लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में बुधवार को आयोजित राज्य स्तरीय विमर्श कार्यक्रम में शिक्षकों और विशेषज्ञों ने भारतीय दर्शन, पंचकोश की अवधारणा, मानसिक स्वास्थ्य और विद्यार्थियों के सामने आने वाली भावनात्मक चुनौतियों पर चर्चा की। बीबीएयू और एनसीईआरटी के मनोदर्पण प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। कार्यक्रम में समग्र शिक्षा (माध्यमिक) के संयुक्त शिक्षा निदेशक विवेक नौटियाल, मनोदर्पण प्रकोष्ठ के प्रभारी प्रो. विनोद कुमार शनवाल और नोडल सेंटर के समन्वयक डॉ. अर्पित शैलेश मौजूद रहे। एनसीईआरटी के डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशनल साइकोलॉजी एंड फाउंडेशन ऑफ एजुकेशन के प्रमुख प्रो. प्रभात कुमार मिश्रा ऑनलाइन जुड़े।
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने भारतीय और पाश्चात्य दर्शन की तुलना करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में प्रकृति और संसाधनों के साथ संतुलन पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में व्यक्ति, समाज, प्रकृति और पर्यावरण को एक-दूसरे से जुड़ा माना गया है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को विद्यार्थियों की शिक्षा से जोड़ने की जरूरत बताई। प्रो. मित्तल ने भारतीय ज्ञान प्रणाली में वर्णित पंचकोश—अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोश—का उल्लेख करते हुए इसे व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आंतरिक विकास से जोड़कर समझाया। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने पर जोर दिया।
वहीं, संयुक्त शिक्षा निदेशक विवेक नौटियाल ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण को शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने मनोदर्पण प्रकोष्ठ की टेली-काउंसलिंग सुविधा, विशेषज्ञों से संवाद और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तनाव, चिंता और भावनात्मक चुनौतियों से जूझ रहे विद्यार्थियों को समय पर सहयोग और मार्गदर्शन मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास में शिक्षक और अभिभावक दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। बच्चों की भावनाओं को समझने के साथ उन्हें सुरक्षित और सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है। कार्यक्रम में प्रो. प्रभात कुमार मिश्रा ने रिपोर्ट प्रस्तुत कर प्रमुख बिंदुओं और निष्कर्षों की जानकारी दी। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ विशेष शिक्षकों ने भी प्रतिभाग किया। अंत में प्रो. विनोद कुमार शनवाल ने आभार जताया।
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