हाथरस। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निबंधन (रजिस्ट्री) विभाग के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं और टाइपिस्टों का संयुक्त आंदोलन मंगलवार को चौदहवें दिन भी जारी रहा। उप-पंजीयक कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन और कलमबंद हड़ताल के माध्यम से आंदोलनकारियों ने सरकार से निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। आंदोलन को उस समय और बल मिला जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सिकन्द्राराऊ विधानसभा क्षेत्र से संभावित प्रत्याशी ललित कुमार बघेल धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया। इस दौरान आंदोलनकारियों ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर निजीकरण से संभावित रोजगार संकट और आम जनता पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी।
ललित कुमार बघेल ने कहा कि यह केवल अधिवक्ताओं और कर्मचारियों का मुद्दा नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका और आम जनता की सुविधाओं से जुड़ा विषय है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले को अखिलेश यादव तक पहुंचाया जाएगा तथा प्रदेश स्तर पर इसका विरोध दर्ज कराया जाएगा। धरना सभा की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष भारत सिंह कुशवाहा एडवोकेट ने की, जबकि संचालन जय प्रकाश गुप्ता ने किया। वक्ताओं ने कहा कि निजीकरण लागू होने की स्थिति में आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है तथा व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो सकती है।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार निजीकरण संबंधी प्रस्ताव वापस नहीं लेती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। धरने में युवराज सिंह चौहान, गौरी शंकर गुप्ता, नरेश प्रताप, विपिन कुमार, देवेंद्र दीक्षित शूल, राजेश बघेल, चन्द्रभान सिंह बघेल, प्रियांशु दरगढ़, विजय उपाध्याय, भगवान सिंह, दीपेश पाठक, आनंद कुमार, अवधेश कुमार बघेल, राकेश यादव, अमित कुमार बघेल, कोमल सिंह, मुनेश यादव, श्रीकृष्ण, उदयवीर सिंह, महेंद्र यादव, दिनेश माहौर, श्रीनिवास मुनीम, देवेंद्र कुमार संत सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता एवं आंदोलनकारी उपस्थित रहे।
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