जैसा कि हम सभी जानते हैं, हमारा देश 2030 के भारत(#SDG2030, #SustainableDevelopmentGoals2030) की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। जिसके अंतर्गत भारत सरकार द्वारा सभी 17 लक्ष्यों को हासिल किया जाना तय है। दरअसल इन लक्ष्यों के अंतर्गत ऐसे विषयों का समागम किया गया है। जिनकी कमी लिए हमारा देश लम्बे समय से गुजर.बसर कर रहा है। इन महत्वपूर्ण विषयों में से एक है उत्तम स्वास्थ्य तथा खुशहालीए जो कहीं न कहीं हमारे स्वस्थ जीवन को लेकर बेहद महत्वपूर्ण लक्ष्य है। भारत सरकार की इस बेमिसाल पहल का सबब यह है कि जनता का सहयोग इसमें प्रखर है। सिर्फ और सिर्फ सरकार द्वारा की जाने वाली तमाम कोशिशें तब तक निरर्थक हैं। जब तक जनता इसमें मजबूती से सहयोग न करे। इसलिए इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को सख्त नियम तथा कानून बनाने होंगे और साथ ही इनका सख्ती से पालन भी करना होगा।
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Jansaamna
अभी जल्दी की एक सच्ची घटना है। एक युवक ने नौकरी के लिए इंटरव्यू दिया था। वह पहले से ही रैंकर था। इंटरव्यू भी उसका सब से अच्छा हुआ था। इंटरव्यू में उससे जितने भी सवाल पूछे गए थे, उसने लगभग सभी सवालों के सही जवाब दिए थे। इम्प्रेशन भी उसने अच्छा जमाया था। सब कुछ बढ़िया होने के बावजूद उसे नौकरी के लिए सिलेक्ट नहीं किया गया। उस युवक ने अपने सोर्स से पता किया कि सब कुछ बढ़िया होने के बावजूद उसे नौकरी पर क्यों नहीं रखा गया? पता चला कि वह युवक सोशल मीडिया पर बिंदास फोटो डालता था और मन में जो आता था, वह लिख देता था। उससे कहा गया कि सोशल मीडिया पर आप जो कारनामा कर रहे हैं, उसकी वजह से आप को नौकरी मिली है।
वैश्विक महामारी कोविड-19 के बीच 21 जून 2021 को योग दिवस को पूरे विश्व में बहुत उत्तेजना, उत्साह खुशी और एक स्वास्थ्य डोज़ के रूप में मनाकर दिखा दिया कि स्वस्थ्य जीवन के लिए योग का कितना महत्व है। भारत के पीएम ने भी कहाहै कि वैश्विक महामारी के दौरान दुनिया के लिए, योग एक उम्मीद की किरण और इस मुश्किल समय में आत्मबल का स्त्रोत बना रहा और योग हमें तनाव से शक्ति का और नकारात्मकता से रचनात्मकता का रास्ता दिखाता है। चिकित्सा विज्ञान जितना उपचार पर ध्यान केन्द्रित करता है, उतना व्यक्ति को निरोगी बनाने पर भी करता है और योग ने लोगों को स्वस्थ बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आज कल फैशन बन गया है खास दिवस मनाने का तो 20 जून को पिता दिवस भी खूब मनाया जाएगा, बहुत कुछ लिखा जाएगा पर पिता वो शख़्सीयत है जिसको शब्दों में ढ़ालना मुमकिन ही नहीं। एक दिन पर्याप्त नहीं पिता के प्रति भावना जताने के लिए, प्रतिदिन पैर धोकर पिएं फिर भी ॠण न चुका पाएंगे पिता का।
( सभी रिजर्वेशन के बाद मेरिट ही एकमात्र आधार होना चाहिए चयन का लेकिन जब ओपन केटेगरी में भी 5-10-20 अंक सोसिवेकनोमिक के आ जाएं तो मेरिट कहाँ जाए? पति नौकरी पर है तो क्या पत्नी की प्रतिभा को नोच लिया जाये अगर वो गरीब घर से पढ़- लिखकर आई हो और नौकरी वाले आदमी से शादी कर ली तो उसको कोई हक नहीं कि वो भी अपनी मेहनत से नौकरी लगे. आपका भाई नौकरी पर है तो क्या आप उसकी सैलरी पर क्लेम करके अपना खर्चा पानी ले सकते हो कोर्ट में? आपका उत्तर नहीं होगा। अगर नहीं तो वो भाई पहले से अलग है या नौकरी के बाद अलग हो गया क्या वो आपके बच्चो का पालन पोषण कर देगा? अगर नहीं तो फिर बाकी को क्यू नुकसान हो रहा है?)
किसी ने ठीक ही लिखा है कि, पृथ्वी पर कोई भी एसा व्यक्ति नहीं होगा, जिसको कोई भी समस्या नहीं हो और पृथ्वी पर कोई भी समस्या ऐसी नहीं होगी, जिसका समाधान ना हो। गुरुनानक देव जी ने भी अपनी वाणी में कहा है कि : नानक दुखिया सब संसार। याने, दुनिया में हर व्यक्ति को कोई ना कोई दुख या समस्या जरूर होगी। इस पृथ्वीलोक पर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पद पर आसीन व्यक्ति से लेकर अंतिम श्रेणी के आखिरी व्यक्ति को भी कोई ना कोई समस्या या दुख जरूर होगा। चाहे वह कितना भी दावा करे कि वह सर्वसंपन्न भाग्यशाली व्यक्ति है, परंतु कहीं ना कहीं कोई ऐसी उसकी दुखती रग होगी जो उसकी समस्या या दुख का कारण होगा यह पक्की बात है।
अमेरिकी राश्ट्रपति जो बाइडेन ने भी हाल ही में लैब से वायरस के लीक होने की थ्योरी सहित कोरोना की उत्पत्ति कैसे हुई, इसकी जांच करने के लिए दोबारा प्रयास करने कें आदेश दिए हैं। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बीती 26 मई को अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को आदेश दे दिया है कि वे कोरोना के स्रोत का पता लगाने के लिए गहराई से जांच कर 90 दिनों में उनके समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करें। हालांकि चीन ने वुहान लैब से वायरस के लीक होने की थ्योरी को अत्यन्त असंभव कहकर खारिज कर दिया है और अमेरिका पर राजनीतिक हेरफेर का आरोप लगाया है। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलियन ने 8 जून को व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि हम अपने अन्तरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ चीन पर पारदर्शिता बरतने के लिए दबाव डालते रहेंगे और इसके साथ ही हम अपनी जांच प्रक्रिया भी जारी रखेंगे।
आंख में ज्वाला और सीने में त्रिशूल रखते हैं;
बाल श्रम के खिलाफ हर साल 12 जून को ‘विश्व बाल श्रम निषेध दिवस’ मनाया जाता है। पहली बार यह दिवस वर्ष 2002 में बाल श्रम को रोकने के लिए जागरूकता और सक्रियता बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था। बाल श्रम इतनी आसान समस्या नहीं है, जितनी लगती है। बच्चों को उनकी इच्छा के विरुद्ध किसी भी प्रकार के काम में शामिल करने का कार्य है बाल श्रम, जो उनके मौलिक अधिकारों को बाधित करता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 24 के अनुसार चौदह वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे को किसी कारखाने या खदान में या किसी खतरनाक रोजगार में नियोजित नहीं किया जाएगा। बाल श्रम की समस्या केवल भारत तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे विश्व में प्रचलित है। यह समस्या अफ्रीका और भारत सहित कई अविकसित या विकासशील देशों में प्रमुख है। बाल श्रम एशिया में 22 फीसदी, अफ्रीका में 32 फीसदी, लैटिन अमेरिका में 17 फीसदी, अमेरिका, कनाडा, यूरोप और अन्य धनी देशों में 1 फीसदी है।