Thursday, September 3, 2026
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मंदिर में शिक्षा और संस्कार दोनों मिलते हैं : निर्भय सागर

फिरोजाबाद। वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भय सागर महाराज ससंघ द्वारा छदामीलाल जैन मंदिर में प्रतिदिन ज्ञान की वर्षा की जा रही है। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रवचन सुनकर धर्मलाभ ले रहे हैं। आचार्य श्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा देश सहिष्णुता और सर्वधर्म समभाव की भावना वाला देश है। दिगंबरत्व हमारी संस्कृति है और यह विश्वव्यापी धर्म है। उन्होंने कहा कि दिगंबरत्व वासना का नहीं, उपासना का प्रतीक है। यह प्रदर्शन का नहीं, बल्कि आत्मदर्शन का प्रतीक है। दिगंबरत्व आत्मसाधना के लिए है, भौतिक साधनों के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि मनुष्य निर्विकार और निष्कपट होकर जीवन जीने का प्रयास करे। जब मनुष्य विषय-वासनाओं से मुक्त होकर निश्चल भाव से आत्मसाधना करता है, तभी परमात्मा की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने आत्मशुद्धि और साधना का संदेश दिया। केवल बाहरी रूप बदलने से मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती, बल्कि जीवित रहते हुए शरीर को नश्वर मानकर आत्मा में स्थित परम तत्व की साधना करने से शिवत्व की प्राप्ति होती है। आचार्यश्री ने कहा कि संत वही है, जिसने अपने जीवन में शांति को धारण कर लिया हो और संसार की आसक्तियों का अंत कर लिया हो। सच्चा साधु सच्चे ज्ञान, सच्ची आस्था और सच्चे आचरण से युक्त होता है। सच्चे साधु की सेवा करने से मनुष्य को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि जहां मंदिर होता है, वहां औषधालय, भोजनालय और पाठशाला भी होती है। स्कूल में केवल शिक्षा मिलती है, जबकि मंदिर में शिक्षा के साथ संस्कार भी मिलते हैं। मंदिर व्यक्ति को धर्म, संस्कार और सदाचार की सीख देता है। धर्मसभा में विनोद मिलेनियम, अरुण जैन पीली कोठी, अजय जैन एडवोकेट, राजेश जैन, निमेष जैन, विशाल जैन, पंकज जैन, अनुज जैन तुलसी विहार, हीरालाल जैन, शैलेंद्र जैन शैली, मीडिया प्रभारी अजय जैन बजाज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।