंश भारत पर विशेष कृपा, रहमत बरसाई होगी!! और अद्भुत संस्कारों, सभ्यता, मान सम्मान से ऐसी कौशलताओं की महक कर कृपादृष्टि बरसाई होगी कि भारत माता की मिट्टी में अद्भुत गुण समाहित हो गए और यहां जन्म लेने वाले हर जीव की देह में समाहित होकर बौद्धिक कौशलता से उपयुक्त गुणों की ज्योति पीढ़ी दर पीढ़ी जगाते रहते हैं जो, पीढ़ियों से हमारे बड़े बुजुर्गों को मिली और उसी वैचारिकता का हम लाभ उठा रहे हैं।
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Jansaamna
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय देश में बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों को निर्धारित करने वाले नियम जारी करता हैं। इन नियमों में उपभोक्ताओं को विश्वसनीय सेवाएं और गुणवत्तापूर्ण बिजली सुनिश्चित करने के लिए प्रावधान है। बिजली एक समवर्ती सूची (सातवीं अनुसूची) का विषय है और केंद्र सरकार के पास इस पर कानून बनाने का अधिकार और शक्ति है। ये नियम उपभोक्ताओं को उन अधिकारों के साथ “सशक्त” बनाने का काम करते हैं जो उन्हें गुणवत्ता, विश्वसनीय बिजली की निरंतर आपूर्ति तक पहुंचने की अनुमति देते हैं।सशक्त उपभोक्ता के लिए चुनौती और मुद्दे देखे तो कई राज्य विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे बिजली उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति प्रदान करने में सक्षम नहीं हैं। चौबीसों घंटे आपूर्ति की गारंटी और प्रावधान केवल दांवों में है। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों को लगभग 20 घंटे और शहरी क्षेत्र में 24 घंटे ग्रामीण और शहरी आपूर्ति के बीच भेदभाव है। बिजली मीटर से संबंधित नियम कहते हैं कि अलग-अलग राज्यों में शिकायत मिलने के 30 दिनों के भीतर खराब मीटरों की जांच की जानी चाहिए। उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम नियम कहते हैं कि मौजूदा कानूनों और विनियमों के अनुसार बिजली कंपनियों के खिलाफ शिकायतों के समाधान के लिए गठित फोरम का नेतृत्व कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए। लेकिन यह अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होता है।
क्या एक दिन पर्याप्त होगा किसीकी मेहनत और पसीने की कीमत चुकाने के लिए? नहीं पर साल में एक दिन सम्मानित करने से मजदूरों को हिम्मत और हौसला जरूर मिलता है। लगता है की हाँ हम भी इंसान है हमारे काम को भी सराहना मिल रही है।
गतिहीन और तनावपूर्ण जीवनशैली के साथ अस्वस्थ्यकर भोजन की आदतें गैर संक्रमणकारी रोगों की संख्या में बढ़ोतरी कर रहे हैं
भारत के किसी हिस्से में पहली बार कार्बन न्यूट्रल पंचायत होगी, सारे रिकॉर्ड डिजिटल होंगे! पीएम द्वारा एक क्लिक के जरिये देश की अच्छी पंचायतों को अवॉर्ड मनी भी वितरित की जाएगी
हरियाली को देखकर सबका मन प्रसन्न होता है यह सबके मन को भाती है, सकारात्मक ऊर्जा देती है और शुद्ध ऑक्सीजन देकर पर्यावरण को भी शुद्ध और संतुलित रखती है। इतना ही नहीं वास्तुदोष निवारण, बीमारियों को ठीक करने में एवं उत्तम स्वास्थ्य संरक्षण में वृक्ष-वनस्पतियों का योगदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है। बढ़ते हुए प्रदूषण को रोकने के लिए वृक्षारोपण हमारी नैतिक जिम्मेदारी है, इन्हें लगाना हमारे लिए हर हाल में लाभकारी है।वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में पेड़-पौधे लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वहीं, वास्तु शास्त्र में विभिन्न पेड़-पौधों का अपना एक अलग ही महत्व माना जाता है। वास्तु के मुताबिक पेड़-पौधे अगर सही दिशा में लगाए जाएं तो घर के वास्तु दोष दूर होते हैं। वहीं, गलत दिशा में लगे पेड़-पौधे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं, जो शारीरिक, आर्थिक एवं मानसिक समस्याओं का कारण भी बन सकते हैं। जिसका गृहवासियों की सुख-समृद्धि पर बुरा प्रभाव पड़ता है। साथ ही साथ धन की हानि भी होती है।
भारतीय जनता पार्टी ने बीते 6 अप्रैल को अपना 42वां स्थापना दिवस मनाया| 11 करोड़ सदस्य संख्या के आधार पर विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुकी भाजपा ने अपनी आयु के 42 वर्ष पूरे कर लिए हैं| न केवल सदस्य संख्या बल्कि राजनीति के अन्य कई प्रतिमानों के आधार पर भी भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी होने का गौरव प्राप्त है| देश की विभिन्न विधानसभाओं, लोकसभा तथा राज्यसभा में भी सदस्य संख्या के आधार पर बीजेपी अपना वर्चस्व स्थापित करने में सफल हुई है| राज्यसभा में 101 सदस्य संख्या हासिल करके भाजपा 1988 के बाद पहली बड़ी पार्टी बन गयी है| वहीँ लोकसभा में इसके 303 सांसद हैं| जो कि पार्टी गठन के बाद अब तक की सबसे बड़ी संख्या है| उत्तर प्रदेश सहित देश के 12 राज्यों में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है| जबकि बिहार सहित चार राज्यों की सरकार भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से चल रही है|
देश के अहम मुद्दों से भटक रही सरकार धर्म और जात-पात के मसलों में अटकी पड़ी है। माना कि देश की शांति हनन करने वालों को सबक सीखाना चाहिए, जो कानूनी तौर पर सीखाया जा सकता है। बुलडोज़र चलाना किसी मसले का हल नहीं, सरकार की इस नीति से विद्रोही उत्पन्न हो रहे है, जो पत्थरबाज़ी और आगजनी से और दंगे फैला रहे है।बुलडोजर नाम सुनते अब बस एक ही बात जेहन में आती है, कहां चला? किस एरिया में चला, किसके घर पर चला? ऐसा इसलिए क्योंकि देश के कुछेक राज्यों में वहां की सरकार के आदेश पर आए दिन लोगों के घर बुलडोजर से तोड़ दिए जा रहे हैं, खासकर उत्तर प्रदेश में। वहां तो आलम ये है कि बुलडोजर को राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार की कानून व्यवस्था का प्रतीक बना दिया गया है. सीएम योगी को ‘बुलडोजर बाबा’ कहा जाने लगा है।