Sunday, October 25, 2026
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हाथरस विधानसभा में बिछने लगी 2027 की सियासी बिसात

➤ भाजपा में टिकट के लिए दो दर्जन से अधिक दावेदार

➤ सपा-बसपा में भी बढ़ी सक्रियता; स्थानीय मुद्दे और सामाजिक समीकरण होंगे निर्णायक

हाथरस। विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ आरक्षित 78-हाथरस सीट पर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा में वर्तमान विधायक अंजुला सिंह माहौर के अलावा संध्या आर्य, रामवीर सिंह भैयाजी, चंद्रशेखर रावल, पूर्व सांसद राजेश दिवाकर, वासुदेव माहौर समेत दो दर्जन से अधिक नाम टिकट की दौड़ में बताए जा रहे हैं। सपा में रामनारायण काके समेत करीब एक दर्जन दावेदार सक्रिय हैं, जबकि बसपा में भी एक दर्जन से अधिक नाम चर्चा में हैं। आजाद समाज पार्टी के घोषित प्रत्याशी पूर्व आईपीएस आदित्य प्रकाश वर्मा के पार्टी छोड़ने के बाद वहां भी समीकरण बदले हैं। पिछले दो चुनावों में भाजपा ने सीट पर मजबूत प्रदर्शन किया है। 2017 में हरि शंकर माहौर ने 1,33,840 वोट लेकर 70,661 मतों से जीत दर्ज की थी। 2022 में अंजुला सिंह माहौर को 1,54,655 वोट मिले और भाजपा की जीत का अंतर बढ़कर 1,00,856 हो गया। ऐसे में विपक्ष के सामने अपने वोट आधार को प्रभावी ढंग से संगठित करने की बड़ी चुनौती है।

आरक्षित सीट पर विभिन्न अनुसूचित जाति वर्गों के साथ ठाकुर, ब्राह्मण, वैश्य, कुशवाहा, जाट, बघेल और मुस्लिम मतदाताओं के सामाजिक समीकरण महत्वपूर्ण रहेंगे। 2026 की अंतिम मतदाता सूची में 3,69,865 मतदाता हैं। वहीं रोजगार, औद्योगिक निवेश, सड़क-नाली, जलभराव, ट्रैफिक, पार्किंग, अतिक्रमण, स्वास्थ्य, सफाई, ग्रामीण सड़क-बिजली और कृषि-आलू प्रसंस्करण जैसे स्थानीय मुद्दे चुनावी विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं। विधायक के खिलाफ स्थानीय स्तर पर कुछ विरोध के मामले सामने आए हैं, लेकिन इन्हें अभी व्यापक सत्ता-विरोधी लहर का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। 2027 में प्रत्याशी चयन, सामाजिक समीकरण, छोटे दलों व निर्दलीयों से वोटों का बिखराव और डिजिटल प्रचार भी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। फेसबुक, यूट्यूब, व्हाट्सऐप और स्थानीय डिजिटल प्लेटफॉर्म चुनावी जनसंपर्क के प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। ऐसे में हाथरस की सियासी बिसात बिछ चुकी है, लेकिन मुकाबले की असली तस्वीर टिकट वितरण और प्रत्याशियों के मैदान में उतरने के बाद ही साफ होगी।