Thursday, August 27, 2026
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एक घंटे की बारिश ने गुरुग्राम की टाउन प्लानिंग और ड्रेनेज व्यवस्था पर खड़े किए सवाल

गुरुग्राम। देश की मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में 24 अगस्त को हुई करीब एक घंटे की बारिश ने शहर की टाउन प्लानिंग और ड्रेनेज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बारिश शुरू होने के कुछ ही देर बाद शहर की कई प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गईं। जगह-जगह जलभराव के कारण घंटों तक यातायात प्रभावित रहा और कई वाहन पानी के बीच फंस गए। जलभराव का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों पर दिखाई दिया। कई स्कूल बसें घंटों जाम में फंसी रहीं। बसों में सवार बच्चे परेशान होते रहे और उनके अभिभावक स्कूलों एवं बस चालकों से संपर्क करने का प्रयास करते रहे। हालात को देखते हुए प्रशासन ने सरकारी और निजी स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने तथा 25 अगस्त को निजी कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी।

गुरुग्राम की मशहूर गोल्फ कोर्स रोड और उसके आसपास के पॉश इलाकों में भी भारी जलभराव देखने को मिला। डीएलएफ मैग्नोलियास के बाहर घुटनों तक कीचड़ भरे पानी के वीडियो सामने आए। डीएलएफ गोल्फ कोर्स और रैपिड मेट्रो वायडक्ट के बीच स्थित इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बनी रही। इन क्षेत्रों में करोड़ों रुपये की कीमत वाले लग्जरी आवास और बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट होने के बावजूद बारिश के दौरान जलभराव की समस्या ने शहर की बुनियादी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, शहर की मूल जल निकासी प्रणाली को प्रति घंटे केवल 2.5 मिलीमीटर बारिश का पानी संभालने के लिए डिजाइन किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि इसे अब अपग्रेड कर करीब 6.2 से 7 मिलीमीटर प्रति घंटे बारिश के पानी को संभालने लायक बनाया गया है। इसके बावजूद कम समय की बारिश में बड़े पैमाने पर जलभराव होना ड्रेनेज व्यवस्था की क्षमता और उसके रखरखाव पर सवाल खड़े करता है।

एक ओर गुरुग्राम में करोड़ों रुपये के लग्जरी घर और अरबों रुपये के प्रोजेक्ट तेजी से आकार ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बारिश के दौरान सड़कों का जलमग्न होना यह सवाल उठाता है कि क्या शहर का मौजूदा ड्रेनेज नेटवर्क उसके तेजी से बढ़ते शहरीकरण के अनुरूप विकसित किया गया है। 24 अगस्त की बारिश के बाद सामने आई तस्वीरों ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में निर्माण और निवेश के साथ-साथ जल निकासी, सड़क सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं को कितनी प्राथमिकता दी जा रही है।

फोटो एवं समाचार: कमल नैन नारंग